क्रिकेट में भी ‘गुरु’ रहे पीयूष पांडे : रणजी ट्रॉफी में किया राजस्थान का प्रतिनिधित्व, अरुण लाल, कीर्ति आजाद, सुनील वालसन और रमन लाम्बा जैसे खिलाड़ियों की कप्तानी भी की
डीयू को जिताई रोहिंगटन बारिया ट्रॉफी
जयपुर। विज्ञापन जगत में अपनी टेग लाइन से ‘एड गुरु’ के नाम से प्रसिद्ध हुए पीयूष पांडे का क्रिकेट में भी अहम योगदान रहा। वे खुद एक बेहतरीन क्रिकेटर भी रहे। उन्होंने रणजी ट्रॉफी में राजस्थान का प्रतिनिधित्व किया। जयपुर के सेंट जेवियर स्कूल से क्रिकेट की शुरूआत करते हुए वह स्कूल टीम के कप्तान रहे। बाद में गोलछा जिमखाना और फिर जयपुर ब्लूज क्लब के लिए खेले। सत्तर के दशक में रणजी ट्रॉफी और कर्नल सीके नायडू ट्रॉफी जैसे महत्वूर्ण टूर्नामेंटों में पांडे के साथ खेले अमृत माथुर, डॉ. बिमल सोनी, प्रहलात सिंह और रोनी शर्मन सरीखे खिलाड़ियों ने कहा पांडे की क्रिकेट में प्रोफेशनलिज्म थी और उनके प्रोफेशन में हमेशा क्रिकेट की सोच रही।
रेलवे के खिलाफ किया रणजी में डेब्यू :
पीयूष पांडे ने राजस्थान के लिए पांच रणजी ट्रॉफी मैच खेले। विकेट कीपर बल्लेबाज के रूप में पांडे ने 1977-78 में रेलवे के खिलाफ दिल्ली के करणी सिंह स्टेडियम में रणजी ट्रॉफी में डेब्यू किया। अपने रणजी करियर में पांडे ने 5 मैचों में 105 रन बनाए, 7 कैच लपके और दो स्टंप किए। उन्होंने मध्य क्षेत्र की अंडर-22 टीम की कप्तानी भी की।
डीयू को जिताई रोहिंगटन बारिया ट्रॉफी :
दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से पढ़ाई के दौरान उन्होंने अरुण लाल और अमृत माथुर जैसे खिलाड़ियों के साथ क्रिकेट खेला। उन्होंने दो बार दिल्ली यूनिवर्सिटी को रोहिंगटन बारिया ट्रॉफी का चैंपियन बनाया। एक बार तो टीम पांडे की कप्तानी में ही चैंपियन बनी। तब गोवा में खेले गए फाइनल में दिल्ली ने मुंबई यूनिवर्सिटी को हराया था। दिल्ली टीम में जहां अरुण लाल, कीर्ति आजाद, सुनील वालसन और रमन लाम्बा सरीखे खिलाड़ी शामिल थे, वहीं मुम्बई की ओर से रवि शास्त्री और बलविंदर संधु जैसे नामी खिलाड़ी खेले थे।

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