जागरूक हैं किसान, फिर भी जल रही पराली; रिपोर्ट ने बताई असली वजह

किसानों के व्यवहार पर आधारित संचार रणनीतियां अपनाना जरूरी

जागरूक हैं किसान, फिर भी जल रही पराली; रिपोर्ट ने बताई असली वजह
CEEW के अध्ययन में खुलासा हुआ कि पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं घटी हैं, लेकिन 31% किसान अब भी आंशिक रूप से पराली जला रहे हैं। कारण हैं—कीटों का डर, जानकारी की कमी और सामाजिक मान्यताएं। किसान पर्चों से ज्यादा साथी किसानों और कृषि अधिकारियों पर भरोसा करते हैं। अध्ययन ने स्थानीय, भरोसेमंद और समयबद्ध व्यवहार परिवर्तन आधारित संचार रणनीति की सिफारिश की है।

नई दिल्ली। पंजाब में फसल अवशेष प्रबंधन से जुड़े संचार को सभी के लिए एक जैसे समाधान से आगे बढ़ना होगा। जागरूकता को पराली जलाने का एक स्थायी व्यवहार बनाने के लिए, किसानों के व्यवहार पर आधारित संचार रणनीतियां अपनाना जरूरी है। यह जानकारी काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) के एक नए स्वतंत्र अध्ययन से सामने आई है। सीईईडब्ल्यू का अध्ययन ,'बिहेवियर चेंज एप्रोचेस टू टैकल स्टबल बर्निंग एट स्केल बताता है कि भले ही वर्ष 2022 से पराली जलाने की दर्ज घटनाओं में कमी आई है, लेकिन इसे जलाने के तरीके में बदलाव और सैटेलाइट से पता लगाने की सीमाओं के कारण अब इसके आंकड़ों का विश्लेषण करने में किसानों के व्यवहार, इसे जलाने के समय और उपलब्ध विकल्पों को अपनाने की दर को ध्यान में रखा जाना चाहिए। पंजाब के चार जिलों में 102 किसानों के बीच एक प्राथमिक और गैर-प्रतिनिधिक सर्वेक्षण, फोकस समूह चर्चाओं और सरकारी अधिकारियों से बातचीत के आधार पर सीईईडब्ल्यू ने पाया है कि सूचनाओं की कमी के अलावा, अविश्वास, सामाजिक मान्यताएं और वित्तीय स्थिति जैसी व्यावहारिक बाधाएं लगातार किसानों के फैसलों को प्रभावित कर रही हैं। इनमें से कई बाधाएं प्रभावी और स्थानीय परिस्थिति अनुकूल संचार से दूर की जा सकती हैं।

यह अध्ययन वर्तमान सूचना, शिक्षा और संचार गतिविधियों के प्रभावों और पहुंच का आकलन करता है। यह  सूचना देने और व्यवहार परिवर्तन में मौजूद अंतर को दूर करने के लिए लक्षित प्रयासों का सुझाव देता है। इसके निष्कर्षों को'4सी फ्रेमवर्क - कवरेज (पहुंच), क्लेरिटी (स्पष्टता), क्रेडिबिलिटी (विश्वसनीयता), और कन्वर्जन (परिवर्तन) के तौर पर वर्गीकृत किया गया है। सर्वेक्षण में शामिल 78 प्रतिशत किसान प्रशिक्षण कार्यक्रमों से अनजान थे, और 63 प्रतिशत को तब कोई जानकारी नहीं मिल पाई, जब उन्हें इसकी सर्वाधिक जरूरत थी। हालांकि, सर्वे में शामिल 63 प्रतिशत किसान पराली जलाने की आदत को पूरी तरह से छोड़ चुके हैं, लेकिन 31 प्रतिशत किसान अब भी आंशिक रूप से पराली जला रहे हैं। यह बताता है कि सिर्फ जागरूकता और मशीनों की उपलब्धता इस समस्या का पूरी तरह से समाधान करने के लिए काफी नहीं है।

सीईईडब्ल्यू की फेलो  प्रार्थना बोराह, फेलो, ने कहा, पंजाब ने पराली जलाने की दर्ज घटनाओं को घटाने में काफी प्रगति की है, लेकिन इस सुधार को बरकरार रखने के लिए व्यापक जागरूकता अभियानों से लक्षित व्यवहार परिवर्तन की दिशा में कदम बढ़ाना होगा। हमारा अध्ययन दिखाता है कि किसानों के इरादे में कोई कमी नहीं है; कई किसान पहले से पराली जलाने को गलत मानते हैं और इससे बचने के विकल्पों को अपनाने की कोशिश कर रहे हैं। किसानों तक सटीक समय पर और भरोसेमंद माध्यमों से ऐसे व्यावहारिक मार्गदर्शनों को पहुंचाने की चुनौती है, जो कीटों के हमले, मशीनों के उपयोग, लागत और कटाई के लिए सीमित समय जैसी उनकी वास्तविक चिंताओं का समाधान कर सकें।

