केरल चुनावों पर संकट के बादल : 9 अप्रैल गरज के साथ तूफान की चेतावनी; मतदान प्रतिशत को लेकर राजनीतिक दलों में बढ़ी चिंता, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट
केरल चुनाव पर मौसम की मार: 9 अप्रैल को बारिश का साया
केरल में 9 अप्रैल को होने वाले मतदान पर खराब मौसम का खतरा मंडरा रहा है। मौसम विभाग ने भारी बारिश, बिजली कड़कने और तेज हवाओं का 'येलो अलर्ट' जारी किया है। राजनीतिक दलों को चिंता है कि प्रतिकूल मौसम के कारण मतदान प्रतिशत गिर सकता है। प्रशासन ने मतदाताओं को सतर्क रहने और चुनावी प्रक्रिया में बाधा कम करने के निर्देश दिए हैं।
तिरुवनंतपुरम। केरल में आगामी नौ अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव से कुछ ही दिन पहले प्रतिकूल मौसम के पूर्वानुमान ने मतदान की संभावनाओं पर असर डाला है। राजनीतिक दलों ने चिंता जताई है कि गरज के साथ और छिटपुट बारिश पूरे राज्य में मतदाता प्रतिशत प्रभावित कर सकता है। मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने एक विस्तृत चेतावनी जारी की है जिसमें बताया गया है कि पांच और छह अप्रैल को केरल में अलग-अलग स्थानों पर बिजली कड़कने और 40-50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाओं चलने की प्रबल अनुमान है। मौसम का यह अनिश्चित स्वरूप सात और आठ अप्रैल को भी जारी रहने की उम्मीद है, जिसमें 30-40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।
महत्वपूर्ण बात यह है कि मतदान के दिन नौ अप्रैल को भी मौसम विभाग ने एक या दो स्थानों पर बिजली कड़कने के साथ गरज के साथ बारिश का पूर्वानुमान जताया है। इससे संकेत मिलता है कि भले ही व्यापक रूप से भारी बारिश न हो लेकिन स्थानीय स्तर पर मौसम का व्यवधान कुछ क्षेत्रों में मतदाताओं की आवाजाही और मतदान प्रतिशत में बाधा डाल सकता है। मौसम विभाग ने भारी बारिश की चेतावनी भी जारी की है, जिसमें पांच और छह अप्रैल को अलग-अलग स्थानों पर 24 घंटों के भीतर सात सेंटीमीटर से 11 सेंटीमीटर तक बारिश होने की पूर्वानुमान है। इन दोनों दिनों के लिए पतनमतिट्टा, इडुक्की, पलक्कड़ और मलप्पुरम जिलों में 'येलो अलर्ट' घोषित किया गया है, जो भारी बारिश के अनुमान के कारण सामान्य जीवन और चुनाव पूर्व की व्यवस्थाएं प्रभावित हो सकती हैं।
मौजूदा अनुमान के मुताबिक हालोकि नौ अप्रैल तक बारिश की तीव्रता कम हो सकती है, फिर भी राजनीतिक दल सतर्क हैं। मतदान के दिन हल्की-फुल्की बारिश, गरज-चमक या बिजली गिरने की चेतावनी भी मतदाताओं के उत्साह में खलल डाल सकती हे, खासकर ग्रामीण, तटीय और पहाड़ी इलाकों में, जहां पहले से ही पहुंच एक चुनौती है। विभिन्न दलों के चुनावी रणनीतिकार मौसम के ताजा विवरणों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, क्योंकि केरल के इस कड़े मुकाबले वाले चुनाव में मतदान का प्रतिशत एक निर्णायक कारक माना जाता है। पिछले अनुभवों ने दिखाया है कि प्रतिकूल मौसम की स्थिति—भले ही वह स्थानीय स्तर पर हो-मतदाताओं की भागीदारी के रुझानों को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकती है।
इस बीच अधिकारियों ने जनता से गरज के साथ बारिश या तूफान आने के दौरान सावधानी बरतने का आग्रह किया है, विशेष रूप से बिजली गिरने और तेज हवाओं से बचने और आधिकारिक सूचनाओं के साथ अपडेट रहने को कहा है। चुनाव अधिकारियों से यह भी अपेक्षा की जाती है कि वे मौसम संबंधी किसी भी व्यवधान के बावजूद सुचारू मतदान सुनिश्चित करने के लिए तत्पर रहें।

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