सुरजेवाला का केंद्र पर निशाना: भाजपा ने राज्यसभा सीट न देकर किया देवेगौड़ा का अपमान, बोले- कुमारस्वामी द्वारा इस व्यवहार को स्वीकार करना आश्चर्यजनक
एम. नागराजा को दी प्राथमिकता
बेंगलुरु। कांग्रेस महासचिव एवं कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा का अपमान करने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा ने राज्यसभा के लिए उन्हें नामित करने के बजाय पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष एम. नागराजा को प्राथमिकता दी है। साथ ही उन्होंने जनता दल (सेक्युलर) नेतृत्व पर भी भाजपा के साथ गठबंधन जारी रखने को लेकर निशाना साधा।
सुरजेवाला ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक तीखी टिप्पणी में कहा कि भाजपा का यह कथित फैसला देवेगौड़ा जैसे वरिष्ठ नेता का अपमान है और यह दर्शाता है कि भाजपा अपने सहयोगी जद(एस) को लगातार नजरअंदाज और अपमानित करती रही है। उन्होंने लिखा, "कल देर रात भाजपा ने पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा को राज्यसभा के लिए नामांकन देने से इनकार कर दिया और उनकी जगह पार्टी के राज्य उपाध्यक्ष तथा जिला भवन निर्माण प्रभारी एम. नागराजा को चुनने का फैसला किया। भाजपा ने एक पूर्व प्रधानमंत्री के बजाय एम. नागराजा को प्राथमिकता दी।"
सुरजेवाला ने कहा कि जद(एस) नेता और केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी द्वारा इस तरह के व्यवहार को लगातार स्वीकार करना आश्चर्यजनक है और यह केवल सत्ता से चिपके रहने की राजनीति को दर्शाता है। उन्होंने कहा, "भाजपा द्वारा जद(एस) और उसके नेतृत्व का लगातार अपमान किया जा रहा है और कुमारस्वामी केवल मंत्री पद बचाए रखने के लिए इसे स्वीकार करते जा रहे हैं। यह बेहद चौंकाने वाला और आंखें खोल देने वाला मसला है। इस अपमान को स्वीकार करना आत्मसम्मान की पराकाष्ठा तक पहुंची हुई स्थिति को दर्शाता है।"
सुरजेवाला ने इस मुद्दे को व्यापक राजनीतिक संदर्भ में रखते हुए कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव में देवेगौड़ा को भाजपा उम्मीदवार जी.एस. बसवराजु ने हराया था। उन्होंने यह भी कहा कि देवेगौड़ा ने कभी सार्वजनिक रूप से कहा था कि यदि कुमारस्वामी भाजपा के साथ हाथ मिलाते हैं तो वह उन्हें "अपना पुत्र मानने से इनकार कर देंगे।" सुरजेवाला के अनुसार अक्टूबर 2023 में जद(एस) के भाजपा के साथ गठबंधन करने के बाद ये सभी राजनीतिक सिद्धांत छोड़ दिये गये।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि हालिया घटनाक्रम भाजपा-जद(एस) गठबंधन की असमान प्रकृति को उजागर करता है और यह दिखाता है कि जद(एस) सत्ता के लिए अपने राजनीतिक सिद्धांतों की बलि देने को तैयार है। उन्होंने कहा, "इससे साफ है कि कर्नाटक में अब जद(एस) का एकमात्र सिद्धांत किसी भी कीमत पर सत्ता हासिल करना और सत्ता में बने रहना है।" सुरजेवाला के आरोपों पर भाजपा और जद(एस) की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आयी है।

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