युवा की आवाज : सफाई तो ठीक है साहब...अब स्टूडेन्ट की भी सुनिए!
एम्बुलेंस, वाटर कूलर और हर बड़े वार्ड में डिस्पेंसरी की भी रखी मांग
कोटा। लोकतंत्र में युवा महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि वे समाज की वर्तमान ऊर्जा और भविष्य की दिशा का प्रतिनिधित्व करते हैं। युवाओं की सोच, नए विचार और बदलाव को स्वीकार करने की क्षमता लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाती है। युवा वर्ग शिक्षा, रोजगार, तकनीक, पर्यावरण और सामाजिक सुधार जैसे विषयों पर नए दृष्टिकोण लेकर आता है। उनकी सक्रिय भागीदारी से लोकतंत्र अधिक जीवंत, समावेशी और जवाबदेह बनता है। दैनिक नवज्योति आज से युवा की आवाजह्व नाम से एक नया कॉलम प्रारंभ कर रहा है। कोटा के युवा अब अपने शहर की बेहतरी से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रख सकेंगे। यह पहल युवा शक्ति को जोड़ने और शहर निर्माण में उनकी भागीदारी बढ़ाने की दिशा में प्रेरणादायी कदम बन सकेगा। यह कॉलम युवाओं के सपनों, विचारों और संकल्पों को मंच देगा। इसी आशा के साथ आज से पढ़े युवा की आवाज
युवाओं ने नई नगर सरकार से सुविधाएं बढ़ाने की रखी उम्मीदें
नगरीय निकायों का बोर्ड पांच साल में बदलता है, लेकिन हर बार शहर के विकास में सफाई व्यवस्था प्रमुख मुद्दों में शामिल रहती है। कोटा की पहचान हालांकि सिर्फ साफ-सफाई से नहीं, बल्कि देशभर से आने वाले लाखों विद्यार्थियों से भी है। ऐसे में शहर के युवाओं की अपेक्षा है कि नई नगर सरकार उनके लिए भी ठोस योजनाएं बनाए। ह्यदैनिक नवज्योतिह्ण के ह्यवाइस ऑफ यूथह्ण अभियान के तहत जब नगर निगम के बनने वाले नए बोर्ड को लेकर विद्यार्थियों से बातचीत की गई तो उन्होंने शहर की मौजूदा सुविधाओं के साथ कई ऐसे सुझाव रखे, जिनसे कोटा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की रोजमर्रा की परेशानियां कम हो सकती हैं।
कोटा के युवाओं की शहर की सरकार से उम्मीदें: बस का टाइम-टेबल और किराया बताए ऐप, सरकारी हॉस्टल से मिले राहत, लाइब्रेरी और एम्बुलेंस की भी मांग
बस में बैठें तो पहला सवाल—किराया कितना?
कोटा में सिटी बस और ई-बसें संचालित हो रही हैं, लेकिन बाहर से आने वाले नए विद्यार्थियों के लिए बसों के रूट, स्टॉप, समय और किराये की जानकारी आसानी से उपलब्ध नहीं होती। युवाओं का सुझाव है कि नगर निगम ऐसा ऐप तैयार करे, जिसमें शहर की सभी बसों की रूट मैप, स्टॉप, समय-सारणी और किराये की जानकारी एक जगह उपलब्ध हो। इससे विद्यार्थियों को सुविधा मिलेगी और मनमाना किराया वसूलने की शिकायतों पर भी अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है।
-मोहित शर्मा, बीटेक स्टूडेन्ट, वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय
कूड़ेदान हों, तभी ह्यक्लीन कोटाह्ण की तस्वीर पूरी
केवल सफाईकर्मियों के भरोसे शहर को स्वच्छ नहीं रखा जा सकता। सार्वजनिक स्थानों पर पर्याप्त संख्या में कचरा पात्र होने चाहिए। सड़क पर कचरा फेंकने वालों पर नियमानुसार जुर्माना लगाया जाए, ताकि लोगों में जिम्मेदारी की भावना बढ़े। विद्यार्थियों के साथ सड़क हादसे होने या उनके बीमार पड़ने की स्थिति में समय पर चिकित्सा सुविधा मिलना जरूरी है। बड़े कोचिंग संस्थानों और विश्वविद्यालयों के आसपास एम्बुलेंस उपलब्ध हो तो विद्यार्थी को तत्काल अस्पताल पहुंचाया जा सकता है, जिससे उन्हें समय पर उपचार मिल सके।
-रोहित गौड़, स्टूडेन्ट मूल निवासी धौलपुर
हॉस्टल की ह्यजेबह्ण भी देखिए
कोटा में पढ़ाई के लिए आने वाले विद्यार्थियों के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में रहने की जगह और उसका किराया भी शामिल है। युवाओं का कहना है कि निजी हॉस्टल और पीजी का किराया कई विद्यार्थियों के बजट पर भारी पड़ता है। ऐसे में नगर निगम सरकारी छात्रावास विकसित करने की दिशा में काम करना चाहिए, जहां कम आय वाले विद्यार्थियों को किफायती दर पर रहने की सुविधा मिल सके। उन्होंने शहर में जगह-जगह वाटर कूलर लगाने की जरूरत भी बताई, ताकि विद्यार्थियों को सड़क पर पीने के पानी के लिए परेशान न होना पड़े।
-अजय रेवाड़, स्टूडेन्ट, राजस्थान तकनीकी, विश्वविद्यालय
लाइब्रेरी सिर्फ एक क्यों?
शहर में अध्ययन के लिए अधिक सार्वजनिक लाइब्रेरी बनाने की मांग भी रखी। कोटा जैसे एजुकेशन हब में विद्यार्थियों के लिए जगह-जगह ऐसी लाइब्रेरी होनी चाहिए, जहां पढ़ाई के माहौल के साथ ज्ञानवर्धक पुस्तकें और अखबार भी उपलब्ध हों, जिससे विद्यार्थी प्रतिदिन शाम को जाकर किताबें पढ़ सकें, जिससे उसका ज्ञान भी बढ़ेगा। वह ज्ञान उसे जीवन में आगे काम आएगा। साथ ही कोटा को और भी ज्यादा पहचान मिलेगी। वर्तमान मे ंकोटा में एक ही लाईब्रेरी है, जो पर्याप्त नहीं है।
-आदित्य सिंह, स्टूडेन्ट, राजस्थान तकनीकी, विश्वविद्यालय
स्मार्ट सिटी की तर्ज पर विकसित करें वार्ड
शहर की नई सरकार से वार्डों को स्मार्ट सिटी की तर्ज पर विकसित करने की उम्मीद है। शहर के अंदरुनी इलाकों में आवारा श्वान, मवेशियों के आतंक से मुक्ति प्राथमिकता में शुमार हो। वहीं, ढकनिया से संजय नगर के बीच मात्र विज्ञान नगर में ही एकमात्र डिस्पेंसरी है, जो आबादी से बहुत दूरी पर है। ऐसे में आबादी के हिसाब से हर बड़े वार्ड में एक डिस्पेंसरी खुलवाकर चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
-चित्रांशा कंवर गौड़, छात्रा राजकीय महाविद्यालय कोटा

Comment List