पीएम मोदी ने की मछुआरा समुदाय की सराहना: बताया आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव, एक घंटे में 2.51 लाख पौधे लगाकर जनभागीदारी की ताकत से बना विश्व रिकॉर्ड, जल संरक्षण के संकल्प को दोहराया

मन की बात: आत्मनिर्भर मछुआरे और जल संचय का महाअभियान

पीएम मोदी ने की मछुआरा समुदाय की सराहना: बताया आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव, एक घंटे में 2.51 लाख पौधे लगाकर जनभागीदारी की ताकत से बना विश्व रिकॉर्ड, जल संरक्षण के संकल्प को दोहराया
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मछुआरों को 'समुद्र का योद्धा' बताते हुए उनके आर्थिक योगदान को सराहा। उन्होंने वाराणसी में 2.51 लाख पौधे रोपने के विश्व रिकॉर्ड और 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान की प्रशंसा की। पीएम ने जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने पर जोर दिया और छत्तीसगढ़ व त्रिपुरा के सफल मॉडलों का उदाहरण साझा किया।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के मछुआरा समुदाय की सराहना करते हुए कहा है कि मछुआरे केवल समुद्र के योद्धा ही नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव भी हैं। पीएम मोदी ने रविवार को आकाशवाणी से प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम 'मन की बात' की 132 वीं कड़ी में कहा कि मछुआरे सुबह होने से पहले समुद्र में उतरकर न सिर्फ अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा बंदरगाहों के विकास, बीमा योजनाओं और तकनीकी सहायता के जरिए मछुआरों का जीवन आसान बनाया जा रहा है।

पीएम मोदी ने कहा कि समुद्र में काम करने वाले मछुआरों के लिए मौसम की जानकारी बेहद अहम होती है, इसलिए तकनीक के माध्यम से उन्हें समय पर सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इन प्रयासों से देश का मत्स्य पालन क्षेत्र तेजी से समृद्ध हो रहा है और इसमें नवाचार भी बढ़ रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि आज मत्स्य पालन और समुद्री शैवाल (सीवीड) के क्षेत्र में नए-नए नवाचार हो रहे हैं, जिससे मछुआरे आत्मनिर्भर बन रहे हैं। उन्होंने ओडिशा के संबलपुर की सुजाता भूयान का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने हीराकुंड जलाशय में मछली पालन शुरू कर कुछ ही वर्षों में सफल व्यवसाय में बदल दिया। उनकी सफलता आज अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।

पीएम मोदी ने लक्षद्वीप के मिनीकॉय की हाव्वा गुलजार का भी जिक्र किया, जिन्होंने मत्स्य प्रसंस्करण इकाई (फिश प्रोसेसिंग यूनिट) के साथ कोल्ड स्टोरेज स्थापित कर अपने कारोबार को नई ऊंचाई दी। उन्होंने बताया कि इसके अलावा, बेलगावी के शिवलिंग सतप्पा हुद्दार ने पारंपरिक खेती छोड़कर फिश फार्मिंग अपनाई और अब बेहतर आय अर्जित कर रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि देशभर में ऐसे प्रयास प्रेरणादायक हैं और फिशरीज सेक्टर से जुड़े लोगों का योगदान भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बना रहा है। उन्होंने इस क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों की सराहना करते हुए कहा कि उनका परिश्रम और नवाचार देश को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में जनभागीदारी से एक घंटे में 2.51 लाख पौधे लगाकर विश्व रिकॉर्ड बनाने की सराहना करते हुये बदलाव के लिये समाज की भागीदारी को सबसे बड़ी ताकत बताया है। उन्होंने कहा कि जब लोग मिलकर काम करते हैं, तो छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े परिवर्तन की नींव बन जाते हैं। पीएम मोदी ने रविवार को आकाशवाणी से प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम 'मन की बात' की 132 वीं कड़ी में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुए एक विशेष अभियान का जिक्र किया, जहां मात्र एक घंटे में 2 लाख 51 हजार से अधिक पौधे लगाए गए। इस उपलब्धि के साथ एक नया गिनिज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया गया।

