यौन शोषण मामला: तमिलनाडु पॉक्सो कोर्ट ने पुजारी को सुनाई 178 वर्ष की सजा, लड़कियों को मिठाई खिलाकर देता था वारदात को अंजाम
70 वर्षीय पुजारी को 178 साल की जेल
तमिलनाडु की पॉक्सो कोर्ट ने तीन मासूम बच्चियों के यौन शोषण मामले में 70 वर्षीय मंदिर पुजारी को 178 वर्ष की कठोर कारावास सुनाई है। जज गोकुल मुरुगन ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सभी सजाएं अलग-अलग भुगतने का आदेश दिया। कोर्ट ने पीड़ितों को ₹5 लाख मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है।
चेन्नई। तमिलनाडु की पॉक्सो कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में 70 वर्षीय मंदिर पुजारी को तीन बच्चों को बहकाकर यौन शोषण करने के मामले में कुल 178 वर्ष की जेल की सजा सुनाई है। यह घटना तमिलनाडु के शिवगंगा जिले में हुई थी। घटना 26 सितंबर 2024 को सोझापुरम गांव में हुई, जब 70 वर्षीय पुजारी ए. थिलागर ने मंदिर के बाहर खेल रही तीन लड़कियों को मिठाई देकर लुभाया और उनका यौन शोषण किया। जब एक लड़की ने अपने माता-पिता को इस भयावह घटना के बारे में बताया, तब स्थानीय लोगों ने मंदिर के बाहर प्रदर्शन किया और पुजारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। शिकायत पर शिवगंगा अखिल महिला पुलिस स्टेशन ने बच्चों से यौन अपराधों से सुरक्षा अधिनियम (पॉक्सो) के तहत मामला दर्ज कर पुजारी को गिरफ्तार कर लिया।
कल शाम दिए गए ऐतिहासिक फैसले में पॉक्सो कोर्ट के जज गोकुल मुरुगन ने पुजारी को तीन बच्चों को चोट पहुंचाने, उन्हें धमकाने, यौन शोषण करने और मंदिर पुजारी होने के बावजूद पेडोफीलिया (बच्चों के प्रति यौन आकर्षण) के कार्य करने जैसे कई आरोपों पर दोषी ठहराया। न्यायाधीश ने हर अपराध के लिए अलग-अलग सजा सुनाई, जिनका कुल योग 178 वर्ष की जेल होता है। अदालत ने आदेश दिया कि पुजारी को सभी सजाएं अलग-अलग भुगतनी होंगी। न्यायाधीश ने पुजारी पर 8,000 का जुर्माना भी लगाया और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि प्रत्येक पीड़ित बच्ची को पांच लाख रुपये का मुआवजा प्रदान किया जाए।

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