पीएम मोदी ने की केरल के केयरगिवर्स के थिरुवथिरा की शानदार प्रस्तुति की तारीफ, संस्कृति को बचाने के लिए की प्रवासियों की प्रशंसा 

सांस्कृतिक कूटनीति: पीएम मोदी ने सराहा केरल का थिरुवथिरा नृत्य

पीएम मोदी ने की केरल के केयरगिवर्स के थिरुवथिरा की शानदार प्रस्तुति की तारीफ, संस्कृति को बचाने के लिए की प्रवासियों की प्रशंसा 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल के केयरगिवर्स समुदाय द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक थिरुवथिरा नृत्य की सराहना की। उन्होंने प्रवासी भारतीयों को देश की समृद्ध कलात्मक विरासत का वैश्विक राजदूत बताया। 'एक्स' पर साझा संदेश में पीएम ने कहा कि यह समर्पण भारतीय संस्कृति को सात समंदर पार जीवित रखने और सामुदायिक बंधन को मजबूत करने का बेहतरीन उदाहरण है।

यरुशलम। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को केरल के केयरगिवर्स समुदाय के सदस्यों की थिरुवथिरा की शानदार प्रस्तुति की तारीफ की और विदेशों में देश की कलात्मक विरासत को बचाए रखने में प्रवासी भारतीयों की भूमिका पर प्रशंसा की। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, केरल के केयरगिवर्स समुदाय के सदस्यों द्वारा दी गयी थिरुवथिरा की एक शानदार प्रस्तुति देखी। इस प्रस्तुति में केरल की सांस्कृतिक परंपराओं की महानता और इसके प्रति जुनून रखने वालों का समर्पण दिखा। यह देखकर गर्वांवित हूं कि हमारे प्रवासी जहाँ भी जाते हैं, भारत की समृद्ध कलात्मक विरासत को बचाए रखते हैं। 

गौैरतलब है कि, थिरुवथिरा केरल का एक पारंपरिक, महिलाओं द्वारा किया जाने वाला समूह नृत्य है, जिसे मुख्य रूप से ओणम और मलयालम महीने धनु (दिसंबर-जनवरी) में किया जाता है। इसे कैकोट्टिकली के नाम से भी जाना जाता है, जिसमें पारंपरिक कसवू साड़ी पहनी महिलाएं एक दीपक के चारों ओर ताली बजाते हुए शिव-पार्वती को समर्पित गीत गाती हैं। केरल के मंदिर और त्योहारों की परंपराओं से बहुत करीब से जुड़ा हुआ है। इसे अक्सर नारीत्व, भक्ति और सामुदायिक बंधन के उत्सव के रूप में देखा जाता है। 

प्रधानमंत्री मोदी की टिप्पणियाँ विदेशों में बसे भारतीय समुदायों के प्रति सरकार की निरंतर पहुँच और सांस्कृतिक कूटनीति पर उसके जोर को रेखांकित करती हैं। वर्षों से मोदी ने वैश्विक स्तर पर भारत की सांस्कृतिक पहचान को सशक्त बनाने में प्रवासी भारतीयों के योगदान को अक्सर सराहा है। केयरगिवर्स समुदाय के सदस्यों (जिनमें से कई विदेशों में हेल्थकेयर और सहायक सेवाओं में काम करते हैं) ने अक्सर अपनी जड़ों से जुड़े रहने और अपने मेजबान समाज में योगदान देने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये हैं।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ऐसी प्रस्तुति न केवल परंपराओं को जिंदा रखती हैं, बल्कि दुनिया को भारत के अलग-अलग सांस्कृतिक अभिव्यक्ति से भी परिचित कराती हैं। उन्होंने कहा कि प्रवासियों के नेतृत्व वाली सांस्कृतिक पहल भारत और दूसरे देशों के बीच एक जरूरी पुल का काम करती हैं। प्रधानमंत्री का यह वैश्विक मंच पर क्षेत्रीय कला को बढ़ावा देने और प्रवासी भारतीयों की युवा पीढिय़ों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहने के लिए प्रेरित करने की कोशिशों के बीच आया है।

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