रजनीकांत ने दी सफाई, द्रमुक-अन्नाद्रमुक गठबंधन सरकार बनाने की कोशिश में नहीं थे शामिल
'टीवीके' को रोकने की राजनीति से किया इनकार
सुपरस्टार रजनीकांत ने स्पष्ट किया है कि वे अभिनेता विजय की पार्टी 'तमिलगा वेत्री कज़गम' (TVK) को सत्ता से दूर रखने के किसी राजनीतिक जोड़-तोड़ का हिस्सा नहीं हैं। उन्होंने चेन्नई में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि ऐसी राजनीति उनकी गरिमा के खिलाफ है। रजनीकांत ने 52 वर्ष की उम्र में विजय की इस बड़ी जीत को एमजीआर और एनटीआर से भी बड़ी सफलता बताया।
चेन्नई। तमिलनाडु में सबसे बड़े एकल दल के रूप में उभरी अभिनेता विजय की पार्टी 'तमिलगा वेत्री कज़गम' (टीवीके) को सत्ता से दूर रखने के लिए पारंपरिक प्रतिद्वंद्वियों द्रमुक और अन्नाद्रमुक की गठबंधन सरकार बनाने के प्रयास में अपनी भूमिका की लगातार अटकलों से परेशान सुपरस्टार रजनीकांत ने रविवार को स्पष्ट किया कि वह इतने ओछे नहीं हैं कि इस तरह के कदम में शामिल हों। चेन्नई के पोएस गार्डन स्थित अपने आवास पर जल्दबाजी में बुलाये गये संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने पत्रकारों से कहा, "इस तरह की भूमिका निभाना मेरी गरिमा के खिलाफ है। मैं कभी भी ऐसे स्तर पर नहीं गिरूंगा। चुनाव नतीजे आने के बाद से मेरे बारे में कई तरह की खबरें और आलोचनाएं आ रही हैं, इसलिए मुझे लगा कि अपनी स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है।"
उन्होंने यह भी ध्यान दिलाया, "अगर मैं अतीत में चुनावी मैदान में उतरा होता तो एकतरफा चुनाव जीत जाता।" सिनेमा जगत के दिग्गज अभिनेता ने स्पष्ट किया, "मैं स्टालिन सर से इसलिए मिला, क्योंकि हम पिछले 38 से 40 वर्षों से मित्र हैं। हमारी दोस्ती राजनीति या विचारधारा के बंधनों में बंधी नहीं है, बल्कि इन सीमाओं से परे है। लोकतंत्र में जीत और हार तो आम है। मैं एक दोस्त से मिलने गया था, क्योंकि कोलाथुर चुनाव क्षेत्र में स्टालिन की हार से मैं काफी परेशान था।"
विजय की जीत से ईर्ष्या होने की बात को पूरी तरह से खारिज करते हुए सुपरस्टार ने कहा, "यह एक बहुत बड़ी जीत है। महज़ 52 साल की छोटी उम्र में उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है और वह फिल्म उद्योग से ताल्लुक रखते हैं। यह सफलता एमजीआर (अन्नाद्रमुक के संस्थापक, अभिनेता से पूर्व मुख्यमंत्री बने) और एनटी रामाराव (तेलुगु देशम के संस्थापक, अभिनेता से आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बने) की उपलब्धियों से भी बड़ी है।"
उन्होंने कहा, "मैं विजय की इस जीत से हैरान भी हूं और खुश भी।" उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा, "मैं विजय से क्यों ईर्ष्या करने लगा? मैंने उन्हें बच्चे से बड़े होते देखा है। मेरे और विजय के बीच लगभग 28 साल या उससे अधिक का पीढ़ीगत अंतर है।"
इसके बाद उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, "अगर मुझे कभी ईर्ष्या होती भी, तो तब होती जब कमल हासन मुख्यमंत्री बन जाते! लेकिन, तब भी मैं ऐसा नहीं करता।" उन्होंने आलोचना करने वालों को जवाब देते हुए कहा "मुझ पर जो आरोप लगाये जा रहे हैं कि मैंने श्री विजय को बधाई नहीं दी, उसके विपरीत मैंने नतीजे आते ही 'एक्स' पर उन्हें अपनी शुभकामनाएं दे दी थीं। मैं अपनी स्थिति स्पष्ट करना चाहता था, लेकिन दो या तीन मौकों पर हवाई अड्डे पर मीडिया मौजूद नहीं थी, इसलिए मैंने यह संवाददाता सम्मेलन बुलाया है।"

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