डॉलर के मुकाबले रुपया पस्त : कच्चे तेल की कीमतों और भारी मांग से 95.97 के स्तर पर फिसला
बाजार के उतार-चढ़ाव और RBI की नजर
मुंबई। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार (Interbank Foreign Exchange Market) में 30 सितंबर 2026 को भारतीय रुपये की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) की ओर से डॉलर की निरंतर मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने रुपये पर दबाव बनाया। शुरुआती कारोबार में ही रुपया पिछले बंद भाव के मुकाबले 3 पैसे की गिरावट के साथ 95.97 प्रति डॉलर पर आ गया। इससे पिछले कारोबारी सत्र (29 सितंबर) को रुपया ₹95.98 के स्तर पर बंद हुआ था।
बाजार के उतार-चढ़ाव और RBI की नजर
विदेशी मुद्रा डीलरों के अनुसार, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारतीय मुद्रा लगातार दबाव का सामना कर रही है। हालांकि, बाजार को बहुत अधिक गिरने से बचाने के लिए सरकारी बैंकों के माध्यम से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मौके पर डॉलर की बिकवाली कर स्थिति को संभालने का प्रयास किया। फिलहाल वैश्विक बाजार में छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स (DXY) 0.04% की बढ़त के साथ 101.40 पर कारोबार कर रहा है।
शेयर बाजार पर भी दिखा असर
रुपये की इस कमजोरी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर भारतीय घरेलू शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। आज शुरुआती सत्र में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों द्वारा वैश्विक बाजार के रुख और स्थानीय मुद्रा के अवमूल्यन को देखते हुए सतर्कता बरती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंचे स्तर पर बनी रहीं, तो आयात बिल बढ़ने के कारण आने वाले दिनों में रुपये में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

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