राज्यसभा के मानसून सत्र की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, सभापति ने सदन में निरंतर जारी व्यवधान पर जताई चिंता

हंगामे के बीच खान एवं खनिज विधेयक पारित

राज्यसभा के मानसून सत्र की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, सभापति ने सदन में निरंतर जारी व्यवधान पर जताई चिंता
राज्यसभा का मानसून सत्र भारी हंगामे और शोर-शराबे के बीच खान एवं खनिज विकास संशोधन विधेयक 2026 पारित होने के बाद अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सत्र के दौरान लगातार बने व्यवधानों पर चिंता जताई। हंगामे के कारण सत्र में केवल 39.17 प्रतिशत ही काम हो सका।

नई दिल्ली। राज्यसभा के मानसून सत्र की कार्यवाही गुरुवार को विपक्ष के शोर-शराबे और हंगामे के बीच खान एवं खनिज विकास संशोधन विधेयक 2026 को पारित करने के साथ अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। इस विधेयक को हंगामे के बीच ही पूर्वाह्न शून्यकाल की जगह चर्चा और पारित करने के लिए रखा गया। चर्चा पर खान मंत्री जी किशन रेड्डी के उत्तर के बाद सदन में विपक्षी सदस्यों के सभी संशोधनों को ध्वनि मत से खारिज करते हुए विधेयक को पारित किया।

सभापति राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन ने अपने संबोधन में राज्यसभा के मानसून सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा करते हुए सत्र के दौरान हुए व्यवधानों को गहरी चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि इस सत्र के दौरान लगातार अव्यवस्था बनी रही जो "गहरी चिंता का विषय है।" सत्र के दौरान सदन में शोर-शराबे और हंगामे के बीच राष्ट्रीय महत्व के 12 विधेयक पारित किए गए या उन्हें पारित कर लोकसभा को लौटाया गया।

सभापति ने कहा, "हमने मानसून सत्र के समय का पूरा उपयोग नहीं किया।" उन्होंने कहा कि सदन की मर्यादाओं की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है क्योंकि अनुशासन और मर्यादाओं के अनुपालन से ही इस महान संस्था के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत होता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले सत्र में सदस्य इसका ध्यान रखेंगे और सदन की मर्यादा रखी जाएगी ताकि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को और बल मिल सके।

सभापति के विदाई संबोधन के बाद वंदे मातरम का गायन हुआ और कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। गत 20 जुलाई को शुरू हुए संसद के मानसून सत्र में दोनों सदनों में विपक्ष, सत्र के प्रारंभ में दिल्ली में युवाओं के आंदोलन पर पुलिस कार्यवाही को लेकर गृह मंत्री अमित शाह के स्पष्टीकरण की मांग को लेकर हंगामा करता रहा। हंगामे के चलते राज्यसभा में केवल 39.17 प्रतिशत काम हो सका।शून्यकाल और प्रश्नकाल की कार्यवाही बुरी तरह प्रभावित हुई। अधिकांश विधेयकों पर बहस और सरकार के जवाब के दौरान शोर-शराबा होता रहा।

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