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उन्होंने कहा कि इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें हजारों लोगों ने एक साथ भाग लिया। उन्होंने कहा कि इस अभियान में भाग लेने वालों में छात्र, जवान , स्वयंसेवी संगठन और विभिन्न संस्थाओं ने अपना योगदान दिया। सभी ने मिलकर इस अभियान को सफल बनाया, जो जनभागीदारी की एक प्रेरक मिसाल है। पीएम मोदी ने 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत देशभर में करोड़ों पेड़ लगाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे अभियान न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद करते हैं, बल्कि समाज को एकजुट कर सकारात्मक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ाते हैं।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल संचय को आवश्यक बताते हुए कहा है कि देश के कई हिस्सों में गर्मियों की शुरुआत हो चुकी है और जल संकट से बचने के लिए देशवासियों को जल संरक्षण के अपने संकल्प को दोहराने की आवश्यकता है। पीएम मोदी ने रविवार को आकाशवाणी से प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम 'मन की बात' की 132वीं कड़ी में कहा कि पिछले 11 वर्षों में 'जल संचय अभियान' ने लोगों को काफी जागरूक बनाया है। इस अभियान के तहत देश भर में करीब 50 लाख कृत्रिम जल संचय ढांचे बनाए गए हैं।

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उन्होंने कहा, "मुझे यह देखकर अच्छा लगता है कि अब जल संकट से निपटने के लिए गाँव-गाँव में सामुदायिक स्तर पर प्रयास होने लगे हैं। कहीं पुराने तालाबों की सफाई हो रही है, तो कहीं वर्षा जल को सहेजने के प्रयास किए जा रहे हैं। 'अमृत सरोवर' अभियान के तहत भी देशभर में करीब 70 हजार सरोवर बनाए गए हैं। बारिश का मौसम आने से पहले इनकी साफ-सफाई भी शुरू हो गई है। मैं इस बारे में आपसे कुछ प्रेरक उदाहरण भी साझा करना चाहता हूँ। ये उदाहरण बताते हैं कि जनभागीदारी से जल संरक्षण का काम कितना व्यापक हो जाता है।"

उन्होंने त्रिपुरा का उदाहरण देते हुए कहा कि जंपुई पहाड़ियों में बसा वांगमुन गाँव, जो लगभग 3000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, कभी गंभीर जल संकट से जूझ रहा था। गर्मियों में लोगों को पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। बाद में ग्रामीणों ने वर्षा जल की हर बूंद को सहेजने का संकल्प लिया। आज इस गाँव के लगभग हर घर में वर्षा जल संचयन के उपाय किए गए हैं और यह गाँव जल संरक्षण की प्रेरक मिसाल बन गया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने एक अन्य उदाहरण देते हुए कहा, "इसी तरह छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में भी एक अनोखी पहल देखने को मिली है। यहाँ के किसानों ने अपने खेतों में छोटे-छोटे रिचार्ज तालाब और सोखता गड्ढे बनाए, जिससे वर्षा का पानी खेतों में ही रुकने लगा और धीरे-धीरे जमीन में समाने लगा। आज इस क्षेत्र के 1200 से अधिक किसान इस मॉडल को अपना चुके हैं और भूजल स्तर में सुधार हुआ है। इसी तरह तेलंगाना के मंचेरियाल जिले के मुधिगुंटा गाँव में भी लोगों ने मिलकर पानी की समस्या दूर की है। गाँव के 400 परिवारों ने अपने घरों में सोखता गड्ढे बनाए और जल संरक्षण को जन-आंदोलन बना दिया। इससे गाँव का भूजल स्तर बढ़ा है और प्रदूषित पानी से होने वाली बीमारियाँ भी काफी कम हो गई हैं।"

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