आज से एआई वीडियो पर सख्ती AI-Generated का लेबल अनिवार्य: नए आईटी एक्ट में एआई वीडियो, फर्जी और डीपफेक कंटेंट पर लगेगी लगाम, सरकार ने 10 फरवरी को जारी किए थे नए नियम

डीपफेक पर लगाम: सरकार ने लागू किए सख्त आईटी नियम

आज से एआई वीडियो पर सख्ती AI-Generated का लेबल अनिवार्य: नए आईटी एक्ट में एआई वीडियो, फर्जी और डीपफेक कंटेंट पर लगेगी लगाम, सरकार ने 10 फरवरी को जारी किए थे नए नियम
केंद्र सरकार ने एआई-जनित डीपफेक को नियंत्रित करने के लिए नए दिशा-निर्देश लागू किए हैं। अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भ्रामक कंटेंट की शिकायत पर उसे 3 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा।

जयपुर। डिजिटल दौर में तेजी से बढ़ रहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित वीडियो, खासकर डीपफेक और मॉर्फ्ड कंटेंट, को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने नए आईटी नियमों के तहत सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ये दिशा-निर्देश मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के प्रावधानों और आईटी नियम 2021 में किए गए संशोधनों के आधार पर लागू किए जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य एआई तकनीक के दुरुपयोग, फर्जी खबरों और डीपफेक वीडियो के प्रसार पर रोक लगाना है। भारत सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डीपफेक और भ्रामक कंटेंट के बढ़ते खतरों को देखते हुए आईटी नियम 2021 में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। फरवरी 2026 में जारी नई गाइडलाइंस के तहत एआई से बने वीडियो को लेकर कड़े नियम लागू किए गए हैं। 

एआई डीपफेक को लेकर सरकार के नए नियम

केंद्र सरकार ने AI-Generated कंटेंट को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए, जिनका पालन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को करना होगा। सरकार ने 10 फरवरी को नए नियम जारी किए हैं, जो 20 फरवरी से लागू होंगे। केंद्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में संशोधन किया है। इन नियमों के तहत अब अक से बने या बदले गए कंटेंट को भारत के डिजिटल कानूनों के दायरे में औपचारिक रूप से शामिल किया गया है।

3 घंटे में हटेगा फर्जी गलत अक कंटेंट

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को डीपफेक या भ्रामक अक कंटेंट को तीन घंटे के अंदर हटाना होगा। अब 36 घंटे की जगह, सिर्फ 3 घंटे में एक्शन लेना होगा। इसके अलावा 15 दिन की विंडो घटाकर 7 दिन कर दी गई है और  24 घंटे की डेडलाइन को घटाकर 12 घंटे किया गया है।

किन वीडियो पर यह नियम नहीं लागू होंगे? 

सभी एआई वीडियो पर लेबल लगाना जरूरी नहीं है। कुछ मामलों में छूट दी गई है:
रूटीन एडिटिंग : वीडियो की क्वालिटी सुधारने, कलर एडजस्टमेंट, बैकग्राउंड नॉइज कम करने, या क्रॉप करने जैसे मामूली बदलावों पर यह नियम लागू नहीं होगा।
शैक्षिक/तकनीकी उद्देश्य : यदि एआई का उपयोग केवल सीखने-सिखाने के उद्देश्य, दस्तावेज बनाने या वीडियो के तकनीकी पहलुओं (जैसे सबटाइटल) को बेहतर बनाने के लिए किया गया है और उससे कोई गलतफहमी पैदा नहीं होती है।
गैर-भ्रामक सामान्य सुधार: जो बदलाव कंटेंट का अर्थ नहीं बदलते, उन्हें छूट है। 
फिल्म, वेब सीरीज या मनोरंजन के लिए बनाए गए एआई इफेक्ट्स, यदि स्पष्ट रूप से काल्पनिक हों, तो उन पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा।
व्यंग्य, पैरोडी या कलात्मक प्रस्तुति, जिसमें किसी को भ्रमित करने का इरादा न हो, नियमों के दायरे से बाहर मानी जा सकती है।
हालांकि, यदि इन श्रेणियों के वीडियो भी किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा, निजता या सार्वजनिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाते हैं, तो उन पर कार्रवाई संभव होगी।

नियम न मानने पर क्या होगा?

यदि कोई प्लेटफॉर्म इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसे मिलने वाली सेफ हार्बर सुरक्षा (जिसके तहत प्लेटफॉर्म्स पर यूजर के कंटेंट के लिए कानूनी कार्रवाई नहीं होती) छीन ली जा सकती है। सरकार ने यह भी साफ किया है कि अगर प्लेटफॉर्म्स इन नए नियमों के तहत एआई कंटेंट पर कार्रवाई करते हैं, तो धारा 79 के तहत मिलने वाली सुरक्षा उन पर लागू रहेगी यानी वे केवल यूजर के पोस्ट के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराए जाएंगे।

यह क्यों किया जा रहा है? 

डीपफेक पर लगाम: मशहूर हस्तियों और सामान्य लोगों के चेहरे/आवाज का इस्तेमाल कर बनाए जा रहे फर्जी वीडियो से देश में अव्यवस्था और बदनामी फैल रही थी।
पारदर्शिता: सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल दुनिया में यूजर को यह पता चले कि वह असली वीडियो देख रहा है या एआई से बना नकली। 

नए आईटी नियमों (एआई वीडियो के लिए गाइडलाइन) में क्या है? 

अनिवार्य लेबलिंग : एआई या किसी अन्य तकनीक से बने फोटो, वीडियो या आॅडियो (जिसे सिंथेटिक कंटेंट कहा गया है) पर अब स्पष्ट और प्रमुख रूप से AI-Generated का लेबल लगाना अनिवार्य है।
3 घंटे में हटाया जाएगा : कोई एआई-जनित वीडियो या डीपफेक किसी की मानहानि करता है, अश्लील या भ्रामक है, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को सरकार या कोर्ट के आदेश के बाद 3 घंटे के भीतर हटाना होगा।
यूजर की जवाबदेही: कंटेंट अपलोड करते समय यूजर को खुद बताना होगा कि क्या सामग्री एआई-जनित है। प्लेटफॉर्म्स को भी इसे चेक करना होगा।
अनट्रेसेबल मेटा डेटा : प्लेटफॉर्म्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि एआई कंटेंट में ऐसी जानकारी हो जिससे यह पता चले कि यह असली नहीं है। 
चुनाव, दंगा, सांप्रदायिक तनाव या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में भ्रामक वीडियो को तुरंत ब्लॉक किया जाए।
शिकायत निवारण तंत्र: हर प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को भारत में नोडल अधिकारी नियुक्त करना होगा।
डीपफेक पर सख्ती: किसी व्यक्ति की अनुमति के बिना उसकी छवि या आवाज का एआई से उपयोग करने पर कार्रवाई की जाएगी।
बच्चों से जुड़ा कंटेंट: नाबालिगों से संबंधित एआई वीडियो पर विशेष निगरानी और त्वरित हटाने की व्यवस्था लागू होगी। बच्चों के मामले में सरकार अधिक संवेदनशील और सख्त है।

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