किसान पर्चे-पम्फलेट से ज्यादा लोगों पर भरोसा करते हैं

Read More बिहार में उद्योग लगाने की प्रक्रिया हुई आसान, 30 दिन में स्वीकृति नहीं मिलने पर मिलेगा'डीम्ड क्लीयरेंस': सम्राट चौधरी

सीईईडब्ल्यू के अध्ययन के अनुसार, सर्वेक्षण में शामिल किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन की सर्वाधिक जानकारी अपने साथी किसानों या आपसी बातचीत से मिलती है। इसके बाद वे सोशल मीडिया, व्हाट््सएप या मोबाइल संदेशों से जानकारी लेते हैं। इसके विपरीत पारंपरिक माध्यमों जैसे पर्चे, पम्फलेट, सरकारी वेबसाइटों और मोबाइल ऐप्स की पहुंच काफी कम है। सीधा संवाद आज भी सबसे भरोसेमंद माध्यम है। सर्वे में शामिल 62 प्रतिशत किसानों ने एग्रीकल्चर एक्सटेंशन ऑफिसर्स पर भरोसा जताया, जिसके बाद वे अपने साथी किसानों पर भरोसा करते हैं। यह दिखाता है कि भले ही डिजिटल माध्यम कवरेज बढ़ा सकते हैं, लेकिन विश्वसनीयता बनाने के लिए आमने-सामने की बातचीत सबसे जरूरी है।

Read More गंगा एक्सप्रेस-वे पर भीषण हादसा: पलटी पिकअप के बाद कई वाहन भिड़े ; पिता-पुत्री की मौत, दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालुओं में मची चीख-पुकार

 

Read More फर्जी हस्ताक्षर मामले में अभिषेक बनर्जी सीआईडी के सामने पेश: भवानी भवन में कड़ी सुरक्षा, ईडी समन और अन्य जांचों के बीच बढ़ीं टीएमसी नेता की मुश्किलें

 

 

प्रशिक्षण को अधिक व्यावहारिक बनाना जरूरी

प्रशिक्षण सत्रों में हिस्सा लेने वाले किसानों बताया कि ये सत्र मुख्य रूप से व्याख्यान पर आधारित थे और इनमें खेतों पर जाकर व्यावहारिक प्रदर्शन की कमी थी। अध्ययन बताता है कि वर्ष 2024-25 में पंजाब में आईईसी के कुल बजट का सिर्फ 6.59 प्रतिशत हिस्सा खेतों में व्यावहारिक प्रदर्शन पर खर्च किया गया था, जबकि नई मशीनों के उपयोग पर किसानों को भरोसा दिलाने के लिए उन्हें व्यावहारिक अनुभव देना बहुत जरूरी होता है। इसके अलावा, मशीनों को अपनाने में इन्हें किराए पर लेने की अनौपचारिक व्यवस्था बड़ी भूमिका निभा रही है। मशीन किराए पर लेने वाले सर्वे में शामिल किसानों में से 56 प्रतिशत ने मशीनें अपने साथी किसानों से, जबकि 34 प्रतिशत ने कस्टम हायङ्क्षरग सेंटर्स से ली थी। यह दिखाता है कि आपसी सहयोग किसानों की मशीनों तक पहुंच होना पहले से ही व्यवहार परिवर्तन का प्रमुख माध्यम है।

संदेश देने के समय और बनावट में सुधार करने की जरूरत

सर्वेक्षण में शामिल लगभग 63 प्रतिशत किसानों ने कहा कि उन्हें जरूरत के समय जानकारी नहीं पाई। करीब 30 प्रतिशत किसानों ने माना कि फसल कटाई से ठीक पहले का समय जानकारी लेने का सबसे सही वक्त होता है, लेकिन इस दौरान बहुत कम जागरूकता अभियान चलते हैं। अध्ययन में सामने आया कि किसान सरल, कम शब्दों वाली सामग्री पसंद करते हैं, जिसमें एक या दो स्पष्ट संदेश हों। किसानों ने यह भी बताया कि वे मिट्टी की सेहत में सुधार और पैदावार बढऩे जैसे कृषि-वैज्ञानिक लाभों से अधिक प्रेरित होते हैं।

