टीएमसी के पूर्व विधायक निर्मल घोष पर गिरफ्तारी की तलवार, बचाव के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया
पश्चिम बंगाल में सियासी हलचल
कोलकाता। पश्विम बंगाल में पानीहाटी से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पूर्व विधायक निर्मल घोष ने गिरफ्तारी से बचने के लिए सोमवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। यह कदम उनके बेटे तीर्थंकर घोष की रविवार देर रात दक्षिणेश्वर इलाके से पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के कुछ घंटों बाद उठाया गया। याचिका दायर करने की अनुमति मांगने वाला अर्जी न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की खंडपीठ के समक्ष रखी गयी। अदालत ने इसकी इजाज़त दे दी है। इस मामले की सुनवाई इस सप्ताह के आखिर में होने की संभावना है। तीर्थंकर घोष को कई आपराधिक मामलों के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था।
पुलिस के मुताबिक तीर्थकर 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद हुई कथित चुनाव-बाद हिंसा से जुड़े एक मामले में आरोपी हैं। जांचकर्ताओं ने उसका नाम एक करोड़ रुपये के कथित लॉटरी घोटाले से भी जोड़ा है। पुलिस का आरोप है कि तीर्थंकर और उसके साथियों ने जबरन एक लॉटरी विजेता से उसका जीता हुआ टिकट छीन लिया, पीड़ति के साथ मारपीट की और इनाम की रकम हड़प ली। बताया जाता है कि वह काफी समय से फरार था, लेकिन पुलिस ने उसके मोबाइल फोन की लोकेशन का पता लगाया और एक गुप्त सूचना के आधार पर उसे गिरफ्तार कर लिया। हाल के हफ्तों में निर्मल घोष की कानूनी और राजनीतिक मुश्किलें भी बढ़ गई हैं।
पूर्व विधायक के खिलाफ जबरन वसूली, अवैध हथियार रखने और भ्रष्टाचार के आरोप में कई लिखित शिकायतें दर्ज की गई हैं। पुलिस ने इसी सिंडिकेट में कथित संलिप्तता के लिए पानीहाटी के होटल मालिक सुशांत सरकार को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है। सूत्रों ने बताया कि संभावित कानूनी कार्रवाई की आशंका के चलते घोष पुलिस से बचते भी रहे थे। उनका नाम आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल मामले से जुड़े आरोपों में भी सामने आया है। सूत्रों ने बताया कि आरोप है कि पानीहाटी के तत्कालीन विधायक घोष ने पानीहाटी श्मशान घाट पर मृत डॉक्टर के अंतिम संस्कार को जल्दबाजी में संपन्न कराने में अहम भूमिका निभाई थी। फिलहाल इस मामले की जांच एक केंद्रीय एजेंसी कर रही है।
बढ़ते विवादों के बीच, उन्होंने हाल ही में रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले खेमे में शामिल होने की कोशिश की थी। हालांकि, रिताब्रता ने सार्वजनिक रूप से कहा कि घोष बिना बुलाए एक बैठक में शामिल हुए थे और यह भी साफ़ किया कि उनके साथ कोई बैठक नहीं हुई थी और न ही उन्हें समूह में शामिल करने पर कोई चर्चा हुई थी।

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