झारखंड राज्यसभा चुनाव: दो सीटों पर बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी, गठबंधन की गणित पर टिकी नजर, भाजपा कर रही एक सीट पर दावा
हॉर्स ट्रेडिंग के आरोपों से गरमाई राजनीति
झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए 18 जून 2026 को मतदान होगा। जीत के लिए 28 वोटों की जरूरत है। 56 विधायकों के साथ सत्तारूढ़ महागठबंधन का पलड़ा भारी है, जबकि 24 विधायकों वाले एनडीए ने भी प्रत्याशी उतारने का एलान किया है। झामुमो ने भाजपा पर विधायकों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) की कोशिश का आरोप लगाया है।
रांची। झारखंड के राज्यसभा की दो सीटों को लेकर राजनीतिक तपिश बढ़ गई है। पार्टी मुख्यालयों में बैठकों का दौर चल रहा है। राज्य की दो सीटों में एक सीट शिबू सोरेन के निधन के बाद खाली हुई है, जबकि दूसरी सीट दीपक प्रकाश का कार्यकाल पूरा होने के बाद खाली हो जाएगा। वहीं चुनाव आयोग के जारी कार्यक्रम के अनुसार 1 जून को अधिसूचना जारी होगी, 8 जून तक नामांकन और 11 जून तक नाम वापसी की प्रक्रिया चलेगी। 18 जून को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान और उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना होगी।
राज्यसभा के दोनों सीटों का गणित सीधा नहीं बल्कि गठबंधन और समीकरणों पर निर्भर है। झारखंड विधानसभा में कुल 81 सदस्य हैं, जहां एक उम्मीदवार की जीत के लिए 28 वोट जरूरी हैं। मौजूदा स्थिति में सत्तारूढ़ महागठबंधन के पास 56 विधायकों का मजबूत आंकड़ा है। इसमें झामुमो, कांग्रेस, राजद और वाम दल शामिल हैं। ऐसे में अगर महागठबंधन एकजुट होकर चुनाव लड़ता है तो दोनों सीटों पर उसकी जीत लगभग तय मानी जा रही है। हालांकि चुनौती तब पैदा होगी, जब घटक दल अलग-अलग उम्मीदवार उतारते हैं। ऐसी स्थिति में वोट बंटने का खतरा बढ़ जाएगा। जीत का समीकरण बिगड़ सकता है।
झामुमो के पास कुल 34 सीट है। जबकि दो सीटों के लिए 56 वोट की जरूरत होगी। ऐसे में अगर झामुमो दो प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उत्तारता है तो एक सीट पर तो जीत पक्की है। लेकिन दूसरी सीट फंस जाएगी। क्योंकि उसके पास सिर्फ छह वोट ही बचेंगे। उसे और 22 वोटों की जरूरत पड़ेगी, जो जुटाना मुश्किल होगा। झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि दोनों सीटों पर गठबंधन का प्रत्याशी होगा। गठबंधन की बैठक में इसका फैसला होगा।
वहीं, कांग्रेस की बात करें तो उनके 16 विधायक हैं। एक सीट के लिए 28 विधायकों की जरूरत है। ऐसे में अगर कांग्रेस अलग से प्रत्याशी उतारती है तो अकेले दम पर जीतना मुश्किल होगा। क्योंकि उसे 12 और विधायकों की जरूरत होगी। ऐसे में गठबंधन में दरार आ सकती है। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के राजू ने कहा कि कांग्रेस-झामुमो एक-एक सीट पर प्रत्याशी देगा। सीएम से जल्दी बात करेंगे। वहीं एनडीए की बात करें तो उनके पास कुल 24 वोट हैं। वहीं अकेले भाजपा के पास 21 वोट हैं। ऐसे में एनडीए प्रत्याशी को जीत के लिए चार वोट कम पड़ेंगे। वैसे जेएलकेएम फिलहाल किसी पार्टी के साथ नहीं है। ऐसे में अगर भाजपा उसे भी साथ लेती है तो भी तय वोट से तीन वोट पीछे रह जाएगी। इससे चुनाव रोचक हो जाएगा।
सोमवार को भाजपा चुनाव समिति की बैठक भी हुई थी। बैठक बाद प्रदेश महामंत्री अमर बाउरी ने साफ कहा कि चुनाव में भाजपा अपना प्रत्याशी उतारेगी और जीत जरूर होगी। ऐसे में यहां दूसरे सीट पर चुनाव रोचक हो सकता है। राज्यसभा चुनाव में विधानसभा की दलगत स्थिति सत्तारूढ़ महागठबंधन के पक्ष में साफ बढ़त दिखाती है, जहां 81 सदस्यीय सदन में एक सीट के लिए 28 वोट जरूरी हैं और सत्ता पक्ष के पास कुल 56 विधायक हैं। झामुमो (34), कांग्रेस (16), राजद (4) और भाकपा माले (2) के इस संयुक्त आंकड़े के आधार पर दोनों सीटों पर जीत आसान मानी जा रही है, बशर्ते गठबंधन एकजुट रहे।
दूसरी ओर विपक्ष की स्थिति कमजोर है, जहां भाजपा के 21 और सहयोगियों को मिलाकर कुल 24 विधायक ही हैं, जो एक सीट के लिए भी पर्याप्त नहीं हैं। हालांकि जेएलकेएम के एक विधायक का रुख और संभावित क्रॉस वोटिंग मुकाबले को दिलचस्प बना सकती है। हालांकि झारखंड मुक्ति मोर्चा ने पत्र लिख कर सीधे भारत निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाते हुए मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। झामुमो के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने मुख्य चुनाव आयुक्त को एक बेहद संवेदनशील पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि भाजपा के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं होने के बावजूद वह उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है, जो सीधे तौर पर विधायकों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) और अनैतिक दबाव बनाने की कोशिशों की ओर इशारा करता है।
जिसके बाद भाजपा के प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार उतारना हर राजनीतिक दल का संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकार है। यदि भाजपा उम्मीदवार उतारने की घोषणा करती है तो झामुमो को इसमें “लोकतंत्र पर खतरा” क्यों दिखाई देने लगता है? क्या झामुमो यह मान चुका है कि उसके विधायक स्वेच्छा से भी उसके खिलाफ मतदान कर सकते हैं?उन्होंने कहा कि झामुमो का पूरा पत्र डर, भ्रम और राजनीतिक हताशा से भरा हुआ है।

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