सिंगरौली खनन मामले में संवेदनशीलता से विचार करे सरकार, जयराम बोले- कोयला खनन परियोजना के खिलाफ कानूनी चुनौती का खुला है विकल्प
परियोजना से छह लाख से अधिक पेड़ों की कटाई होनी थी
कांग्रेस ने सिंगरौली (मप्र) में घने जंगल क्षेत्र में प्रस्तावित कोयला खनन परियोजना पर चिंता जताई है। जयराम रमेश ने कहा कि लगभग 7000 एकड़ क्षेत्र, जिसे पहले ‘नो-गो जोन’ माना गया था, में खनन से 6 लाख पेड़ों की कटाई हो सकती है। एनजीटी ने देरी से मामला खारिज किया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने नया कानूनी विकल्प खुला रखा है।
नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा कि मध्य प्रदेश के सिंगरौली के घने जंगल में कोयला खनन परियोजना के खिलाफ कानूनी चुनौती का विकल्प अभी खुला है और सरकार को पर्यावरण तथा जनहित से जुड़े इस मामले में संवेदनशीलता के साथ विचार करना चाहिए। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने शनिवार को सोशल मीडिया एक पर लिखा कि पिछले वर्ष मई में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के घने जंगल क्षेत्र में कोयला खनन के एक प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग 7000 एकड़ का यह क्षेत्र वर्ष 2011 में जंगलों की समृद्धि और हाथी कॉरिडोर की मौजूदगी के कारण खनन के लिए नो-गो एरिया के रूप में चिह्नित किया गया था। बड़ी बात यह भी थी कि इस परियोजना से छह लाख से अधिक पेड़ों की कटाई होनी थी।
उन्होंने कहा कि इसकी संवेदनशीलता को लेकर कार्यकर्ताओं ने इस मंजूरी को राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) में चुनौती दी, लेकिन गत अप्रैल में न्यायाधिकरण ने याचिका देरी से दायर होने के आधार पर मामले के गुण-दोष पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। न्यायाधिकरण के इस आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई। रमेश ने कहा कि 21 मई 2026 को उच्चतम न्यायालय ने देरी के मुद्दे पर सुनवाई के बाद याचिकाकर्ताओं को याचिका वापस लेने तथा कानून के तहत उपलब्ध अन्य विकल्प अपनाने की अनुमति दे दी। उन्होंने कहा कि इससे यह स्पष्ट है कि मामला अभी भी कानूनी चुनौती के लिए खुला है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पर्यावरणीय और जनहित से जुड़े इस विषय पर उच्च न्यायालय तथा उच्चतम न्यायालय संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ विचार करेंगे।

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