संवेदनशील और सक्षम लोगों से मिलता है न्याय : मशीनों से नहीं, सीजेआई ने कहा- संस्थाओं को एक सूत्र में बांधता है संस्थागत क्षमता में निवेश
उच्च अधिकारियों के एक समूह को सबोधित कर रहे थे
पटना उच्च न्यायालय परिसर में सात अलग अलग भवनों और संरचनाओं का उद्घाटन करने के बाद न्यायधीशों, अधिवक्ताओं और उच्च अधिकारियों के एक समूह को सबोधित कर रहे थे।
पटना। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्याधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा कि न्याय मशीनों से नहीं, बल्कि संवेदनशील और सक्षम लोगों से मिलता है और इसी समझ के साथ न्याय व्यवस्था को एक समावेशी, सक्षम और मानवीय न्याय प्रणाली के निर्माण की दिशा में निरंतर आगे बढ़ना होगा। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश पटना उच्च न्यायालय परिसर में सात अलग अलग भवनों और संरचनाओं का उद्घाटन करने के बाद न्यायधीशों, अधिवक्ताओं और उच्च अधिकारियों के एक समूह को सबोधित कर रहे थे।
पाटलिपुत्र की धरती अनुशासन की प्रतीक
सीजेआई ने कहा कि न्याय मशीनों से नहीं, बल्कि संवेदनशील और सक्षम मनुष्यों से मिलता है और इसी समझ के साथ हमें एक समावेशी, सक्षम और मानवीय न्याय प्रणाली के निर्माण की दिशा में निरंतर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि पाटलिपुत्र की धरती अनुशासन, तर्क और प्रशासनिक विवेक की प्रतीक रही है। यही वह भूमि है जहाँ से आधुनिक प्रशासन, नैतिकता और लोककल्याण की अवधारणाएँ विकसित हुईं।
संस्थाओं को एक सूत्र में बांधता है संस्थागत क्षमता में निवेश
सूर्यकांत ने कहा कि सदियों से जो तत्व हमारी संस्थाओं को एक सूत्र में बांधता है, वह है संस्थागत क्षमता में निवेश-चाहे वह भौतिक संसाधन हों, प्रशासनिक ढांचा हो या मानव संसाधन। जब हम क्षमता निर्माण की बात करते हैं, तो उसका सीधा संबंध न्याय तक प्रभावी पहुंच से होता है। इसका उद्देश्य ऐसा न्याय तंत्र विकसित करना है जो बढ़ती जनसंख्या, मुकदमों की संख्या और विवादों की जटिलता की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सके।

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