महाकुंभ : आज से प्रयागराज की गागर में सनातनियों का सागर 

24 घंटे प्रयागराज की निगरानी

महाकुंभ : आज से प्रयागराज की गागर में सनातनियों का सागर 

दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन महाकुंभ सोमवार को प्रयागराज में शुरू होने जा रहा है। प्रयाग रूपी गागर में दुनियाभर के सनातनियों का सागर समाएगा

प्रयागराज। दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन महाकुंभ सोमवार को प्रयागराज में शुरू होने जा रहा है। प्रयाग रूपी गागर में दुनियाभर के सनातनियों का सागर समाएगा। कुंभ के दौरान श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में पावन डुबकी लगाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि महाकुंभ में स्नान करने से व्यक्ति के सभी पाप मिट जाते हैं और पुण्यकारी फलों की प्राप्ति होती है। कहते हैं कि महाकुंभ के दौरान अगर प्रयागराज में व्यक्ति तीन दिन भी नियमपूर्वक स्नान कर लेता है तो उसे एक सहस्र अश्वमेघ यज्ञों को करने के बराबर पुण्य प्राप्त हो जाता है। महापर्व के दौरान कभी भी स्नान-दान कर पुण्य फल पा सकते हैं लेकिन शाही स्नान के दिन संगम में डुबकी लगाने से विशेष फलों की प्राप्ति होती है। 

महाकुंभ 2025 शाही स्नान की तिथियां

पहला शाही स्नान- 14 जनवरी 2025, मकर संक्रांति
दूसरा शाही स्नान- 29 जनवरी 2025, मौनी अमावस्या
तीसरा शाही स्नान- 3 फरवरी 2025, सरस्वती पूजा, बसंत पंचमी

24 घंटे प्रयागराज की निगरानी
डीजीपी प्रशांत कुमार ने बताया कि इसके साथ ही 113 होमगार्ड व बीआरडी जवान, 11 कंपनी केंद्रीय रिजर्व पुलिस और 15 कंपनी पीएसी को तैनात किया गया है। साथ ही जल मार्ग की निगरानी के लिए एक कंपनी दो प्लाटून पीएसी भी लगाई गई है। इसके अलावा 10 वज्रवाहन, 15 ड्रोन, 5 बम निरोधक दस्ता के जरिये 24 घंटे प्रयागराज में प्रवेश करने पर निगरानी रखी जा रही है। डीजीपी ने कहा कि महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए यूपी पुलिस कृत संकल्पित है।

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वीआईपी प्रोटोकॉल नहीं
महाकुंभ मेला क्षेत्र के डीआईजी वैभव कृष्ण और महाकुंभ मेला क्षेत्र के एसएसपी राजेश द्विवेदी ने सुबह तड़के महाकुंभ क्षेत्र का निरीक्षण किया था।  मुख्य स्नान से एक दिन पहले और एक दिन बाद नो व्हीकल जोन बनाया है, वहां कोई वाहन नहीं जाने दिया जाएगा। कोई वीआईपी प्रोटोकॉल नहीं है। मेला क्षेत्र में किसी भी 2 पहिया या 4 पहिया वाहन को जाने की अनुमति नहीं होगी। मल्टी लेयर बैरियर लगाए हैं।

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यूपी सरकार की तैयारी पूरी
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में होने वाले महाकुंभ 2025 को लेकर योगी सरकार पूरी तरह से अलर्ट है। प्रदेश सरकार कुंभ को दिव्य और भव्य बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए हैं। महाकुंभ की सुरक्षा को लेकर यूपी पुलिस की ओर से विशेष इंतजाम किए गए हैं। इसके साथ ही न केवल प्रयागराज बल्कि उससे जुड़ने वाले 7 रास्तों और 8 जिलों की सुरक्षा व्यवस्था भी चाक-चौबंद कर दी गई है।

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शाही स्नान का महत्व  
शाही स्नान यानि वह स्नान जिसको करने से मन की अशुद्धियां भी दूर हो जाती है। 14 जनवरी 2025 को महाकुंभ का पहला शाही स्नान किया जाएगा। शाही स्नान के दौरान सबसे पहले नागा साधु स्नान करते हैं। इसके बाद ही आम जनता स्नान कर सकती है। शाही स्नान के दिन संगम में स्नान करने से कई गुना अधिक पुण्यकारी फलों की प्राप्ति होती है। इतना ही नहीं शाही स्नान के दिन स्नान करने से जातक को इस जन्म के साथ ही पिछले जन्म के पापों से भी मुक्ति मिलती है। महाकुंभ में शाही स्नान के दिन स्नान करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।

महाकुंभ मेला 12 साल में एक बार 
बता दें कि महाकुंभ पूरे 12 वर्षों बाद लगता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब अमृत से भरा कुंभ यानी कलश बाहर आया था तब देवताओं और राक्षस के बीच बारह दिन तक भयंकर युद्ध हुआ था। युद्ध के दौरान देवताओं के संकेत पर इंद्र देव के पुत्र जयंत अमृत से भरा कलश लेकर बड़े ही तीव्र गति से भागने लगे तब दैत्यगण जयंत का पीछा करने लगे। इस युद्ध के दौरान जिन-जिन स्थानों पर कलश से अमृत की बूंदें गिरी थी, वे स्थान प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक है।  जहां-जहां अमृत की बूंदे गिरी वहां-वहां कुंभ मेला का आयोजन किया जाता है।

8 जिलों में 102 मोर्चे
यूपी के डीजीपी प्रशांत कुमार ने बताया कि महाकुंभ को लेकर सीएम योगी ने प्रयागराज को जोड़ने वाले 7 मार्गों व उन मार्गो पर पड़ने वाले जिलों के साथ ही सीमावर्ती जिलों सहित प्रयागराज के चारों ओर अभेद्य सुरक्षा का एक चक्रव्यूह बनाये जाने के निर्देश दिए थे। इस निर्देश पर प्रयागराज को जोड़ने वाले सभी 7 सड़क मार्गों और उन मार्गों पर पड़ने वाले 8 जिलों में आने-जाने वाले वाहनों और व्यक्तियों की चेकिंग के लिए 102 मोर्चे बनाए गए हैं। सड़क मार्गों पर अचूक सुरक्षा व्यवस्था के लिए कुल 1026 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। इसमें 71 निरीक्षक, 234 उपनिरीक्षक, 645 आरक्षी व मुख्य आरक्षी और 76 महिला आरक्षी शामिल है।

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