भारत को वैश्विक विनिर्माण शक्ति बनाने का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब युवाओं को आधुनिक उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाएगा: अरुण झा

ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनेगा भारत

भारत को वैश्विक विनिर्माण शक्ति बनाने का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब युवाओं को आधुनिक उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाएगा: अरुण झा
NIAMT रांची के कुलाधिपति अरुण कुमार झा के अनुसार, युवाओं को रोबोटिक्स और एआई जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण देकर देश को विनिर्माण शक्ति बनाया जा रहा है। संस्थान ने नए शैक्षणिक सत्र के लिए बीटेक, एमटेक और एडवांस्ड डिप्लोमा (अंतिम तिथि 31 मई) में प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी है, जहां टाटा और मारुति जैसी कंपनियां प्लेसमेंट देती हैं।

नई दिल्ली। झारखंड की राजधानी रांची स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी (एनआईएएमटी) के कुलाधिपति अरुण कुमार झा ने कहा है कि भारत को वैश्विक विनिर्माण शक्ति बनाने का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब युवाओं को आधुनिक उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाएगा। झा ने शुक्रवार को यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए एनआईएएमटी तकनीकी रूप से सक्षम और उद्योगों के लिए तैयार मानव संसाधन तैयार कर रहा है। संस्थान में विद्यार्थियों को रोबोटिक्स, ऑटोमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सकें।

कुलाधिपति ने बताया कि संस्थान ने नये शैक्षणिक सत्र के लिए बीटेक और एमटेक कोर्स में एडमिशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बीटेक में दाखिला जेईई मेन के जरिए होगा, जबकि एमटेक में प्रवेश सेंट्रलाइज़्ड काउंसलिंग फॉर एम.टेक. (सीसीएमटी) और संस्थान स्तर पर होगा। झा ने बताया कि इसके अतिरिक्त, अत्यधिक मांग वाले 18 महीने के 'एडवांस्ड डिप्लोमा कोर्स' फाउंड्री एवं फोर्जिंग टेक्नोलॉजी के लिए आवेदन प्रक्रिया जारी है। आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई निर्धारित की गई है। बीएससी, इंजीनियरिंग डिप्लोमा या बीटेक उत्तीर्ण अभ्यर्थी संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। चयनित विद्यार्थियों को 3000 रुपये प्रतिमाह छात्रवृति भी दी जाएगी।

कुलाधिपति ने संस्थान और उसके प्रदर्शन के विषय में जानकारी देते हुए बताया कि 60 एकड़ में फैले हुए पूर्णतः आवासीय परिसर वाले इस संस्थान में अत्याधुनिक प्रयोगशालाएँ और आधुनिक मशीनरी उपलब्ध हैं। यहाँ विद्यार्थी फाउंड्री, फोर्जिंग, ऑटोमोबाइल, भारी उद्योग तथा रक्षा उत्पादन जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता प्राप्त कर रहे हैं। यही कारण है कि टाटा मोटर्स, अशोक लेलैंड, जेएसडब्ल्यू, वेदांता और मारुति सुजुकी जैसी बड़ी कंपनियाँ हर वर्ष संस्थान के विद्यार्थियों को रोजगार के अवसर प्रदान करती हैं।

गौरतलब है कि 1966 में स्थापित यह संस्थान पहले एनआईएफएफटी के नाम से जाना जाता था। वर्तमान में यह भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन डीम्ड टू बी युनिवर्सिटी के रूप में कार्य कर रहा है। पिछले लगभग छह दशकों से यह संस्थान झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल सहित पूर्वी भारत के हजारों युवाओं को तकनीकी शिक्षा और रोजगार के नए अवसर प्रदान कर रहा है।

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