मेटा पर लगा 3000 करोड़ रुपए का जुर्माना बच्चों को सेक्सुअल कंटेंट दिखाने का आरोप, मेटा की दलील क्या है?
मेटा पर ₹3,000 करोड़ का भारी जुर्माना: बच्चों की सुरक्षा में लापरवाही
अमेरिका के न्यू मैक्सिको में जूरी ने मेटा पर $375 मिलियन का जुर्माना लगाया है। व्हिसलब्लोअर ओतुर्रो बेहर के खुलासे के बाद कंपनी पर फेसबुक और इंस्टाग्राम पर नाबालिगों को असुरक्षित कंटेंट परोसने और गुमराह करने का दोष सिद्ध हुआ। हालांकि, मेटा ने इन आरोपों को चुनौती देने की बात कही है।
न्यूयार्क। अमेरिकी टेक कंपनी मेटा पर अमेरिका के न्यू मैक्सिको में एक जूरी ने 375 मिलियन डॉलर यानी करीब 3,000 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। वजह है बच्चों की सुरक्षा में बड़ी लापरवाही और प्लेटफॉर्म पर हुए नुकसान। मामला दरअसल 2023 में शुरू हुआ था, जब न्यू मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल ने मेटा के खिलाफ केस दायर किया। आरोप था कि कंपनी ने अपने प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप को सिक्योर बताकर यूजर्स को गुमराह किया, जबकि हकीकत में वहां बच्चों को गंभीर खतरे का सामना करना पड़ा।
गलत कंटेंट दिखाए जाने का आरोप
कोर्ट में पेश सबूतों में यह बात सामने आई कि कई मामलों में नाबालिग यूजर्स को गलत कंटेंट दिखा और उन्हें प्रीडेटर्स तक पहुंच मिल गई। जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी को इन खतरों की जानकारी थी, लेकिन समय रहते कदम नहीं उठाए गए। जूरी ने माना कि मेटा ने कंज्यूमर प्रोटेक्शन कानून का उल्लंघन किया और प्लेटफॉर्म की सुरक्षा को लेकर गलत जानकारी दी। इस केस को खास इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि यह पहली बार है जब किसी जूरी ने सीधे तौर पर मेटा को उसके प्लेटफॉर्म पर होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया है।
मेटा के ही पूर्व कर्मचारी का आरोप
रिपोर्ट्स के मुताबिक मेटा पर मुकदमा करने वाले शख्स का नाम ओतुर्रो बेहर है। वो पहले मेटा में इंजीनियरिंग लीडर के तौर पर काम कर रहे थे। 2021 में उन्होंने कंपनी छोड़ी और व्हिसिलब्लोअर बन गए। यानी स्कैम्स और गलतियों को उजागर करना शुरू कर दिया। उन्होंने इंस्टाग्राम पर कई सारे एक्स्पेरिमेंट्स करके टेस्टिफाई किया है कि इंस्टाग्राम पर नाबालिगों को भी कंपनी सेक्सुअल कंटेंट दिखा रही है।
फैसले के बाद मेटा ने कहा है कि वह इस फैसले से सहमत नहीं है और कंपनी इसे चैलेंज करेगी। कंपनी का कहना है कि वह अपने प्लेटफॉर्म को सिक्योर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है और गलत कंटेंट हटाने के लिए बड़े लेवल पर सिस्टम लगा चुकी है। हालांकि एक्सपर्ट्स कहते हैं कि कंपनी जानबूझ कर ऐसा करती है ताकि यूजर्स प्लेटफॉर्म पर बने रहें। सोशल मीडिया को लेकर पहले से ही यह बहस चल रही थी कि क्या ये प्लेटफॉर्म बच्चों के लिए सुरक्षित हैं। अब कोर्ट के इस फैसले ने इस बहस को और तेज कर दिया है।

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