निकाय नतीजों में कांग्रेस के दिग्गजों की सियासी जमीन की तस्वीर साफ, पढ़े पूरी खबर
बीकानेर कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी शहरी कामयाबी
जयपुर। राजस्थान के 309 नगरीय निकायों के चुनाव और महापौर,सभापति, अध्यक्ष के चुनाव पूरे होने के बाद कांग्रेस के प्रमुख नेताओं के प्रभाव वाले क्षेत्रों की राजनीतिक तस्वीर सामने आई है। वार्ड स्तर पर भाजपा ने प्रदेश में कांग्रेस से अधिक सीटें हासिल कीं, लेकिन कांग्रेस ने कई नेताओं के प्रभाव वाले इलाकों में अपनी स्थानीय पकड़ बनाए रखी। कुल मिलाकर निकाय चुनाव में कांग्रेस के बड़े नेताओं के प्रभाव वाले क्षेत्रों में एक जैसी तस्वीर नहीं रही।
गहलोत के जोधपुर में 44-45, लेकिन मेयर भाजपा का :
पूर्व सीएम अशोक गहलोत के गृह जिले जोधपुर में कांग्रेस और भाजपा के बीच बेहद करीबी मुकाबला रहा। 100 सदस्यीय नगर निगम में दोनों दलों को 44-45 वार्ड मिले, जबकि 11 निर्दलीय निर्णायक स्थिति में रहे। 25 सितंबर को हुए महापौर चुनाव में भाजपा के प्रसन्न मेहता निर्वाचित हुए।
पायलट के प्रभाव क्षेत्र में कांग्रेस की वार्ड बढ़त :
कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट के विधानसभा क्षेत्र टोंक और प्रभाव वाले दौसा में कांग्रेस ने कई निकायों में मजबूत प्रदर्शन किया। अजमेर नगर निगम में भी कांग्रेस 37 वार्ड के साथ सबसे बड़ी पार्टी रही, जबकि भाजपा 32 पर रही। महापौर चुनाव में भाजपा की अनामिका शर्मा विजयी हुईं।
डोटासरा के सीकर में कांग्रेस का किला कायम :
पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा के प्रभाव वाले सीकर में कांग्रेस ने सबसे स्पष्ट स्थानीय सफलताओं में से एक हासिल की। सीकर नगर परिषद के 65 वार्डों में कांग्रेस ने 38 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा 22 पर रही। लक्ष्मणगढ़ में भी कांग्रेस बोर्ड बनाने में सफल रही।
जूली के अलवर में कांग्रेस दूसरे नंबर पर :
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के प्रभाव वाले अलवर नगर निगम में भाजपा को 28, कांग्रेस को 23 और निर्दलीयों को 13 वार्ड मिले। बाद में निर्दलीयों के समर्थन से भाजपा की सुमनलता अग्रवाल महापौर बनीं।
बीकानेर कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी शहरी कामयाबी :
कांग्रेस के लिए बीकानेर सबसे उल्लेखनीय बड़े शहरों में रहा। नगर निगम में कांग्रेस ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया और अनिल कल्ला महापौर चुने गए। बड़े नेताओं के क्षेत्रों में मिला जुला जनादेश: हाड़ौती में कांग्रेस का प्रदर्शन मिश्रित रहा। 26 निकायों में भाजपा ने 15 और कांग्रेस ने 10 बोर्ड बनाए, जबकि बारां में आम आदमी पार्टी ने एक निकाय में बहुमत हासिल कर स्थानीय समीकरण बदला।

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