उपभोक्ता कंपनियों के सॉफ्ट टारगेट हैं बच्चे

खाद्य और पेय कंपनियां हर साल बच्चों से जुड़े उत्पादों के विज्ञापनों पर 1200 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करती हैं।

उपभोक्ता कंपनियों के सॉफ्ट टारगेट हैं बच्चे
यूनाइटेड स्टेट्स की आधिकारिक वेबसाइट नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन पर दिए गए तथ्य इस पॉलिसी की पोल खोलते हैं।  टेलीविजन पर दिखाए जाने वाले कुल विज्ञापनों में से 18 फीसदी खाद्य पदार्थों से जुड़े होते हैं।

बच्चे मन के सच्चे होते हैं। उन्हें आसानी से बरगलाया जा सकता है, क्योंकि बच्चे बहुत भोले भी होते हैं। बच्चों से संबंधित इसी सच्चाई को खासकर खाद्य और पेय उत्पाद बनाने वाली कंपनियां बखूबी भुना रही हैं। बच्चों को सॉफ्ट टारगेट समझकर इन कंपनियों ने विज्ञापन का ऐसा जाल बुना है, जिसमें फंसकर अभिभावक न सिर्फ अपनी जेब हल्की कर रहे हैं बल्कि अनजाने में अपने बच्चों के जीवन के लिए भी खतरा मोल ले रहे हैं। मेडिकल जर्नल बीएमजे के एक व्यापक शोध से तो यही साबित होता है।

आजकल टेलीविजन से लेकर सोशल मीडिया पर ऐसे विज्ञापनों की भरमार है, जिनमें बच्चों की लंबाई, इम्यूनिटी, स्टेमिना और मेमोरी तक बढ़ाने के दावे के साथ उत्पाद पेश किए जा रहे हैं। लेकिन हकीकत क्या है? इसका भंडाफोड़ बीएमजे में प्रकाशित शोध कर रहा है। वैज्ञानिकों ने भारत समेत 15 देशों में 757 बच्चों से संबंधित उत्पादों का अध्ययन करने के बाद नतीजे तैयार किए हैं। अप्रैल, 2020 से जुलाई, 2022 तक किए गए इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े उत्पादों में से 700 से अधिक उत्पादों को लेकर किए गए दावे वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। 

यूनाइटेड स्टेट्स की आधिकारिक वेबसाइट नेशनल लाइब्रेरी आॅफ मेडिसिन पर दिए गए तथ्य इस पॉलिसी की पोल खोलते हैं।  टेलीविजन पर दिखाए जाने वाले कुल विज्ञापनों में से 18 फीसदी खाद्य पदार्थों से जुड़े होते हैं, जिनका प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष निशाना बच्चे होते हैं। एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि 3-13 साल के बच्चों के मोटापे का सीधा संबंध खाद्य पदार्थों के विज्ञापनों से पाया गया है। न्यूजीलैंड की यूनिवर्सिटी आॅफ ओटागो से सम्बद्ध वेलिंगटन स्कूल आॅफ पब्लिक हेल्थ की प्रमुख प्रोफेसर लुईस सिगनल की टीम का अध्ययन भी इस मकड़जाल की तरफ इशारा करता है। स्वास्थ्य शोध से संबंधित वैज्ञानिक पत्रिका द लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ में प्रकाशित शोध बताता है कि कंपनियों ने विज्ञापनों के जरिए 11-13 साल के बच्चों को हर 10 घंटे में 554 ब्रांड से अवगत कराया। मतलब, हर मिनट बच्चों ने कम से कम एक ब्रांड के बारे में जान लिया। बच्चों ने बड़ी संख्या में जंक फूड के विज्ञापन भी देखे।   बात अगर भारत की करें, तो कहने को यहां पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम-2019 लागू है। इसका मकसद अनुचित व्यापार प्रथाओं और भ्रामक विज्ञापनों पर अंकुश लगाना है, लेकिन टेलीविजन से लेकर सोशल मीडिया में हर घड़ी प्रसारित होने वाले अधिकतर विज्ञापनों में किए जा रहे हवा-हवाई दावे अधिनियम के प्रभाव को झुठलाते नजर आते हैं। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि भारत में डिजिटल विज्ञापन का कारोबार तेजी से बढ़ा है। पिछले साल विज्ञापन बाजार का आंकड़ा 1275  करोड़ का था, जिसके 2025 तक 2800 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान जताया जा रहा है। विज्ञापन बाजार के आंकड़े साबित करते हैं कि दुनिया भर की कंपनियों की निगाहें भारतीय बाजार पर लगी हैं। कंपनी अपने उत्पाद बेचने के लिए हर तरह की तिकड़मबाजी में जुटी हैं। ऐसे में विज्ञापन से जुड़ी मयार्दाएं टिक पाएंगी, इसकी उम्मीद नहीं की जा सकती। बहुत संभव है कि कंपनियों की विज्ञापन पॉलिसी का स्तर और अधिक गिर जाए। इसका सबसे नकारात्मक असर बच्चों पर ही पड़ेगा, जो पहले से ही कंपनियों के लिए सॉफ्ट टारगेट हैं। इसी साल फरवरी में मुंबई में हुई एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड काउंसिल आॅफ इंडिया की बैठक में मंत्रालय के जिम्मेदार अधिकारियों ने कंपनियों को विज्ञापनों के प्रति और अधिक जिम्मेदार बनने की नसीहत तो दी है लेकिन, अब देखना यह है कि इसका धरातल पर कोई असर दिखाई पड़ेगा या नहीं। 

संजीव रघुवंशी
- यह लेखक के स्वयं के विचार हैं।

Post Comment

Comment List

Latest News

दलबदल कानून के तहत टीएमसी के 20 बागी सांसदों को नोटिस, लोकसभा सचिवालय ने सात दिन में मांगा जवाब दलबदल कानून के तहत टीएमसी के 20 बागी सांसदों को नोटिस, लोकसभा सचिवालय ने सात दिन में मांगा जवाब
लोकसभा सचिवालय ने अभिषेक बनर्जी की याचिका पर दलबदल विरोधी कानून के तहत तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों को...
एसएमएस मेडिकल कॉलेज : चिकित्सक शिक्षकों की चुनाव ड्यूटी लगाने का RMCTA ने किया विरोध
त्योहारों पर यात्रियों को राहत, चार जोडी स्पेशल रेलसेवाओं की संचालन अवधि में विस्तार
होर्मुज समझौते के बाद भी नहीं खुलेगा जलडमरूमध्य, ईरान ने कहा- मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा प्रतिबंध
अखिलेश के महिला वादों पर भाजपा का पलटवार, राकेश त्रिपाठी बोले- हवा-हवाई हैं घोषणाएं
दिल्ली सराय-रींगस अनारक्षित स्पेशल रेलसेवा का संचालन, यात्रियों को होगी सुविधा
जरांगे-हाके के आंदोलन से पहले मुंबई में सख्ती: प्रदर्शन सिर्फ आजाद मैदान में, मार्च और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर रोक