राज्यसभा चुनाव: बीजेडी-कांग्रेस की सियासी जुगलबंदी से बढ़ी बीजेपी की टेंशन, ओडिशा में चौथी सीट के लिए दांव-पेंच तेज
ओडिशा राज्यसभा चुनाव: चौथी सीट पर छिड़ी सियासी जंग
ओडिशा में राज्यसभा की चौथी सीट के लिए बीजेडी और कांग्रेस ने हाथ मिलाते हुए डॉ. दत्तेश्वर होता को साझा उम्मीदवार बनाया है। 33 वोटों के मजबूत समीकरण के साथ विपक्ष एकजुट है, जबकि 82 विधायकों वाली भाजपा रणनीति बनाने में जुटी है। क्रॉस-वोटिंग की आशंकाओं के बीच यह मुकाबला अब प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है।
भुवनेश्वर। ओडिशा में आगामी राज्यसभा चुनावों ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। चार सीटों में से चौथी सीट अब सबसे अहम बनकर उभरी है। इस सीट का नतीजा राज्य की राजनीति में नए समीकरण गढ़ सकता है। आंकड़ों पर नजर डालें तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खाते में दो सीटें और बीजू जनता दल (बीजेडी) के खाते में एक सीट जाना लगभग तय माना जा रहा है। ऐसे में चौथी सीट पर मुकाबला दिलचस्प होता जा रहा है। बीजेडी ने चौथी सीट के लिए डॉ. दत्तेश्वर होता को साझा उम्मीदवार घोषित कर सियासी चाल चल दी है।
इस घोषणा के तुरंत बाद ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष भक्त चरण दास ने भी डॉ. होता को समर्थन देने का एलान कर दिया। इसके साथ ही बीजेडी और कांग्रेस के बीच संभावित समझ को लेकर चचार्एं तेज हो गई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कहा, हमने डॉ. दत्तेश्वर होता को नामित किया है। वह साझा उम्मीदवार हैं। मैं सभी दलों से अपील करता हूं कि वे उनका समर्थन करें और उन्हें राज्यसभा भेजें। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का हवाला देते हुए भक्त चरण दास ने कहा कि यह फैसला आपसी रिश्तों को बेहतर बनाए रखने की दिशा में उठाया गया कदम है।
भाजपा की रणनीति पर नजर
विपक्ष के समर्थन गणित के बाद अब निगाहें भाजपा की रणनीति पर टिक गई हैं। सवाल यह है कि क्या भाजपा भी साझा उम्मीदवार उतारेगी या फिर किसी बड़े चेहरे को मैदान में उतारकर सियासी दांव खेलेगी। राजनीतिक गलियारों में उद्योगपति दिलीप राय समेत कुछ राष्ट्रीय नेताओं के नामों की चर्चा है। ओडिशा भाजपा अध्यक्ष मनमोहन सामल ने कहा, यह उनकी रणनीति है। हमारे लिए संसदीय समिति का फैसला अंतिम होगा। सारी जानकारी समिति को भेज दी गई है।
आंकड़ों का खेल
विधानसभा के मौजूदा गणित के अनुसार राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए 30 वोट जरूरी हैं। बीजेडी के पास अपनी सुनिश्चित सीट के बाद 18 वोट बचते हैं, जबकि कांग्रेस और एक सीपीआई विधायक के 15 वोट हैं। इस तरह डॉ. होता के समर्थन में कुल 33 वोट बनते हैं, जो उन्हें मजबूत स्थिति में ले जाते हैं। भाजपा के पास 82 विधायक हैं, लेकिन चौथी सीट जीतने के लिए उसे अभी भी आठ अतिरिक्त वोटों की जरूरत है। निलंबित बीजेडी विधायक अरविंद महापात्र और सनातन महाकुड का समर्थन मिलने पर भी पार्टी को छह और वोट जुटाने होंगे।
हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर भाजपा चौथी सीट के लिए तीसरा उम्मीदवार उतारती है, तो क्रॉस वोटिंग और हॉर्स ट्रेडिंग के आरोपों से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में ओडिशा की चौथी राज्यसभा सीट अब प्रतिष्ठा और रणनीति की जंग बन चुकी है।

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