अनोखी शादी: रस्मों की जगह दूल्हा-दुल्हन ने एक-दूसरे को भेंट की ' भारतीय संविधान' की प्रति, जानें पूरा मामला
केरल में अनोखा 'संवैधानिक विवाह': संविधान की प्रतियां बदल रचाई शादी
पलक्कड़ के जितिन और शीतल ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के बजाय 'भारतीय संविधान' की प्रतियों का आदान-प्रदान कर विवाह किया। सादगी से संपन्न इस विवाह ने लोकतांत्रिक मूल्यों का अनूठा संदेश दिया है।
त्रिशूर। केरल के पलक्कड़ जिले में एक युवा जोड़े ने नए साल की शुरुआत बेहद अनूठे और प्रेरणादायक अंदाज में की। इस जोड़े ने आडंबरों को दरकिनार करते हुए 'भारतीय संविधान' की प्रतियों का आदान-प्रदान कर विवाह के बंधन में बंधने का फैसला किया। यह 'संवैधानिक विवाह' इस साल की शुरूआत में नेनमारा स्थित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में संपन्न हुआ, जिसकी चर्चा अब पूरे राज्य में हो रही है।
पलक्कड़ के अयालोर में ग्राम सहायक के पद पर तैनात दूल्हा जितिन और कोल्लम निवासी शिक्षिका शीतल ने इस सादे समारोह के जरिए समाज को सादगी का संदेश दिया। समारोह के दौरान केवल परिवार के करीबी सदस्य और कुछ मित्र ही उपस्थित थे। नवविवाहित जोड़े ने बताया कि वे अपने जीवन की नई शुरुआत देश के सर्वोच्च कानून और उसके लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए करना चाहते थे। इस विवाह में किसी भी प्रकार की पारंपरिक औपचारिकताएं नहीं निभाई गईं।
शीतल और जितिन के अनुसार, उनका उद्देश्य एक ऐसी मिसाल कायम करना था जहां शादी केवल निजी उत्सव न होकर संवैधानिक आदर्शों का प्रतिबिंब बने। केरल के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस तरह की शादियों के बढ़ते चलन और उसमें संवैधानिक मूल्यों को जोडऩे की सराहना की है।

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