"मनरेगा" को "जी राम जी जी एक्ट" से बदलने पर बलबीर सिंह सिद्धू का केंद्र सरकार पर हमला, फैसला तुरंत वापिस लेने की मांग की

बलबीर सिद्धू ने बताया ग्रामीण अधिकारों पर हमला

कांग्रेस नेता बलबीर सिंह सिद्धू ने मनरेगा को जी राम जी अधिनियम से बदलने के प्रस्ताव की निंदा की। उन्होंने इसे ग्रामीण रोजगार, सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला बताया।

एसएएस नगर। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पंजाब के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने मंगलवार को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा ) को तथाकथित भारत विकास जी राम जी अधिनियम से बदलने की निंदा की और इसे ग्रामीण भारत की आर्थिक सुरक्षा और संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला बताया। इसके आगे सिद्धू ने कहा, मनरेगा महज एक कल्याणकारी योजना नहीं है, बल्कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन(संप्रग) सरकार द्वारा ग्रामीण परिवारों को 100 दिनों का मजदूरी रोजगार सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया ऐतिहासिक अधिकार-आधारित कानून है। उन्होंने कहा, मनरेगा ने सबसे गरीब लोगों को सशक्त बनाया, ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ ही संकटग्रस्त पलायन को कम किया और श्रम की गरिमा प्रदान की है। इसे कमजोर करना या बदलना भाजपा की गरीब-विरोधी मानसिकता को दर्शाता है।

पूर्व मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने समय पर मजदूरी भुगतान सुनिश्चित करके और कार्यदिवस बढ़ाकर मनरेगा को मजबूत करने के बजाय, बजट में कटौती, भुगतान में देरी और प्रौद्योगिकी के मनमाने उपयोग के माध्यम से इस योजना को व्यवस्थित रूप से कमजोर कर दिया है। उन्होंने कहा, अब, इसे जी राम जी अधिनियम से बदलने का प्रस्ताव करके, केंद्र एक कानूनी अधिकार को समाप्त करना चाहता है और इसे पूरी तरह से सरकार द्वारा नियंत्रित विवेकाधीन योजना में बदलना चाहता है। उन्होंने चेतावनी दी कि रोजगार की वैधानिक गारंटी को हटाने से लाखों ग्रामीण परिवार नौकरशाही के फैसलों और राजनीतिक मनमानी के भरोसे रह जाएंगे।

उन्होंने कहा, यह कदम हमारे संविधान में निहित सामाजिक न्याय की भावना को कमजोर करता है और किसानों, मजदूरों, दलितों और हाशिए पर पड़े समुदायों के हितों के साथ विश्वासघात करता है। इसके आगे बलबीर सिंह सिद्धू ने कहा, ऐसे समय में जब ग्रामीण संकट, बेरोजगारी और महंगाई बढ़ रही है, मनरेगा को कमजोर करना असंवेदनशील और गैर-जिम्मेदाराना दोनों है। उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार तुरंत अपना प्रस्ताव वापस ले, मनरेगा के लिए पर्याप्त धनराशि बहाल करे, सभी लंबित मजदूरी का भुगतान करे और राज्यों तथा हितधारकों से परामर्श करे। 

कांग्रेस नेता ने कहा कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के स्थान पर भगवान राम के नाम से नए कानून को जोड़कर एक संदिग्ध चाल चली है, जिसका उद्देश्य लोगों को गुमराह करना और धर्म के नाम पर वोट हासिल करना है। 

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