संसद में सग्राम: शिवराज सिंह चौहान का पलटवार, बोले-मोदी सरकार की पहलों से खेती में शुष्क क्षेत्रों का योगदान 29 से बढ़ कर 39 प्रतिशत हुआ

कृषि क्रांति: शुष्क क्षेत्रों के उत्पादन में 82% की ऐतिहासिक वृद्धि

संसद में सग्राम: शिवराज सिंह चौहान का पलटवार, बोले-मोदी सरकार की पहलों से खेती में शुष्क क्षेत्रों का योगदान 29 से बढ़ कर 39 प्रतिशत हुआ
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यसभा में बताया कि मोदी सरकार के प्रयासों से शुष्क और वर्षा-निर्भर क्षेत्रों का खाद्यान्न योगदान 29% से बढ़कर 39% हो गया है। जलवायु-अनुकूल 3,236 किस्मों के विकास और जल संरक्षण तकनीकों से किसानों की आय में प्रति एकड़ ₹6,000 की वृद्धि हुई है। पंजाब के पराली प्रबंधन और 'जीरो टिलेज' मॉडल की भी सराहना की गई।

नई दिल्ली। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को राज्य सभा में बताया कि मोदी सरकार के प्रयासों से देश में शुष्क और वर्षा‑निर्भर क्षेत्रों में खाद्यान्न उत्पादन में 82 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई और कुल राष्ट्रीय खाद्यान्न उत्पादन में शुष्क क्षेत्रों का योगदान 29 प्रतिशत से बढ़कर 39 प्रतिशत तक हो गया है। शिवराज सिंह ने प्रश्नकाल के दौरान विभिन्न सदस्यों के पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए बताया कि देश में लगभग 48 प्रतिशत कृषि शुष्क या वर्षा पर निर्भर है और मौजूदा सरकार ने इसकी उपज बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया है जिसके परिणामस्वरूप कृषि उत्पादन में इनका योगदान बढ़ा है। उन्होंने कहा कि हरित क्रांति के दौर में खाद्यान्न उत्पादन तो तेजी से बढ़ा, लेकिन शुष्क (ड्राईलैंड) क्षेत्र अपेक्षाकृत अछूते रह गए थे।

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि हैदराबाद स्थित केंद्रीय बरानी/शुष्क कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा चलायी जा रही समन्वित परियोजनाओं से किसानों की आय बढ़ी है। उन्होंने कहा कि संस्थान द्वारा विकसित तकनीकों के प्रभाव के तृतीय‑पक्ष मूल्यांकन में यह सामने आया कि मौसम आधारित सलाह से किसानों की आय में औसतन 6,000 रुपये प्रति एकड़ की वृद्धि हुई है। खेत‑तालाब, चेक‑डैम, स्टॉप‑डैम, बोरी‑बंधन जैसी जल संरक्षण तकनीकों के कारण प्रति खेत‑तालाब लगभग 73,895 रुपये तक अतिरिक्त आय दर्ज की गई। संस्थान के 18 मुख्य, 1 उप और 9 स्वायत्त केंद्र हैं। इसके अलावा 25 मुख्य और 5 स्वायत्त केंद्र भी देशभर में स्थापित हैं, जिनमें महाराष्ट्र और मराठवाड़ा के क्षेत्र भी शामिल हैं।

उन्होंने एक अन्य पूरक प्रश्न के उत्तर में बताया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में फसल अनुसंधान संस्थानों ने पिछले 10-11 वर्षों में 3,236 जलवायु‑अनुकूल किस्मों का विकास किया है, जो कम पानी, अधिक तापमान और अधिक सर्दी जैसी विपरीत परिस्थितियों में भी अच्छा उत्पादन देने में सक्षम हैं। पंजाब से जुड़े एक सवाल पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हरित क्रांति के दौर से ही पंजाब के किसानों ने अपने परिश्रम से देश के अन्न भंडार भरे, भुखमरी मिटाने का काम किया और पूरे देश के लिए मिसाल कायम की।

कृषि मंत्री ने साथ ही यह चिंता भी साझा की कि अत्यधिक उत्पादन के दबाव, अधिक पानी वाली किस्मों और रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग के कारण पंजाब सहित कई क्षेत्रों में मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हुई है और नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटेशियम तथा सेकेंडरी और माइक्रो न्यूट्रिएंट्स के स्तर में गिरावट देखी जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण के लिए केवल किसानों को दोषी बताना ठीक नहीं है। पंजाब के किसान स्वयं पराली प्रबंधन व नई पद्धतियाँ अपनाने में आगे हैं। कृषिमंत्री ने गत 27 नवम्बर को मोगा जिले के अपने दौरे का उल्लेख किया जहाँ रन सिंह वाला गाँव और आस‑पास के गाँवों में किसान खेती की बिना जुताई किये ही सीधे बीज लगा रहे थे और ज़ीरो टिलेज जैसी तकनीकों से बिना पराली जलाए खेती का सफल प्रयोग होते देखे गये।

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