कीट लगने के डर से किसान आंशिक रूप से पराली जला रहे हैं

सीईईडब्ल्यू के अध्ययन ने'आंशिक रूप से पराली जलाने वाले किसानों को तत्काल व्यवहार परिवर्तन की जरूरत वाले समूह के रूप में चिन्हित किया है। ये ऐसे किसान हैं जो फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों का उपयोग तो करते हैं, लेकिन कीटों के हमले जैसी चिंताओं के कारण थोड़ी-बहुत पराली जला देते हैं। पराली को आंशिक या पूरी तरह से जलाने वाले सर्वे में शामिल किसानों में से 67 प्रतिशत किसानों ने कीटों के हमले के डर को इसकी मुख्य वजह बताया। हालांकि, इनमें से आधे से अधिक किसानों ने कभी खुद कीटों का ऐसा कोई हमला नहीं देखा था और वे साथी किसानों की सुनी-सुनाई, अक्सर बढ़ा-चढ़ाकर बताई गई बातों पर भरोसा कर रहे थे। अध्ययन का सुझाव है कि इस डर को दूर करने के लिए लक्षित तरीके से तकनीकी समाधान और खेतों में व्यवहारिक प्रदर्शन जैसे कदम मददगार हो सकते हैं।

सीईईडब्ल्यू  के पदाधिकारी कुरिंजी केमंथ ने कहा, यह अध्ययन दिखाता है कि सूचना केवल समय पर, बल्कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल, भरोसेमंद और उपयोग में आने योग्य होनी चाहिए। व्यवहार परिवर्तन संचार किसानों के विकल्पों की जानकारी और उन्हें पूरे भरोसे के साथ अपनाने के बीच मौजूद अंतर को दूर करने में मदद कर सकता है। सीआरएम योजना के तहत पंजाब के 'फ्लेक्सी-फंड का प्रावधान ऐसी लक्षित रणनीतियों के प्रायोगिक परीक्षण के लिए एक बेहतरीन अवसर देता है। सीईईडब्ल्यू ने कुछ सुझाव भी दिए हैं। इनके अनुसार पंजाब को अपनी मौजूदा आईईसी गतिविधियों को और मजबूत बनाना चाहिए और फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत एक समर्पित'व्यवहार परिवर्तन संचार रणनीति शुरू करनी चाहिए। पूरे राज्य में लागू करने से पहले कुछ चुनिंदा जिलों में एक एकीकृत और व्यवहारिक समझ पर आधारित पराली प्रबंधन अभियान का प्रायोगिक परीक्षण करना चाहिए।

इसके अलावा संसाधनों को किसानों के पसंदीदा माध्यमों की दिशा में लगाना चाहिए।  कृषि विस्तार अधिकारियों के सीधे दौरे  को सोशल मीडिया पर डालना चाहिए, किसानों की श्रेणियों के हिसाब से संदेशों को सरल बनाना होगा, जिसमें आंशिक रूप से पराली जलाने वाले किसानों को सर्वाधिक प्राथमिकता मिले। इसके अलावा किसानों की पहचान और सामाजिक मान्यताओं में बदलाव लाना विमर्श को'सरकारी नियमों के पालन से बदलकर'किसान के गौरव से जोड़ना चाहिए। केवल गतिविधियों की संख्या गिनने की जगह वास्तविक व्यवहार परिवर्तन पर ध्यान केंद्रित करना होगा, ताकि निरंतर सुधार के लिए एक फीडबैक सिस्टम बन सके। सीआरएम के परिचालन दिशा-निर्देशों के तहत, राज्य सरकारें उप-योजनाओं, घटकों या नए नवाचारों के लिए कुल बजट का 25 प्रतिशत तक हिस्सा 'फ्लेक्सी-फंड के रूप में आवंटित कर सकती हैं। इसके एक हिस्से को आईईसी गतिविधियों के तहत व्यवहार परिवर्तन संचार के पायलट अध्ययनों के लिए उपयोग किया जा सकता है।

Tags: burning

Related Posts

Post Comment

Comment List

Latest News

महाराणा प्रताप जयंती पर शुभकामनाएं: सीएम भजनलाल शर्मा ने दी बधाई, स्वाभिमान और देश सेवा का किया आह्वान महाराणा प्रताप जयंती पर शुभकामनाएं: सीएम भजनलाल शर्मा ने दी बधाई, स्वाभिमान और देश सेवा का किया आह्वान
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने महाराणा प्रताप जयंती पर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने वीर शिरोमणि को महान योद्धा...
कर्नाटक में सियासी संग्राम तेज: RSS पर सवाल उठाने पर भड़के विजयेंद्र, नेशनल हेराल्ड विवाद फिर गरमाया
मेक-इन-इंडिया उत्पादों को सरकारी खरीद में प्राथमिकता, वित्त विभाग ने जारी किए नए दिशा-निर्देश
युद्धविराम पर मुहर! ट्रंप बोले- जल्द सामने आएंगे समझौते के पूरे राज
राम मंदिर चंदा विवाद गरमाया: अयोध्या में कथित घोटालों पर कांग्रेस का केंद्र पर निशाना, SIT की निष्पक्षता पर भी सवाल
इंडिया स्टोनमार्ट-2028 : रीको, सिडोस और लघु उद्योग भारती के मध्य त्रि-पक्षीय एमओयू
केकड़ी एसडीओ सुरेश कुमार को सरवाड़ एसडीओ का अतिरिक्त प्रभार, प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव