खतरा आसन्न खड़ा, विभाग निद्रा में पड़ा

निगम के फायर अनुभाग ने नोटिस देकर की इतिश्री

खतरा आसन्न खड़ा, विभाग निद्रा में पड़ा
भीषण गर्मी के बावजूद एक साथ कई लोगों के यहां रहने और वहां आग से सुरक्षा के कोई इंतजाम तक नहीं होना खतरे के संकेत हैं।

कोटा ।  कहते हैं न कि पुलिस और प्रशासन हर बार हादसों के बाद ही चेतता है। उससे पहले हादसा होने की जगहों पर किसी का कोई ध्यान नहीं रहता। गुजरात के राजकोट में गत दिनों गेम जोन में आग लगने से 27 लोगों की मौत का जो दर्दनाक हादसा हुआ। उसी तरह का हादसा कोटा में भी हो सकता है।  शहर के तीन बड़े मॉल में भी गेम जोन बने हुए हैं। डीसीएम रोड स्थित आहलूवालिया मॉल, झालावाडं रोड स्थित पीवीआर और सिटी मॉल में गेम जोन चल रहे हैं। यहां दिनभर बड़ी संख्या में लोग विशेष रूप से बच्चे तरह-तरह के गेम खेलने के लिए आ रहे हैं। गर्मी के सीजन में स्कूलों की छुट्टियां होने से बच्चों की संख्या भी अधिक रहती है। भीषण गर्मी के बावजूद एक साथ कई लोगों के यहां रहने और वहां आग से सुरक्षा के कोई इंतजाम तक नहीं होना खतरे के संकेत हैं। 

भीषण गर्मी में शॉर्ट सर्किट का खतरा
शहर में इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है। तापमान 48 डिग्री के पार है। जिससे लोगों को गर्मी से राहत ही नहीं मिल रही है। ऐसे  मॉल व गेम जोन में गर्मी से राहत के लिए एसी लगे हुए हैं। कई बच्चे व लोग तो गर्मी के दिनों में इसलिए भी गमे जोन में जाते हैं जिससे कुछ समय उन्हें एसी में रहने का मौका मिलता है। हालांकि वहां रबड़ और प्लास्टिक का काम भी है। साथ ही एसी में शॉर्ट सर्किट का खतरा भी बना हुआ है। फायर अनुभाग के अधिकारियों के अनुसार शहर में गर्मी के दिनों में अधिकतर आग लगने की घटनाएं शॉर्ट सर्किट से ही हो रही हैं। 

नोटिस जारी, 7 दिन में सुधार के निर्देश
सीएफओ राकेश व्यास ने बताया कि तीनो मॉल के गेम जोन में कमियां पाई जाने पर तीनों मॉल में गम संचालकों को नोटिस जारी किए हैं। साथ ही उन्हें 7 दिन में आग से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं गेम जोन के लिए अलग से फायर एनओसी लेने को कहा गया है। उन्होंने बताया कि 7 दिन बाद फिर से वहां सभी जगह पर जांच की जाएगी। यदि व्यवस्थाओं में सुधार नहीं पाया गया तो सीजिंग तक की जा सकती है।  

फायर टीम ने की जांच तो मिली खामियां
राजकोट के गेम जोन में हुई आग लगने की घटना और उसमें 12 बच्चों समेत 27 लोगों की मौत का दर्दनाक हादसा हुआ था। जानकारों के अनुसार आग लगने के बाद वहां से बाहर निकलने की जगह ही नहीं मिली और मात्र 30 सैकंड में आग ने ऐसा तांडव मचाया कि 27 लोगों की जान चली गई। उस हादसे के बाद नगर निगम की फायर टीम ने शहर के तीनों मॉल के गेम जोन की जांच की तो वहां कई खामियां पाई गई।  सीएफओ राकेश व्यास ने बताया कि मॉल में गेम जोन होने से वहां फायर सिस्टम तो लगा हुआ है लेकिन विशेष रूप से गेम जोन में आग बुझाने के जो छोटे सिलेंडर लगे हुए थे वे रिफिल नहीं थे। सिटी मॉल व आहलूवालिया में तो गेम जोन में प्रवेश-निकास की अलग-अलग जगह थी लेकिन पीवीआर में ऐसा नहीं पाया गया।  व्यास ने बताया कि कहीं वायरिंग खुली पड़ी थी। कहीं तारों का गुच्छा बना हुआ था। तार खुले हुए थे। रास्ते में स्क्रेप पड़ा हुआ था। गेम जोन में सुरक्षा के जो इंतजाम होने चाहिए उनमें से अधिकतर में ऐसा नहीं पाया गया। 

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यही हालत अस्पतालों में
शहर के सरकारी व अधिकतर निजी अस्पतालों में भी आग से सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं है। जिससे वहां भी हादसा होने का खतरा बना हुआ है। गत दिनों भी एक निजी अस्पताल में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की घटना हो चुकी है।  उसके बाद नगर निगम की फायर टीम ने कोटा के अस्पतालों में भी जांच की थी। जहां कई रह की कमियां पाई गई थी।

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सुरक्षा के इंतजाम तो होने चाहिए
 गेम जोन में कई अच्छे गेम होते हैं। जिन्हें खेलने में आनंद आता है। गेम के लिए जब संचालक अधिक राशि वसूल रहे हैं तो वहां सुरक्षा के इंतजाम भी होने चाहिए। खास तोर पर गर्मी में आग से सुरक्षा की व्यवस्था तो होनी चाहिए। गुजरात के राजकोट का हादसा तो काफी दिल दहला देने वाला था। उसके बाद तो डर ही लगने लगा है। 
-शुभांगी शर्मा, दादाबाड़ी

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गेम जोन में खेलने के लिह कई बार बच्चे जिद करते हैं। गर्मी की छुट्टी होने से उन्हें वहां लेकर जाना भी पड़ा है। लेकिन आग से सुरक्षा के इंतजाम पर कभी ध्यान नहीं दिया। लेकिन राजकोट की घटना के बाद लगा कि ऐसी जगह पर भी आग से सुरक्षा के इंतजाम तो आयोजकों को करने ही चाहिए। जिससे उस तरह का हादसा कोटा में नहीं हो। 
-गिरीराज गौतम, महावीर नगर

इनका कहना है
समय-समय पर हॉस्टल, मॉल व अस्पतालों में फायर सिस्टम की जांच की जाती है। कमियां पाई जाने पर नोटिस जारी किए गए हैं। कई निजी अस्पतालों में उनकी क्षमता के हिसाब से जितनी व्यवस्थाएं होनी चाहिए उतनी नहीं पाई गई। जिस पर नोटिस जारी किए गए थे। लेकिन कुछ समय से चुनावी व्यस्तता के कारण दोबारा से जांच नहीं की गई है। चुनाव बाद फिर से जांच की जाएगी। यदि कमियों में सुधार नहीं पाया गया तो नियमानुसार आगे की कार्यवाही की जाएगी।
-राकेश व्यास, सीएफओ, नगर निगम कोटा दक्षिण 

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