मंदिरों से नकदी, सोना-चांदी और प्राचीन प्रतिमाओं की चोरी का सिलसिला जारी, जानें
सिर्फ चोर नहीं, खरीदारों का नेटवर्क भी चुनौती
जयपुर। राजस्थान में मंदिर अब केवल आस्था के केंद्र नहीं रह गए हैं, चोरों के निशाने पर भी हैं। दानपेटियों की नकदी से लेकर चांदी के छत्र-मुकुट, सोने के आभूषण और सदियों पुरानी अष्टधातु प्रतिमाओं तक पर चोर हाथ साफ कर रहे हैं। वर्ष 2026 में सामने आए कई मामलों ने मंदिरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। खास बात यह है कि कई वारदातों में चोर रात के अंधेरे में मंदिरों में दाखिल हुए और कुछ ही मिनटों में कीमती सामान समेटकर फरार हो गए। हालांकि पुलिस ने इन्हें दबोच लिया लेकिन मंदिर बार-बार चोरों के निशाने पर हैं।
केस नम्बर-1: जलाभिषेक के बहाने दिन में रेकी, रात में चांदी चोरी
रामनगरिया के जगतपुरा स्थित शिव मंदिर में 29 अगस्त की रात दो बदमाशों ने मंदिर में चोरी की। सीसीटीवी फुटेज में दोनों दिन में श्रद्धालु बनकर मंदिर में गतिविधियों की रैकी करते नजर आए। रात में मंदिर में घुसकर शिवलिंग पर लगी चांदी उखाड़ ली। पुलिस ने सुमित अग्रवाल और शंकरपुरी समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर चांदी गलाकर ईंट बनाने वाले और चांदी खरीदने वाले मनोज सोगानी को भी पकड़ा। डेढ़ किलो चांदी और 44 हजार रुपए बरामद किए।
केस नम्बर-2: चूरू में जैन मंदिर से 13 प्रतिमाएं चोरी
चूरू के तारा नगर के पास करीब 1200 वर्ष पुराने जैन मंदिर से 29 जून को 17 में से 13 अष्टधातु प्रतिमाएं चोरी हो गर्इं। चोरों ने तीन स्थानों के ताले तोड़े। मौके से गैस कटर और रेलवे का टिकट भी मिला। पुलिस ने दिल्ली-मथुरा के आरोपियों को पकड़ा।
केस नम्बर-3: 1100 साल पुराने मंदिर में चोरी
आमेर के साईवाड़ गांव में करीब 1100 वर्ष पुराने लक्ष्मीनारायण मंदिर से अष्टधातु प्रतिमा चोरी हुई थी। पुलिस ने करीब 500 सीसीटीवी फुटेज खंगालकर दो भाइयों को गिरफ्तार किया।
केस नम्बर-4 :
उदयपुर के लदानिया स्थित खाटूश्यामजी मंदिर की दानपेटी से आठ लाख रुपए से अधिक की नकदी चोरी हुई। हनुमानगढ़ के मां ब्राह्मणी माता मंदिर से करीब आठ किलो चांदी की मूर्तियां और आभूषण चोरी के मामले में काले उर्फ संतोष को गिरफ्तार किया।
केस नम्बर-5 :
कालवाड़ स्थित बांदी नदी बालाजी मंदिर से अगस्त में चांदी का छत्र-मुकुट चोरी हुआ। पुलिस ने दो चोरों और चोरी का माल खरीदने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार किया।
सिर्फ चोर नहीं, खरीदारों का नेटवर्क भी चुनौती :
मंदिरों में चोरी की घटनाओं में केवल चोर ही सक्रिय नहीं हैं। चोरी के बाद चांदी गलाने, आभूषणों को खपाने और प्राचीन प्रतिमाओं को खरीदने वाला नेटवर्क भी पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है। पिछले वर्षों में भी प्रदेश के कई जिलों में एक ही रात में कई मंदिरों को निशाना बनाने और देवस्थलों से चोरी स्वीकार करने के मामले सामने आए हैं।
मंदिरों की सुरक्षा के लिए अलग प्रोटोकॉल जरूरी :
मंदिरों में सीसीटीवी कैमरों के साथ 30 से 90 दिन की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखना, दानपेटियों को स्थाई रूप से लॉक करना और रात में नकदी नहीं रखने जैसे कदम जरूरी हैं। सोने-चांदी के आभूषणों की फोटो, वजन और पहचान चिह्न सहित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाना चाहिए। प्राचीन प्रतिमाओं का हाई-रिजॉल्यूशन फोटो, माप, वजन और पहचान चिह्न सहित डेटाबेस बनाया जाए।

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