उमर अब्दुल्ला बोले- बीजेपी को 370 हटाने में 70 साल लगे, हम भी अपने मिशन से पीछे नहीं हटेंगे

उमर अब्दुल्ला बोले- बीजेपी को 370 हटाने में 70 साल लगे, हम भी अपने मिशन से पीछे नहीं हटेंगे

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि मौजूदा सरकार से आर्टिकल-370 की बहाली की मांग करना मूर्खतापूर्ण होगा। पीएम से महबूबा मुफ्ती और फारुख अब्दुल्ला ने साफ कहा कि बीजेपी को अनुच्छेद-370 हटाने का एजेंडा कामयाब कराने में 70 साल लगे। हमें 70 सप्ताह या 70 महीने लगेंगे, तो भी हम अपने मिशन से पीछे नहीं हटेंगे।

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि मौजूदा सरकार से आर्टिकल-370 की बहाली की मांग करना मूर्खतापूर्ण होगा। मौजूदा सरकार की ओर से इसे बहाल करने के कोई संकेत नहीं मिले हैं। सर्वदलीय बैठक में किसी ने प्रधानमंत्री से नहीं कहा कि हम 5 अगस्त के फैसले को कबूल करते हैं। हमने कहा कि हम इससे नाराज हैं। पीएम से महबूबा मुफ्ती और फारुख अब्दुल्ला ने साफ कहा कि बीजेपी को अनुच्छेद-370 हटाने का एजेंडा कामयाब कराने में 70 साल लगे। हमें 70 सप्ताह या 70 महीने लगेंगे, तो भी हम अपने मिशन से पीछे नहीं हटेंगे।

प्रधानमंत्री के साथ जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों के नेताओं की बैठक में को लेकर श्रीनगर में उमर अब्दुल्ला ने कहा कि हमें वहां अलायंस के तौर पर नहीं बुलाया गया था। अगर बुलाया गया होता तो अलायंस की तरफ से एक को ही बुलाया गया होता। वहां पार्टियों को दावत दी गई। गुपकार अलायंस के सदस्यों ने बैठक में हिस्सा लिया। बैठक में हमने कोई ऐसी बात नहीं की जो अलायंस के एजेंडा के बाहर हो। सरकार ने पहले डिलिमिटेशेन, फिर चुनाव और उसके बाद राज्य का दर्जा देने की बात कही। हम सबकी तरफ से गुलाम नबी आजाद ने कहा कि हम ये टाइमलाइन नहीं मानते हैं। पहले डिलिमिटेशन, फिर राज्य का दर्जा और फिर चुनाव। चुनाव कराना ही है तो पहले राज्य का दर्जा लौटा दीजिए। उसके बाद हम चुनाव पर बात करेंगे।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां तक परिसीमन आयोग का सवाल है, पार्टी ने बहुत स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने फारूक अब्दुल्ला को जरूरत पड़ने पर विचार करने के लिए अधिकृत किया है। परिसीमन आयोग की ओर से नेशनल कांफ्रेंस के लिए कोई नया रुख नहीं किया गया है। नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात अच्छी रही। सभी पार्टियों ने अपनी बात उनके सामने रखी। उनकी तरफ से ये पहला कदम था कि किसी भी तरीके से जम्मू-कश्मीर के हालात बेहतर बनाए जाएं और एक राजनीतिक प्रक्रिया का दौर शुरू किया जाए। 

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