असर खबर का.... मिली सौगात: भामाशाह मंडी विस्तार का रास्ता हुआ साफ, 96 हैक्टेयर में विस्तार को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की मंजूरी

हाड़ौती की कृषि अर्थव्यवस्था को मिलेगा फायदा

असर खबर का.... मिली सौगात: भामाशाह मंडी विस्तार का रास्ता हुआ साफ, 96 हैक्टेयर में विस्तार को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की मंजूरी

एशिया की सबसे बड़ी भामाशाहमंडी का परिसर छोटा पड़ने से किसानों और व्यापारियों को परेशानियां आ रही थी।

कोटा। देश की सबसे बड़ी कृषि उपज मंडियों में शामिल भामाशाह कृषि उपज मंडी के विस्तार को मंजूरी मिल गई है। वर्षों से लंबित मंडी के विस्तार को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की 89वीं स्थायी समिति की बैठक में महत्वपूर्ण मंजूरी मिलने के बाद पूरे क्षेत्र में हर्ष की लहर है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के निरन्तर प्रयासों से मिली सफलता से हाड़ौती क्षेत्र के किसानों, व्यापारियों और कृषि अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। भामाशाह मंडी के विस्तार से भंडारण, विपणन और परिवहन सुविधाएं बेहतर होंगी। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और व्यापारियों को आधुनिक ढांचा उपलब्ध होगा।

जाम और लम्बे इंतजार से मिलेगी निजात

भामाशाह मंडी में हाड़ौती के साथ मध्यप्रदेश से जुड़े क्षेत्रों से भी किसान उपज बेचने के लिए आते है। सीजन के दौरान मंडी में प्रवेश के लिए वाहनों की लम्बी कतारें लगने से किसानों को इंतजार के साथ परेशानी झेलनी पड़ती है। इसके साथ ही आवक के मुकाबले मंडी में पर्याप्त शेड नहीं होने से बारिश के समय किसानों की उपज खराब होने का खतरा रहता है। विस्तार के साथ ही मंडी में कारोबार में कई गुना की वृद्धि होगी, राष्ट्रीय राजमार्ग 27 से भी मंडी सीधी जुड़ जाएगी, इससे जाम की समस्या से भी निजात मिलेगी और किसानों को उपज बेचने के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

अरसे से अटका था मामला

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मंडी से जुड़े वन भूमि के कारण विस्तार का मामला वर्षो से लम्बित था। विस्तार की स्वीकृति मिली तो फिर वन क्षेत्र से गुजर रहे राजमार्ग के किनारे एक किमी तक पौधारोपण से जुड़े नियमों के कारण विस्तार फिर से अटक गया। दिल्ली में स्पीकर बिरला और केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव के बीच हुई बैठकों के बाद नियम में शिथिलता के लिए सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी (सीईसी) में आवेदन किया गया था। इसके बाद समिति द्वारा वर्ष 2007 में कोटा बाइपास निर्माण के दौरान निर्धारित ग्रीन बेल्ट से जुड़ी शर्तों में संशोधन कर स्वीकृति दे दी गई है, जिससे लगभग 96 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए लैंड डायवर्जन का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

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नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला

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एशिया की सबसे बड़ी भामाशाहमंडी का परिसर छोटा पड़ने से किसानों और व्यापारियों को आ रही परेशानियों के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किए गए थे। इसमें बताया था कि सीजन में मंडी अनाज से ठसाठस भर जाती है। मंडी गेट से दो-तीन किलोमीटर लम्बी अनाज से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की कतार लग जाती है। काफी समय से मंडी के विस्तार की दरकार है। भामाशाहमंडी में खरीफ व रबी सीजन के पीक टाइम में रोजाना 2 लाख से 5 लाख बोरी कृषि जिंसों की आवक होती है। मंडी में राजस्थान ही नहीं देश के कई राज्यों से यहां अनाज आ रहा है। ऐसे में मंडी छोटी पड़ने के साथ ही मंडी प्रशासन की व्यवस्थाएं भी अब छोटी हो चुकी हैं। यार्ड फुल होने के बाद अब खुले में व सड़कों पर नीलामी करनी पड़ रही है।

भामाशाह मंडी का विस्तार हाड़ौती क्षेत्र के किसानों के भविष्य को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मंडी के विस्तार से किसानों को सुविधा के साथ व्यापार सुगम होगा साथ ही क्षेत्र की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी। आने वाले वर्षों में कोटा की भामाशाह मंडी देश की सबसे आधुनिक कृषि मंडियों में शामिल होगी और हाड़ौती के लाखों किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

- ओम बिरला, अध्यक्ष लोकसभा

भामाशाह मंडी को विस्तार मिलने के बाद अब इसकी सुविधाओं में भी इजाफा होगा। जिसके चलते अब इसके टर्नओवर में करीब दो से तीन गुना वृद्धि होगी। वहीं अब मंडी एयरकनेक्टिीविटी से जुड़ने के साथ ही एटलेन व फोरलेन से सीधे जुड़ेगी। वहीं मंडी परिसर में रेल्वे ट्रैक का निर्माण होगा। जिससे अब माल का लदान यही से होगा। 20 टन के कांटे लगाने की योजना हैं जिससे लेबर लेस तुलाई होगी।

-महेश खंडेलवाल, महामंत्री भामाशाह मंडी कोटा

मंडी का विस्तार होने से जो सीजन के समय पर कतारें लगती थी। वह अब खत्म होगी। किसान दो से तीन दिन तक इंतजार करते थे। अब वह इंतजार खत्म होगा। साथ ही किसानों के माल की तुरंत नीलामी होगी। जिससे अब किसानों को नीलामी के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। मंडी का विस्तार होने से विभिन्न सुविधाओं का विस्तार होगा।

-मनोज मीणा, सचिव, भामाशाह मंडी कोटा

भामाशाहमंडी में हाड़ौती के साथ मध्यप्रदेश से जुड़े क्षेत्रों से भी किसान उपज बेचने के लिए आते है। सीजन के दौरान मंडी में प्रवेश के लिए वाहनों की लम्बी कतारें लगने से किसानों को इंतजार के साथ परेशानी झेलनी पड़ती है। अब विस्तार के साथ ही मंडी में कारोबार में कई गुना की वृद्धि होगी।

-जगदीश कुमार, किसान नेता

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