हर काम में परफेक्ट बनने की चाहत में बन रही हैं, सिंड्रोम का शिकार
आज के लाइफस्टाइल में मल्टी टास्किंग होना समय की मांग है,महिलाओं में तो ये स्किल बचपन से ही डेवलप होने लगता है, कहा जाता है कि पुरुषों की तुलना में महिलाएं एक साथ कई काम कर सकती हैं,घर के कामकाज से लेकर बच्चों की परवरिश,उनकी जरूरतों को पूरा करना,दफ्तर के काम और सही बजट में घर चलाना जैसी जिम्मेदारियां अधिकतर महिलाएं ही उठाती रही हैं,लेकिन आज के मॉडर्न लाइफ में हर काम को अकेले पूरा करना और परफेक्ट तरीके से करना आसान काम नहीं होता।
प्रतियोगिता के इस युग में कई बार महिलाएं इसकी वजह से स्ट्रेस और एग्जायटी की शिकार हो जाती हैं,कई बार तो उनमें डिप्रेशन के लक्षण भी नजर आने लगते हैं।
मनोवैज्ञानिक भाषा में इसे सुपरवूमन सिंड्रोम या डिजीज का नाम दिया गया है,आॅफिस गोइंग, न्यू मॉम, होममेकर जैसी जिम्मेदारियों को एक साथ निभा रही कई महिलाओं में नींद ना आने से लेकर चक्कर आना, अत्यधिक तनाव में रहना आदि जैसे लक्षण दिखते हैं जिसे सुपरवुमन सिंड्रोम माना जा सकता हैं।
चिड़चिड़ापन
कई महिलाओं में यह देखा जाता है कि वे हर वक्त चिड़चिड़ापन महसूस करती हैं। छोटी- छोटी बातें उन्हें इरिटेट करती हैं और वे किसी सिंपल सी बात पर भी ओवर रिऐक्ट कर जाती हैं। यह हर काम में परफेक्ट परफॉर्म करने का दबाव हो सकता है।
नींद न आना
अगर आप रात भर नहीं सो पातीं या आपको दिन भर बिस्तर से बाहर आने का मन नहीं करता तो थकान, स्ट्रेस और एंग्जायटी का ये कारण हो सकता है, यह भी सुपरवूमन सिंड्रोम का एक बड़ा लक्षण है, ऐसा होने पर जरूरी है कि आप अपने डेली रुटीन से थोड़ा ब्रेक लें और सेल्फकेयर पर ध्यान दें।
बातों को भूलना
अगर आप इन दिनों छोटी -छोटी बातें भूल जाती हैं तो यह भी सुपरवूमन सिंड्रोम का लक्षण हो सकता है,दरअसल आपका दिमाग हर वक्त किसी दूसरे काम को सोचने और प्लान बनाने में व्यस्त होता है,ऐसे में अगर आप बिना ध्यान दिए कोई काम निपटा रही हैं तो भूलना स्वाभाविक ही है, इस वजह से आपका मन काम में नहीं लगता ।
तनाव और पसीना
कई महिलाएं काम के दौरान मांसपेशियों में खिंचाव महसूस करती हैं और थोड़ा भी काम करने पर पसीने से तर हो जाता है,यही नहींए आपके शरीर में जगह जगह दर्द और खिंचाव भी महसूस होता रहता है,इस तरह के लक्षण बताते हैं कि आपको रिलैक्स होने की जरूरत है, फिजिकली और मेंटली भी।

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