राम मंदिर चंदा विवाद गरमाया: अयोध्या में कथित घोटालों पर कांग्रेस का केंद्र पर निशाना, SIT की निष्पक्षता पर भी सवाल

हाईकोर्ट के जज से जांच कराने की मांग

राम मंदिर चंदा विवाद गरमाया: अयोध्या में कथित घोटालों पर कांग्रेस का केंद्र पर निशाना, SIT की निष्पक्षता पर भी सवाल
कांग्रेस ने अयोध्या राम मंदिर निर्माण और चंदे में संगठित लूट का आरोप लगाया है। पार्टी नेताओं ने केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए एसआईटी (SIT) की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने गायब हुई 1200 राम शिलाओं सहित पूरे मामले की उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से समयबद्ध जांच की मांग की।

नई दिल्ली। कांग्रेस ने अयोध्या में राम मंदिर में चंदे में कथित घोटाले की उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में समयबद्ध जांच कराने की मांग करते हुए आरोप लगाया है कि अयोध्या में जमीन, निर्माण और चंदे से जुड़े सभी कथित घोटालों के लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार हैं। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और पार्टी नेता आराधना मिश्रा ने मंगलवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि अयोध्या में शुरू से ही भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामले सामने आते रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले जमीन के सौदों को लेकर विवाद हुए, फिर मंदिर निर्माण को लेकर सवाल उठे और अब चंदे में कथित घोटाले का मामला सामने आया है, जिससे लोगों की आस्था को गहरा आघात पहुंचा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने लोगों की आस्था के साथ छल किया है तथा धर्म के नाम पर सौदा किया जा रहा है। उनका कहना था कि श्रीराम जन्मभूमि को लेकर सामने आ रही जानकारियां दर्शाती हैं कि एक संगठित लूट हुई है, जिसमें बड़े-बड़े लोग शामिल हैं और इसकी ओर इशारा भाजपा के पूर्व सांसद भी कर रहे हैं। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का अध्यक्ष पूर्व नौकरशाह नृपेंद्र मिश्रा को बनाया गया। ट्रस्ट में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से जुड़े लोगों को प्रमुख जिम्मेदारियां दी गईं, जिनमें चंपत राय और अनिल मिश्रा भी शामिल हैं। ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोग पहले भी विवादों में रहे हैं और इस पूरे मामले की जवाबदेही केंद्र सरकार पर बनती है।

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन यह स्वीकार करने जैसा है कि मामले में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। कांग्रेस नेताओं का आरोप था कि पहले शिलापूजन के नाम पर बड़े पैमाने पर धन एकत्र किया गया, जिसका कोई लेखा-जोखा सार्वजनिक नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया कि 1400 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के दुरुपयोग के आरोप हैं और विश्व हिंदू परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष स्वर्गीय अशोक सिंघल के समय एकत्र की गई धनराशि का भी हिसाब सामने आना चाहिए।

उनका कहना था कि भाजपा और आरएसएस से जुड़े लोगों ने लोगों की आस्था और भगवान को चढ़ाये गए धन का दुरुपयोग किया है। उनका कहना था कि अयोध्या में संगठित तरीके से लूट हुई है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कांग्रेस नेताओं ने एसआईटी की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसकी निगरानी ऐसे अधिकारी को सौंपी गई है, जिनके खिलाफ महाकुंभ में हुई भगदड़ से जुड़े मामले में जांच चल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल खानापूर्ति कर रही है। उनका कहना था कि एसआईटी की रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर सार्वजनिक की जानी चाहिए और पूरे मामले की जांच उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश की देखरेख में करायी जानी चाहिये।

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उन्होंने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट में शंकराचार्यों तथा अन्य प्रमुख धार्मिक नेताओं को भी स्थान दिया जाना चाहिए। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि राम जन्मभूमि परिसर के आसपास भूमि आवंटन और निर्माण कार्यों को लेकर पहले भी कई विवाद सामने आ चुके हैं, लेकिन उनकी जांच का परिणाम सार्वजनिक नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि पहली बरसात में ही मंदिर परिसर में पानी टपकने और जमीन धंसने जैसी शिकायतें सामने आई थीं। उन्होंने दावा किया इधर 1200 राम शिलाओं के गायब होने की बात सामने आ रही है और इन सभी मामलों की समग्र जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भाजपा ने हमेशा प्रभु राम के नाम का राजनीतिक इस्तेमाल किया है और अयोध्या में सामने आए सभी कथित घोटालों की निष्पक्ष तथा समयबद्ध जांच कर सच्चाई देश के सामने लायी जानी चाहिये।

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