लक्ष्य से 74 प्रतिशत पीछे मुफ्त कोचिंग योजना : सरकार से 2.5 गुना अधिक खर्च कर रहे लोग, जयराम ने कहा- मुनाफा कमाने वाली कोचिंग इंडस्ट्री ने ली सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था की जगह
योजना का बजट हर वर्ष कम
नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 17 जून को कोटा में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में शिक्षा के क्षेत्र के महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाते हुए कहा था कि मुनाफा कमाने वाली कोचिंग इंडस्ट्री ने सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था की जगह ले ली है और भारतीय परिवार कोचिंग केंद्रों पर सरकार द्वारा शिक्षा में किए जाने वाले निवेश से 2.5 गुना अधिक खर्च कर रहे हैं। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने शुक्रवार को कहा कि इसी खुलासे के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बढ़ते जनदबाव से बचने की कोशिश में 15 अगस्त को छात्रों के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की घोषणा की है, हालांकि सरकार की मुफ्त कोचिंग योजना का प्रदर्शन लोगों में भरोसा पैदा नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को तीन वर्षों में 10,500 उम्मीदवारों को मुफ्त कोचिंग के लिए नामांकित करना था लेकिन अब तक केवल 2,790 छात्रों का ही नामांकन हुआ है, जो लक्ष्य का महज 26 प्रतिशत है।
रमेश ने कहा, इस योजना का बजट हर वर्ष कम हुआ है और पिछले वर्ष इस पर किया गया खर्च निर्धारित बजट के आधे से भी कम था। ये तथ्य सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की संसदीय स्थायी समिति की नवीनतम रिपोर्ट में सामने आए हैं, जिसे 10 अगस्त 2026 को संसद में पेश किया गया। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि देश की चरमराई शिक्षा व्यवस्था को बुनियादी तौर पर ठीक करने और सार्वजनिक शिक्षा में दोबारा निवेश करने के बजाय मोदी सरकार ने सार्वजनिक संसाधनों को ऑनलाइन कोचिंग में लगाने का फैसला किया है। उन्होंने इसे जवाबदेही से बचने की एक नौटंकी करार दिया और कहा कि सरकार पहले ही दिखा चुकी है कि इस योजना को सफलतापूर्वक लागू करने की उसकी क्षमता बेहद कम है।

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