ब्लू ड्रम केस : मौत की सजा मिली, फिर भी फांसी से दूर! 21 महिलाओं की कहानी चौंका देगी

आखिर कहां अटक जाती है मौत की सजा ?

ब्लू ड्रम केस : मौत की सजा मिली, फिर भी फांसी से दूर! 21 महिलाओं की कहानी चौंका देगी
सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को फांसी की सजा मिलने के बाद देश में मृत्युदंड के कैदियों की स्थिति चर्चा में। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 571 कैदी मृत्युदंड का इंतजार कर रहे, 21 महिलाएं हैं। उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा नौ महिलाएं।

मेरठ। चर्चित ब्लू ड्रम हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद देश में मृत्युदंड का सामना कर रहे कैदियों की स्थिति फिर चर्चा में है। मार्च 2025 में सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोनों को फांसी की सजा मिली है, लेकिन इस फैसले का मतलब तत्काल फांसी नहीं है। सजा पर अमल से पहले निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 571 कैदी मृत्युदंड की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इनमें 21 महिलाएं शामिल हैं। इनके मामले पारिवारिक हत्याओं, बच्चों की हत्या और आतंकवाद से जुड़े अपराधों तक फैले हैं। कुछ मामलों में उच्च अदालतें सजा बरकरार रख चुकी हैं, जबकि अन्य में अपील या सजा की पुष्टि लंबित है।

उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा महिलाएं :

रिपोर्ट के अनुसार, मृत्युदंड का सामना कर रही 21 महिलाओं में से 9 उत्तर प्रदेश की हैं। बाकी महिलाएं केरल, हरियाणा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, बिहार, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से हैं। गीता देवी, जलधारा, रूपा सिंह, नाजिमा और हसीमा के मामलों में आगे की कानूनी कार्यवाही बाकी बताई गई है। सभी मामलों में महिलाओं के कानूनी विकल्प समाप्त नहीं हुए हैं।

Read More पुलिस ने सीजेपी के प्रदर्शन को नहीं दी अनुमति : धारा 163 के उल्लंघन पर कार्रवाई की चेतावनी, कहा- 10 दिन पहले सूचना देना आवश्यक

उत्तर प्रदेश में 2008 में परिवार के 7 सदस्यों की हत्या के मामले में एक महिला को 2010 में मौत की सजा सुनाई गई थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2013 में सजा बरकरार रखी और सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में अपील खारिज कर दी। पुनर्विचार याचिका और दया याचिकाएं भी खारिज होने के बावजूद उसे फांसी नहीं दी गई है। इसी तरह, 2003 के मुंबई बम धमाकों के मामले में एक अन्य महिला की अपील सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

Read More जंतर-मंतर कूच से पहले पुलिस की घेराबंदी : CJP नेताओं को विमान से उतारकर हिरासत में लिया, सड़कों पर लगाई कीलें; दीपके बोले- देखो देश कहा जा रहा

भारत में निचली अदालत की मौत की सजा पर अमल से पहले हाईकोर्ट की पुष्टि जरूरी है। इसके बाद दोषी सुप्रीम कोर्ट में अपील, पुनर्विचार या कानून के तहत उपलब्ध अन्य याचिकाएं दाखिल कर सकता है। राज्यपाल और राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका का विकल्प भी उपलब्ध है। ऐसे में मेरठ मामले में मुस्कान और साहिल की सजा के बाद भी आगे की न्यायिक प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।

Read More पीएम मोदी बोले- सीएम विजय के साथ मिलकर तमिलनाडु का विकास करेंगे, 13 हजार करोड़ की परियोजनाओं की सौगात

 

 

Related Posts

Post Comment

Comment List

Latest News

अफगानिस्तान में मचा कोहराम : बस और ट्रक की भिड़ंत में 15 लोगों की मौत, तेज रफ्तार बनी वजह अफगानिस्तान में मचा कोहराम : बस और ट्रक की भिड़ंत में 15 लोगों की मौत, तेज रफ्तार बनी वजह
तड़के भीषण सड़क हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि 25 घायल हो गए। कंधार-हेरात राजमार्ग पर तेज...
होप के ‘शतक’ व पॉल के ‘पंजे’ से वेस्ट इंडीज ने हासिल की बराबरी, भारत 24 रन से हारा
राम बारात मार्ग पर महापौर ने खुद थामी झाड़ू, कचरा गाड़ी भी चलाई
13 देशों के पर्यटकों का गांधी नगर स्टेशन पर स्वागत, आमेर महल और जंतर-मंतर के ऐतिहासिक वैभव से होंगे रूबरू
इंसान नहीं, रोबोट ने लड़की को छेड़ा, फिर पुलिस ने क्या किया?
अतिक्रमण से नाराज व्यापारी, चांदपोल बाजार में नहीं करेंगे सामूहिक दीपावली सजावट
नरैना थाने में संघ प्रचारक से मारपीट का मामला : थाना प्रभारी समेत 6 पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज, बदले जिला मुख्यालय