मोहन भागवत का दावा: RSS की विचारधारा दुनिया को संघर्षों से निकाल सकती है, राष्ट्र और पूरी दुनिया का कल्याण एक-दूसरे से जुड़ा
वैश्विक संघर्षों के समाधान के लिए 'जियो और जीने दो' और 'वसुधैव कुटुंबकम' पर जोर
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शनिवार को लंदन में संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में हिंदू सभ्यता की विचारधारा को वैश्विक संघर्षों के समाधान का आधार बताते हुए कहा कि दुनिया को मतभेदों के बजाय समानताओं पर ध्यान देना और 'जियो और जीने दो' की भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए। भागवत ने कहा, "विविधता स्वाभाविक है। हमें विविधता के साथ रहना सीखना होगा। हमें अलगाव या संघर्ष पैदा नहीं करना चाहिए।" उन्होंने कहा कि दुनिया बाहरी तौर पर भले ही बंटी हुई दिखे, लेकिन वास्तव में सभी एक-दूसरे से जुड़े हैं और यही हिंदू विचार का मूल है।
उन्होंने कहा कि 'हिंदू' शब्द को केवल धार्मिक परंपराओं या जीवनशैली के आधार पर नहीं समझा जा सकता। अलग-अलग रास्ते एक ही सत्य तक पहुंच सकते हैं। "मैं सही हूं, आप भी सही हैं" की भावना के साथ विभिन्न विचारों और मार्गों का सम्मान करते हुए साथ रहना चाहिए। 'हिंदू राष्ट्र' की अवधारणा पर उन्होंने कहा कि इसका संबंध किसी राजनीतिक व्यवस्था या शासन प्रणाली से नहीं, बल्कि सार्वभौमिक कल्याण से है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र युद्ध शुरू नहीं करता, बल्कि समृद्धि, मानवता और प्रकृति के साथ भाईचारे को बढ़ावा देता है। उन्होंने 'वसुधैव कुटुंबकम' का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यक्ति, राष्ट्र और पूरी दुनिया का कल्याण एक-दूसरे से जुड़ा है।
विदेशों में रहने वाले हिंदुओं से उन्होंने कहा कि अपनी जन्मभूमि से मिले मूल्यों का सम्मान करते हुए कर्मभूमि के प्रति पूरी निष्ठा रखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन में रहने वाले हिंदुओं के लिए ब्रिटेन उनकी कर्मभूमि है और भारत की सेवा करने के लिए उन्हें अपनी कर्मभूमि के प्रति निष्ठा छोड़ने की जरूरत नहीं है। भागवत ने युवाओं को दुनिया को बेहतर बनाने के लिए आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने 'सेवा' को निस्वार्थ भाव से करने पर जोर देते हुए कहा कि सेवा किसी पहचान या सम्मान के लिए नहीं, बल्कि ईश्वर के निकट पहुंचने का अवसर है।
आरएसएस के शताब्दी वर्ष का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संघ को अगले 100 वर्षों तक अपने कार्य को जारी रखना है और हिंदू समाज के व्यापक संगठन का लक्ष्य जल्द पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संघ की गतिविधियां खेल, शिक्षा, महिला कल्याण और सामाजिक सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में फैली हैं। उन्होंने 'पंच परिवर्तन' का उल्लेख करते हुए कहा कि सामाजिक बदलाव केवल सरकार की नीतियों से नहीं, बल्कि लोगों के व्यवहार में परिवर्तन से आएगा। प्लास्टिक का कम इस्तेमाल, जल संरक्षण, आत्मनिर्भरता और नागरिक अनुशासन इसके महत्वपूर्ण हिस्से हैं। उन्होंने कहा, "संघ यह नहीं करेगा, स्वयंसेवक करेंगे।" साथ ही उन्होंने संघ के बाहर काम कर रहे संगठनों और लोगों के साथ सहयोग की बात कही। भागवत ने कहा, "जो हमें जोड़ता है, उस पर ध्यान दें, न कि जो हमें बांटता है।" उन्होंने कहा कि ऐसा करने से समाज और समुदाय समृद्ध होंगे तथा दुनिया बेहतर जगह बनेगी।

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