श्रीनगर में अंतरराष्ट्रीय साइबर रैकेट का भंडाफोड़: सात आरोपी गिरफ्तार, छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में डिजिटल उपकरण जब्त
श्रीनगर में बड़ा एक्शन: अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी रैकेट का भंडाफोड़
श्रीनगर की CIK-CID शाखा ने रंगरेठ में छापेमारी कर एक हाई-टेक साइबर रैकेट का पर्दाफाश किया है। सात संदिग्धों को गिरफ्तार कर भारी मात्रा में आईफोन, मैकबुक और वीओआईपी (VoIP) सिस्टम जब्त किए गए। यह गिरोह फर्जी विज्ञापनों और कॉल सेंटरों के जरिए करोड़ों की ठगी कर पैसों को क्रिप्टोकरेंसी में बदल देता था।
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर से संचालित होने वाले एक अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी रैकेट का भंडाफोड़ अपराध जांच विभाग (सीआईडी) की काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर (सीआईके) शाखा ने किया है और इस मामले में सात संदिग्धों को गिरफ्तार किया तथा शहर में समन्वित छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में डिजिटल उपकरण भी जब्त किया है। पुलिस के अनुसार, सीआईके-सीआईडी को गुप्त कॉल सेंटरों के बारे में विश्वसनीय तकनीकी जानकारी प्राप्त हुई थी जो विदेशी नागरिकों एवं स्थानीय नागरियों को निशाना बनाकर धोखाधड़ी वाली ऑनलाइन गतिविधियों में शामिल थे।
त्वरित कार्रवाई करते हुए सीआईके ने निगरानी करने और डिजिटल खुफिया जानकारी जुटाने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों और फील्ड कर्मियों की विशेष टीमें गठित कीं। जांच के बाद श्रीनगर के रंगरेठ औद्योगिक क्षेत्र में एक प्रमुख परिचालन केंद्र की पहचान हुई। छापेमारी के दौरान सात संदिग्धों को मौके पर ही गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों ने 13 मोबाइल फोन, नौ लैपटॉप, वीओआईपी (वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल) सिस्टम, सिम कार्ड, नेटवर्किंग उपकरण और डिजिटल स्टोरेज मीडिया जब्त किया। जब्त किए गए सामानों में कई महंगे स्मार्टफोन, जिनमें आईफोन, सैमसंग गैलेक्सी हैंडसेट, आईपैड और डेल, एचपी और एप्पल मैकबुक ब्रांड के लैपटॉप शामिल थे।
पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच से पता चला है कि आरोपी एक सुसंगठित साइबर अपराध गिरोह का हिस्सा है, जिसके संपर्क जम्मू-कश्मीर से बाहर भी फैले हुए हैं। अधिकारियों ने कहा कि आरोपियों ने वीओआईपी सिस्टम का उपयोग करके एक गैर-पंजीकृत कॉल सेंटर स्थापित किया था जिसके माध्यम से वे अंतरराष्ट्रीय वर्चुअल नंबर बनाते थे और सर्वर रूटिंग और स्पूफिंग तकनीकों से अपनी असली लोकेशन छिपाते थे। पीड़ितों को फर्जी याहू मेल वेबसाइटों और गूगल विज्ञापनों द्वारा लुभाया जाता था। जैसे ही लोग इन विज्ञापनों पर क्लिक करते थे, उन्हें संदिग्धों द्वारा संचालित टोल-फ्री नंबरों पर भेज दिया जाता था।
खुद को वैध सेवा प्रदाताओं के रूप में प्रस्तुत करते हुए आरोपियों ने पीड़ितों को तकनीकी समस्याओं का समाधान करने या जुर्माने को रोकने के बहाने संवेदनशील बैंकिंग विवरण साझा करने या भुगतान करने के लिए प्रेरित किया। धोखाधड़ी से प्राप्त धन को बैंकिंग चैनलों, फर्जी खातों, डिजिटल वॉलेट के माध्यम से भेजा गया और बाद में पहचान से बचने के लिए इसे क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित किया गया।
अधिकारियों ने कहा कि इन लेन-देन में शामिल राशि कई करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जिसमें नकद शामिल नहीं है जो कि पूरी तरह से डिजिटल धोखाधड़ी का संकेत देता है। पुलिस ने कहा कि धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधानों सहित कानून की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की जा रही है।
पुलिस ने कहा, जब्त किए गए उपकरणों के फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है और आगे की छापेमारी सहित विस्तृत जांच जारी है ताकि व्यापक नेटवर्क का पता लगाया जा सके और अधिक संदिग्धों और पीड़ितों की पहचान की जा सके।

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