कर्नाटक में सियासी संग्राम तेज: RSS पर सवाल उठाने पर भड़के विजयेंद्र, नेशनल हेराल्ड विवाद फिर गरमाया

कांग्रेस से पारदर्शिता का सर्टिफिकेट नहीं चाहिए

कर्नाटक में सियासी संग्राम तेज: RSS पर सवाल उठाने पर भड़के विजयेंद्र, नेशनल हेराल्ड विवाद फिर गरमाया
भाजपा नेता विजयेंद्र येदियुरप्पा ने आरएसएस पर टिप्पणी करने वाले मंत्री प्रियांक खरगे को करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि नेशनल हेराल्ड विवाद में घिरी कांग्रेस से पारदर्शिता का सर्टिफिकेट नहीं चाहिए। विजयेंद्र ने बाढ़ राहत और समाज सेवा में आरएसएस के योगदान को अतुलनीय बताया।

बेंगलुरु। कर्नाटक प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता विजयेद्र येदियुरप्पा ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक (आरएसएस) की पारदर्शिता पर सवाल उठाने वाले प्रदेश के मंत्री प्रियांक खरगे के बयान पर तीखा पलटवार किया जिससे नेशनल हेराल्ड विवाद मंगलवार को एक फिर से सामने आ गया। विजयेंद्र ने आरएसएस पर विजयेंद्र की आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह "विडंबना" है कि कांग्रेस नेता पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि नेशनल हेराल्ड मामला राजनीतिक बहस का मुद्दा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता ऐसे व्यक्ति से आती है जिसकी पार्टी को अभी भी नेशनल हेराल्ड विवाद पर साफ जवाब देने हैं।

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि विजयेंद्र के बयान राजनीति से प्रेरित थे। उन्होंने कहा, "यह चुनिंदा नैतिक गुस्सा आला कमान को खुश करने और राजनीतिक पोजीशनिंग को सही ठहराने की एक हताश कोशिश के अलावा और कुछ नहीं है।" उन्होंने आरएसएस का बचाव करते हुए कहा कि संगठन की विश्वसनीयता दशकों की जनसेवा और ज़मीनी स्तर पर जुड़ाव से बनी है, न कि राजनीतिक मंज़ूरी से। उन्होंने जोर दिया कि आरएसएस को कांग्रेस पार्टी से वैधता के प्रमाण पत्र की ज़रूरत नहीं है और यह पहले से ही करोड़ों भारतीयों के दिलों में बसा हुआ है। उन्होंने शाखाओं, आपदा राहत प्रयासों, रक्तदान अभियान और आदिवासी कल्याण कार्यक्रम के ज़रिए संगठन की पहुँच पर ज़ोर दिया और कहा कि इसका काम एक सदी से भी ज़्यादा समय से लगातार चल रहा है। सौ से भी ज़्यादा सालों से आरएसएस के कार्यकर्ता देश भर में बाढ़ राहत कैंप, रक्तदान अभियान और समाज सेवा की पहल में शामिल होते रहे हैं।

विजयेंद्र ने आगे कहा कि संगठन सामुदायिक स्तर पर खुले तौर पर काम करता है। उन्होंने कहा, "कोई भी बिना किसी सूचना के अपने चुनाव क्षेत्र में आरएसएस शाखा में जा सकता है और ज़मीन पर हो रहे काम को देख सकता है।" उन्होंने आगे कहा कि आरएसएस की आलोचना करने से उसकी जनता में पहचान नहीं बदलेगी। आरएसएस पर हमला करने से राजनीतिक नेतृत्व कुछ समय के लिए खुश हो सकता है, लेकिन इससे शासन की नाकामियां नहीं छिपेंगी या कांग्रेस पार्टी के विवादों का लंबा रिकॉर्ड नहीं मिटेगा। इस विवाद से कर्नाटक में राजनीतिक बहस को और तेज़ कर दिया है, और नेशनल हेराल्ड विवाद एक बार फिर कांग्रेस और भाजपा के बीच चल रही विचारधारा की लड़ाई में एक अहम मुद्दा बनकर उभरा है।

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