काशी के हरिश्चंद्र घाट पर जलती चिताओं की राख से खेली होली, शोभा यात्रा में भगवान शिव के साथ शामिल हुए भूत प्रेत
काशी की महामसान होली: चिताओं की भस्म और गुलाल का अद्भुत संगम
वाराणसी के हरिश्चंद्र घाट पर विश्व प्रसिद्ध मसाने की होली खेली गई। बाबा कीनाराम स्थल से निकली शोभायात्रा में महादेव के भक्त, औघड़ और तांत्रिक भस्म व अबीर उड़ाते हुए शामिल हुए। जलती चिताओं के बीच देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने इस अलौकिक दृश्य का आनंद लिया, जो केवल शिव की नगरी काशी में ही संभव है।
वाराणसी। देश भर में होली का महापर्व चार फरवरी को मनाया जाएगा लेकिन धार्मिक नगरी काशी में शुक्रवार को हरिश्चंद्र घाट पर बाबा गण प्रतीकात्मक पर भूत प्रेत और सैकड़ों लोगों के द्वारा मनाया गया। बाबा कीनाराम से उससे पहले शोभा यात्रा निकाली गई। विभिन्न रूपों में लोग बाबा की भक्ति और होली के रंग में रंगे नजर आए। शोभा यात्रा श्मशान घाट हरिश्चंद पहुंचा। इस होली के देखने और खेलने देश विदेश के कोने कोने से लोग आए है।
शोभा यात्रा में शामिल लोग एक दूसरे पर जमकर अबीर गुलाल उड़ाते नजर आए। आयोजन कमेटी में शामिल पंकज ने बताया कि मसाने की होली विश्व विख्यात है। पहले ये होली तांत्रिकों, औघड़ों द्वारा खेला जाता था। अब इस होली में काशीवासियों के साथ देश भर के लोग होली खेलते हैं।
पश्चिम बंगाल से आए संजीव मैत्री ने बताया कि सोशल मीडिया पर हम लोगों ने इस उत्सव को देखा था। एक तरफ चिता जलती रही है, तो दूसरी ओर लोग होली खेलते हैं। ये अद्भुत दृश्य होता है। वहीं, हरियाणा से आए नवदीप सैनी ने बताया कि अनोखी होली होती हैं। महादेव और पार्वती स्वरूप धारण किए लोग मनमोहक दिखते हैं। ऐसी होली महादेव की नगरी काशी में ही संभव है। हमारे बच्चों की बहुत इच्छा थी कि काशी में इस होली में शामिल हुआ जाए।

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