मेक-इन-इंडिया उत्पादों को सरकारी खरीद में प्राथमिकता, वित्त विभाग ने जारी किए नए दिशा-निर्देश
MSE इकाइयों को विशेष लाभ
जयपुर। राजस्थान सरकार ने सरकारी खरीद में देश में निर्मित उत्पादों और सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। वित्त (वित्तीय नियम) विभाग के परिपत्र के अनुसार बजट वर्ष 2026-27 की घोषणा के तहत सार्वजनिक खरीद में ‘मेक-इन-इंडिया’ उत्पादों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती मिलेगी। नई व्यवस्था के तहत राजस्थान की सूक्ष्म एवं लघु इकाइयों (एमएसई) को खरीद प्रक्रिया में विशेष लाभ मिलेगा। यदि किसी निविदा में राज्य की एमएसई इकाई सबसे कम दर (एल-1) पर होती है तो उसे पूरी मात्रा का कार्यादेश दिया जाएगा।
वहीं, अन्य मामलों में भी स्थानीय एमएसई इकाइयों को निर्धारित प्रावधानों के तहत प्राथमिकता मिलेगी। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के स्वामित्व वाली इकाइयों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। परिपत्र के अनुसार स्थानीय आपूर्तिकर्ता माने जाने के लिए उत्पाद में कम से कम 50 प्रतिशत स्थानीय सामग्री होना अनिवार्य होगा। 10 करोड़ रुपये से अधिक की खरीद में स्थानीय सामग्री का प्रमाण चार्टर्ड अकाउंटेंट या वैधानिक लेखा परीक्षक से सत्यापित कराना होगा। गलत जानकारी देने वाली फर्मों पर दो वर्ष तक डिबार करने की कार्रवाई की जा सकेगी। सरकार ने सभी विभागों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं।

Comment List