बीजेपी की केरल में एंट्री से पिनराई विजयन की बढ़ी टेंशन, कांग्रेस की जीत से नहीं है चिंता

त्रिशूर लोकसभा सीट बीजेपी के लिए जीत ली

बीजेपी की केरल में एंट्री से पिनराई विजयन की बढ़ी टेंशन, कांग्रेस की जीत से नहीं है चिंता
लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने पहली बार केरल में खाता खोला है। एक्टर सुरेश गोपी ने दूसरे चांस में वाम पंथ के किले त्रिशूर लोकसभा सीट बीजेपी के लिए जीत ली।

तिरुवनंतपुरम। लोकसभा चुनाव परिणाम आने के बाद भारत की राजनीति में उथल-पुथल का दौर जारी है। चुनाव जीतने वालों का जोश हाई है और हारने वाली पार्टियां आत्ममंथन में जुटी हैं। केरल में सत्तारूढ़ एलडीएफ को लगातार दूसरी बार लोकसभा चुनाव में झटका लगा। कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ ने केरल में 18 सीटें जीत लीं और वाम मोर्चे के सीपीएम के खाते में सिर्फ एक सीट आई। इस करारी हार के बाद सीएम पिनराई विजयन ने दिलचस्प बयान दिया है। विपक्ष की ओर से इस्तीफे की मांग पर पिनराई विजयन ने कांग्रेस को खरी-खोटी सुनाते हुए पहले हिमाचल और कर्नाटक में सीएम बदलने की सलाह दे डाली। उन्होंने बीजेपी के एक सीट जीतने पर बड़ी चिंता जताई। पिनाराई विजयन ने कहा कि लेफ्ट फ्रंट कांग्रेस गठबंधन के 18 सीट जीतने से परेशान नहीं है, मगर बीजेपी ने केरल में एक सीट कैसे जीती, यह गंभीरता से सोचने की जरूरत है। लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने पहली बार केरल में खाता खोला है। एक्टर सुरेश गोपी ने दूसरे चांस में वाम पंथ के किले त्रिशूर लोकसभा सीट बीजेपी के लिए जीत ली।

उन्होंने सीपीआई के वी एस सुनील कुमार को 74686 वोटों के बड़े अंतर से हराया। बीजेपी की कार्यशैली पिनराई विजयन को परेशान कर रही है, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी की शुरूआत एक-दो सीटों से होती है, फिर वह अपने पैर पसार लेती है। 1998 में पश्चिम बंगाल में भी बीजेपी ने एक सीट से शुरूआत की थी। 2014 तक लोकसभा में बंगाल से बीजेपी का आंकड़ा एक ही रहा। 2019 के लोकसभा चुनाव में 18 और 2024 में 12 सीटें जीत ली थीं। 

केरल में लगातार बढ़ रहा है बीजेपी का वोट प्रतिशत
2019 में बीजेपी को 13.00 प्रतिशत और 2014 में 10.33 प्रतिशत वोट मिले थे। 2009 के आम चुनाव में बीजेपी का केरल में वोट प्रतिशत महज 6.31 था। यानी 15 साल में भाजपा के वोट में करीब 13 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को एक सीट नहीं मिली थी, मगर 11.30 प्रतिशत वोट मिले थे। यह लोकसभा चुनाव में मिले वोट से दो फीसदी कम था। 2026 में केरल में विधानसभा चुनाव होंगे। वाम दल लगातार 10 साल से सत्ता में है।

बीजेपी ने मुकाबले को बनाया त्रिकोणीय
पिनाराई विजयन की टेंशन का दूसरा कारण बीजेपी का बढ़ता जनाधार है। 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 16.68 फीसदी वोट मिले हैं। पार्टी केरल में 1 सीट पर विनर, एक पर रनर अप और 15 पर तीसरे स्थान पर रही। वाम दलों को करीब 32 और कांग्रेस को 35.06 फीसदी वोटरों का साथ मिला। कांग्रेस जिन 16 सीटों पर जीती है, उन सभी सीटों बीजेपी के कैंडिडेट ने एक लाख से तीन लाख वोट हासिल किए। अट्टिंगल लोकसभा सीट पर बीजेपी के वी मुरलीधरन को 3 लाख 11 हजार वोट मिले। इस सीट पर कांग्रेस को सिर्फ 684 सीटों पर जीत मिली। तिरुवनंतपुरम में बीजेपी के राजीव चंद्रशेखर 16077 वोटों से हारकर नंबर टू रहा। यहां बीजेपी ने वाम दल को तीसरे नंबर पर धकेल दिया। मुस्लिम बाहुल्य मल्लापुरम में भी बीजेपी के अब्दुल सलाम ने 85361 वोट हासिल किए। अगर केरल के पूरे नतीजे को देखें तो वायनाड के अलावा किसी भी सीट पर फासला दो लाख का नहीं रहा। कई जगह पर कांग्रेस कुछ हजार वोटों से ही जीती। अगर बीजेपी कमजोर होती तो नतीजे वाम दल के पक्ष में जाते और कांग्रेस का आंकड़ा कम होता।

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