राज्यसभा में उठी CA के हितों की रक्षा के लिए कानून बनाए जाने की मांग, विपक्ष के हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही स्थगित
शिक्षक भर्ती, जातीय भेदभाव और विश्वविद्यालय दर्जे पर भी चर्चा
नई दिल्ली में राज्यसभा में सीए हितों हेतु विशेष कानून की मांग उठी। शिक्षक भर्ती में आयु छूट, कार्यस्थल भेदभाव, विश्वविद्यालय दर्जा और श्रमिक आंदोलन मुद्दे रहे।
नई दिल्ली। चार्टर्ड अकाउंटेंटों (सीए) के हितों की रक्षा के लिए विशेष कानून बनाये जाने की मांग गुरुवार को राज्यसभा में उठायी गयी। कांग्रेस के विवेक तन्खा ने शून्यकाल के दौरान यह मामला उठाते हुए कहा कि सीए सरकार की विशेष रूप से वित्तीय योजनाओं के क्रियान्यवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं लेकिन हाल के दिनों में सीए के कामकाज को विभिन्न एजेन्सियों द्वारा प्रभावित किये जाने के मामले सामने आये हैं। इससे सीए और उनके उपभोक्ताओं की निजता का हनन हो रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार को अपने देश में काम करने वाले भारतीय सी ए और सी ए कंपनियों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। इसके लिए उन्होंने सी ए के हितों की रक्षा के लिए विशेष कानून बनाये जाने की मांग की। कांग्रेस की ही रंजीत रंजन ने दिल्ली सरकार के स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती में महिलाओं को आयु सीमा में मिलने वाली छूट को बहाल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार की ओर से गत दिसम्बर में महिलाओं को शिक्षक भर्ती में आयु सीमा में मिलने वाली छूट को बंद कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह छूट महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए दी गयी थी। केन्द्रीय विद्यालयों और हरियाणा में अभी भी महिलाओं को शिक्षक भर्ती में आयु सीमा में छूट दी जा रही है। उन्होंने कहा कि देश भर में शिक्षक भर्ती में महिलाओं की आयु सीमा एक समान की जानी चाहिए।
सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कार्यस्थलों पर जातीय भेदभाव का मुद्दा उठाते हुए कहा कि ओड़शिा में एक आंगनवाड़ी केन्द्र का इसलिए बहिष्कार किया जा रहा है क्योंकि इसमें एक दलित महिला काम करती है। एक विशेष समुदाय के लोगों ने इस केन्द्र का बहिष्कार करते हुए अपने बच्चों को वहां भेजना बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 14,15 और 17 का उल्लंघन है और सरकार को इसे गंभीरता से लेते हुए कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
बीजू जनता दल के देवाशीष सामंतराय ने ओडिशा के रेवनशॉ विश्वविद्यालय को केन्द्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिये जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि राज्य में अभी केवल एक ही केन्द्रीय विश्वविद्यालय है। उन्होंने कहा कि राज्य में बडी संख्या में आदिवासी आबादी है और इस विश्वविद्यालय से इस समुदाय के लोगों को विशेष फायदा होगा। भाजपा की दर्शना ङ्क्षसह ने उत्तर प्रदेश में चीतों के संरक्षण की संभावनाओं पर विचार करने की मांग की।
सीपी आई ( एम) के जॉन ब्रिटास ने देश में आज किसान और श्रमिक आंदोलन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह हडताील नयी श्रम संहिता से लेकर मनरेगा की बहाली को लेकर की जा रही है उन्होंने कहा कि केवल भारतीय मजदूर संघ को छोड़कर सभी ट्रेड यूनियन इसमें हिस्सा ले रही हैं। उन्होंने कहा कि इन आंदोलनों में अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते में भारत की संप्रभुता पर हमले को लेकर भी विरोध किया जा रहा है।

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