483 में से 347 पद खाली : खेल परिषद की कोचिंग व्यवस्था राम भरोसे, कोचों की कमी से प्रशिक्षण प्रभावित

आखिरी बार 2012 में हुई भर्ती

483 में से 347 पद खाली : खेल परिषद की कोचिंग व्यवस्था राम भरोसे, कोचों की कमी से प्रशिक्षण प्रभावित

राजस्थान खेल परिषद गंभीर स्टाफ संकट से जूझ रही, 483 में से 347 पद खाली। कोचों की भारी कमी के कारण प्रशिक्षण व्यवस्था कॉन्ट्रेक्ट स्टाफ पर निर्भर। 41 जिलों में केवल दो खेल अधिकारी, गतिविधियां प्रभावित। 2012 के बाद भर्ती नहीं हुई।

जयपुर। प्रदेश में खेलों के विकास की जिम्मेदारी संभाल रही राजस्थान खेल परिषद इन दिनों गहरे स्टाफ संकट से जूझ रही है। परिषद में स्वीकृत 483 पदों में से 347 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं, जिससे खेल गतिविधियों और प्रशिक्षण व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ रहा है। सबसे चिंताजनक स्थिति प्रशिक्षकों की है, जहां 268 स्वीकृत पदों में से 192 पद रिक्त हैं और महज 76 स्थायी कोच ही कार्यरत हैं। कोचों की भारी कमी के चलते परिषद की पूरी प्रशिक्षण व्यवस्था अनुबंध आधारित कोचों पर निर्भर हो गई है। वर्तमान में एजेंसी के माध्यम से करीब 700 कॉन्ट्रेक्ट कोच लगाए गए हैं, लेकिन इनकी निगरानी के लिए पर्याप्त स्थाई स्टाफ तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे हालात में खिलाड़ियों को गुणवत्तापूर्ण और नियमित प्रशिक्षण मिलना चुनौती बना हुआ है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार करने के दावे सवालों के घेरे में हैं। इस बीच, जयपुर में होने वाले आईपीएल मैचों के दौरान परिषद का सीमित स्टाफ आयोजन में व्यस्त हो जाता है, जिससे करीब एक से डेढ़ माह तक अन्य खेल गतिविधियां लगभग ठप हो जाती हैं।

41 जिले, 2 खेल अधिकारी :

जिला स्तर पर भी स्थिति बेहद खराब है। प्रदेश के 41 जिलों में खेल गतिविधियों के संचालन के लिए सिर्फ दो जिला खेल अधिकारी ही तैनात हैं। इनमें एक अधिकारी डूंगरपुर में कार्यरत हैं, जबकि दूसरे लंबे समय से बीमार चल रहे हैं। अधिकांश जिलों में यह पद खाली होने के कारण खेल गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। कई जगहों पर तो खेल परिषद का कोई नियमित कर्मचारी तक नहीं है और जिम्मेदारी शिक्षा विभाग के पीटीआई संभाल रहे हैं।

एकेडमियों में भी नहीं कोचिंग स्टाफ :

Read More आईपीएल-2026 : बारिश से धुला केकेआर और पंजाब किंग्स का मुकाबला, दोनों टीमों को मिला 1-1 अंक

प्रदेशभर में संचालित विभिन्न खेलों की 34 खेल एकेडमियों की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। यहां भी स्थाई कोचों का अभाव है और प्रशिक्षण पूरी तरह कॉन्ट्रेक्ट कोचों के भरोसे चल रहा है। विशेषज्ञ कोचिंग के दावों के बावजूद स्थाई स्टाफ की कमी इन अकादमियों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर रही है।

Read More आईपीएल-2026 : ऋषभ पंत ने कप्तानी पारी खेल लखनऊ को चखाया जीत का स्वाद, सनराइजर्स ने आखिरी ओवर तक किया संघर्ष

आखिरी बार 2012 में हुई भर्ती :

Read More फीफा विश्व रैंकिंग : 8 साल बाद फ्रांस फिर नंबर वन पर पहुंचा, वियतनाम ने मलेशिया पर 3-1 जीत के बाद 99वें स्थान पर लगाई छलांग 

खेल परिषद में अंतिम बार प्रशिक्षकों की भर्ती वर्ष 2012 में हुई थी। इसके बाद कई बार भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन हर बार सरकार बदलने के साथ इसे रद्द कर दिया गया। अब 140 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया कर्मचारी चयन बोर्ड के माध्यम से कराने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए प्रस्ताव भी भेजा गया है।

इन पदों के लिए भी मांगी अनुमति :

इस बीच परिषद ने सरकार से सीधी भर्ती के 136 पदों को भरने की भी अनुमति मांगी है। इनमें खेल अधिकारी, खेल प्रबंधक, सहायक खेल प्रबंधक, कोच ग्रेड-1 और ग्रेड-2, कनिष्ठ सहायक, गेम्स बॉय और चौकीदार जैसे पद शामिल हैं।

 

 

 

Post Comment

Comment List

Latest News

होटल, ईंट भट्टे और घरों में बिजली चोरी पकड़ी, 12.87 लाख रुपए का वसूला जुर्माना होटल, ईंट भट्टे और घरों में बिजली चोरी पकड़ी, 12.87 लाख रुपए का वसूला जुर्माना
जयपुर डिस्कॉम की सतर्कता शाखा ने जगतपुरा और कानोता क्षेत्र में विद्युत चोरी के सात मामले पकडे़। इनमें 12 लाख...
उत्तराखंड में बड़ा हादसा : पहाड़ से गिरे बोल्डर की चपेट में आया टेम्पो ट्रेवलर, 3 लोग घायल
‘मातृभूमि - मे वॉर रेस्ट इन पीस’ का नया गाना ‘मेरा जी नहीं भरा’ हुआ रिलीज, जैन शॉ और अभिश्री सेन की केमिस्ट्री ने बढ़ाया आकर्षण
सुरंग बनाकर 9.58 लाख लीटर क्रूड ऑयल चोरी : तेल का मुख्य खरीदार गिरफ्तार, सात आरोपी पहले ही गिरफ्तार
कैश विवाद के बाद जस्टिस यशवंत वर्मा ने दिया इस्तीफा : राष्ट्रपति को भेजा पत्र, दिल्ली स्थित घर में मिले थे जलते हुए नोट
पीएम बेंजामिन नेतन्याहू का ऐलान : इज़रायल जल्द शुरू करेगा लेबनान के साथ सीधी शांति वार्ता, लेबनानी हमले में 300 लोगों की मौत
राजश्री पान मसाला विज्ञापन मामला : सलमान खान के हस्ताक्षरों की जांच के लिए फाइल एफएसएल भेजने के निर्देश, अदालत ने कहा- सलमान को आना ही पड़ेगा