जाने राजकाज में क्या है खास

जाने राजकाज में क्या है खास

गांधी जी की जन्म भूमि वाले पड़ोसी सूबे में राज का काज करने वाले एक साहब को वापस आने की चर्चाएं एकदम बंद हो गई।

चर्चाएं थमी
गांधी जी की जन्म भूमि वाले पड़ोसी सूबे में राज का काज करने वाले एक साहब को वापस आने की चर्चाएं एकदम बंद हो गई। राज बदलते ही सबसे पहले बुलाने वाले तीन अफसरों की सूची में एक नाम उनका भी था। दौसा की धरती पर कुलामांडी खा चुके साहब भी छोटे-मोटे नहीं बल्कि गुजरे जमाने में नमोजी की जुबान पर ही रहते थे। चर्चा तो यहां तक थी कि 91 बैच के साहब को सीएमओ का जिम्मा सौंपा जाएगा, लेकिन चर्चाओं पर अचानक विराम लग गया। राज का काज करने वाले लंच केबिनो में बतियाते हैं कि दिल्ली में ही बैठे एक साहब के अडंगे के चलते उनके लौटने की उम्मीदें खत्म हो गई।

राजनीति भोज की
मीनेश वंशजों और देवनारायण वंशजों वोटों को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए दोनों तरफ भोज की राजनीति भी शुरू हो गई है। कुछ दिनों पहले गुलाबीनगर में हुए इसी तरह के एक भोज में दोनों समाजों के आधा दर्जन से भी ज्यादा विधायकों ने एकता के लिए हाथ खड़े किए। भोज का असर भी दिखा। कल तक समाज के लिए कुछ भी करने की कसमें खाने वाले मीणा जाति के एक युवा विधायक के मुंह से तो यह भी निकला कि पपलाज माताजी के भक्त डॉक्टर की धमकी से हम विचलित नहीं हैं।

उड़ी हवाइयां
पिछले दिनों खाकी वाले महकमें में घूसखोरों के हाथ क्या रंगे, कइयों के चेहरों की हवाईयां उड़ गई। बाबूजी के पास मिले बही खातों में जिन लोगों के नाम खंदी जमा है, वो अपने-अपने हिसाब से बदनामी से बचने का जुगाड़ तलाश रहे हैं। वैसे तो आए दिन कईयों के हाथ रंगते हैं, किन्तु इस बार मामला सीधा ऊपर वालों से जुड़ा है। एक साहब के मुंह से निकल पड़ा कि फाइलों पर लिखे कूट शब्दों का खुलासा हो गया तो बहुत बुरा होगा। इसमें डबल जीरों वाले कूट शब्द से कईयों की सफेदी फीकी पड़ सकती है।

मुद्दा बना राम मंदिर  
इन दिनों राम मंदिर के सामने कोई भी मुद््दा नहीं टिक पा रहा है। हर गली और चौराहों पर सिर्फ राम ही लोगों की जुबान पर है। राज का काज करने वाले भी रात-दिन इसी पर बतियाते हैं। इंदिरा गांधी भवन में बने हाथ वालों के ठिकाने और सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के दफ्तर में भी राम मंदिर को लेकर ही बहस हो रही है। चर्चा है कि दिल्ली दरबार के लिए होने वाली जंग में भी दोनों तरफ से सर्जिकल एंड एयर स्ट्राइक व्यापार, रोजगार और धारा 370 को भूल सिर्फ पहली बार राम मंदिर ही बड़ा मुद्दा होगा और हर पार्टी अपने-अपने हिसाब से इसे भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

गुस्सा बड़ी मैम का
इन दिनों सैर-सपाटे वाले महकमें के बड़ी मैम की लाल आंखों को लेकर राज के साथ उसका काज करने वालों में भी काफी खुसरफुसर है। मैम भी सरकारी कारिन्दी नहीं बल्कि जनप्रतिनिधि हैं। गुलाबीनगर के राजघराने से ताल्लुक रखनी वाली मैम ने महकमें को ठीक करने के लिए दिन में भी कई सपने देखे हैं। बीते शुक्र को राज के कारिन्दों से पाला पड़ा तो मैम साहब को कहना पड़ा कि या तो महकमें को ठीक कर दूंगी, या फिर छोड़ दूंगी। गुस्से में मैम साहब की लाल आंखे होना तो लाजमी है पर उनको कौन समझाए कि महकमा राज दरबार की तरह नहीं बल्कि काज करने वालों के हिसाब से चलता है। अब तक महकमें में कई आए और सैर सपाटा कर चले गए, मगर काज करने वाले के तरीके में कोई बदलाव नहीं कर पाए। गए राज में कोशिश तो बाईसा ने भी की थी, मगर पार नहीं पड़ी।

एक जुमला यह भी
सूबे में इन दिनों एक जुमला जोरों पर है। जुमला भी छोटा-मोटा नहीं बल्कि मुक्त और युक्त को लेकर है। जुमले से सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में बना भगवा ठिकाना और इंदिरा गांधी भवन में बना पीसीसी दफ्तर भी अछूता नहीं है। हर कोई इस जुमले की चर्चा किए बिना नहीं रहता। जुमला है कि गुजराती जोड़ी का कांग्रेस मुक्त भारत का नारा तो समझ की बात है, लेकिन कांग्रेस युक्त भाजपा का पैंतरा समझ से बाहर है। पैंतरे को समझने के लिए गुजरात के बॉर्डर से सटे बांसवाड़ा के भाई लोगों ने भेजा फ्राई खाकर भी देख लिया, मगर पैंतरा है कि भेजे में घुसने का नाम ही नहीं ले रहा। 

-एल.एल. शर्मा
(ये लेखक के अपने विचार है)

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