युवाओं की आवाज : जुलूस की मौज, आमजन की आफत!
वीआईपी के स्वागत में सड़कें बंद, जुलूस से ट्रैफिक बेहाल
कोटा। त्योहारों पर जुलूस निकालना, धार्मिक आयोजनों में शामिल होना या बड़े लोगों और जनप्रतिनिधियों का स्वागत करना सामाजिक और लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा है। लेकिन जब यही आयोजन शहर की प्रमुख सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर घंटों ट्रैफिक रोकने का कारण बन जाएं तो परेशानी आमजन को उठानी पड़ती है। वीआईपी के आने से कई बार आधा घंटे पहले ही रास्ते बंद कर दिए जाते हैं। वहीं जुलूस के दौरान सड़क के बड़े हिस्से पर लोगों की भीड़ जमा हो जाती है। इसका सीधा असर नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों, बाइक राइडर्स और जरूरी काम से निकलने वाले लोगों पर पड़ता है। दैनिक नवज्योति के ‘वॉइस ऑफ यूथ’ अभियान में युवाओं और शहरवासियों ने सवाल उठाया कि स्वागत और जुलूस जरूरी हैं तो आमजन की राह क्यों रोकी जाए? लोगों ने सुझाव दिया कि वीआईपी और जुलूसों के लिए अलग रूट तय हो तथा स्वागत के लिए भी ऐसे स्थान चुने जाएं, जहां ट्रैफिक बाधित न हो।
वीआईपी या जुलूस के लिए अलग लाइन हो
वीआईपी आते हैं तो आधे घंटे पहले ही रास्ता बंद कर दिया जाता है। गर्मी और बरसात में आमजन को काफी परेशानी होती है। कई लोगों के जरूरी काम छूट जाते हैं। प्रशासन को चाहिए कि वीआईपी और जुलूस के लिए पूरे शहर में अलग रूट तय किया जाए। इसी लाइन से जुलूस निकले, ताकि आमजन को परेशानी न हो। जब वीआईपी या जुलूस नहीं हो तो इस मार्ग का उपयोग उन लोगों के लिए किया जा सकता है, जिन्हें जल्दी जाना है।
-सोनल गुप्ता, सामाजिक कार्यकर्ता
वीआईपी के लिए अलग व्यवस्था हो
जिन जनप्रतिनिधियों को हमने चुना है, उन्हीं के आने पर आमजन को परेशानी नहीं होनी चाहिए। वीआईपी आएं तो उन्हें अलग वैकल्पिक मार्ग से निकाला जाए। गणपति उत्सव, जन्माष्टमी सहित अन्य आयोजनों के जुलूसों के लिए भी एक निर्धारित रूट होना चाहिए। यदि जुलूस का स्वागत करना है तो ऐसी जगह अनुमति दी जाए, जहां सड़क चौड़ी हो और ट्रैफिक बाधित न हो। इससे आमजन को परेशानी से बचाया जा सकता है।
-रीना मीणा, स्टूडेंट, बीएड
प्रशासन करे विशेष व्यवस्था
वीआईपी के आने पर प्रमुख चौराहों पर स्वागत के लिए टेंट लगा दिए जाते हैं और कई बार घंटों भाषण चलता है। इससे सड़क पर जाम तो लगता ही है, आसपास के स्कूल और विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है। परीक्षा के समय परेशानी और बढ़ जाती है। कई बार जाम के कारण विद्यार्थी समय पर नहीं पहुंच पाते। प्रशासन को वीआईपी दौरे और धार्मिक आयोजनों के लिए अलग व्यवस्था करनी चाहिए।
-अमान अली, कक्षा 12वीं, स्टूडेंट
जाम से छूटती है सवारी, होता है आर्थिक नुकसान
मैं निजी कंपनी में बाइक राइडर हूं। कई बार जाम के कारण समय पर नहीं पहुंच पाता। इससे सामने वाले व्यक्ति की डांट सुननी पड़ती है और कई बार सवारी भी निकल जाती है। इससे सीधा आर्थिक नुकसान होता है और काम पर भी असर पड़ता है। शहर में निकलने वाले जुलूस और आए दिन आने वाले वीआईपी कार्यक्रमों को लेकर प्रशासन को पहले से योजना बनानी चाहिए। रूट मैप तैयार कर अलग व्यवस्था हो, जिससे आमजन को परेशानी का सामना न करना पड़े।
-मनोज सिंह, बाइक राइडर

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