क्या अंग्रेजी बन चुकी है अब भारत की स्थानीय भाषा? CBSE की तीन-भाषा नीति पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, अंग्रेजी को लेकर उठाया अहम सवाल
अंग्रेजी की भूमिका पर उठे सवाल
नई दिल्ली। सीबीएसई की तीन-भाषा नीति को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी ने शिक्षा व्यवस्था में नई बहस छेड दी। अदालत ने सवाल उठाया कि क्या वर्तमान परिस्थितियों में अंग्रेजी को भी भारत की एक स्थानीय भाषा माना जा सकता है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि देश में अंग्रेजी का व्यापक उपयोग हो रहा है और नागालैंड व मेघालय जैसे राज्यों में यह आधिकारिक भाषा है। न्यायालयों और उच्च शिक्षा में भी अंग्रेजी की प्रमुख भूमिका है, इसलिए इसे पूरी तरह विदेशी भाषा मानना उचित नहीं होगा।
नई शिक्षा नीति के तहत कक्षा 6 से तीन भाषाएं पढ़ाने की व्यवस्था लागू की जा रही है, जिसका उद्देश्य भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना और छात्रों को बहुभाषी बनाना है। हालांकि, कई अभिभावकों और छात्रों ने अतिरिक्त भाषा से पढ़ाई का बोझ बढ़ने की आशंका जताई है। सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी सामने आया कि 22 भारतीय भाषाओं का विकल्प होने के बावजूद एनसीईआरटी की वेबसाइट पर फिलहाल सीमित भाषाओं में ही पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध हैं। कोर्ट की टिप्पणी के बाद भाषा नीति और शिक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

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