राहुल गांधी का आरोप : भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर तोड़ते है पार्टी, फिर छीनते है चुनाव चिह्न
करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना हैरानी की बात नहीं
नई दिल्ली। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग पर राजनीतिक दलों में फूट डालने और उनसे उनका चुनाव चिह्न छीनने के लिए मिलकर काम करने का आरोप लगाया और इसे भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को खतरे में डालने वाला करार दिया। एक्स पर गांधी ने शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और तृणमूल कांग्रेस से जुड़े विवादों का हवाला देते हुए एक ही तरीके को बार-बार दोहराये जाने का आरोप लगाया। गांधी ने कहा, पहले शिवसेना, फिर एनसीपी और अब तृणमूल कांग्रेस। हर बार एक ही ढर्रा है कि भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर एक पार्टी को तोड़ते हैं, फिर उसका चुनाव चिह्न छीन लिया जाता है।
चुनावी निष्पक्षता से जुड़ी अपनी व्यापक चिंताओं से इस मुद्दे को जोड़ते हुए उन्होंने कहा, जब पूरी की पूरी पार्टी चोरी हो सकती है, तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं। इन घटनाक्रमों को एक बड़ी गिरावट का लक्षण बताते हुए गांधी ने कहा, वोट चोरी। सरकार चोरी। अब पार्टी चोरी। ये हमारी लोकतांत्रिक गिरावट के प्रतीक बन गये हैं। चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी जनादेश की रक्षा करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बजाय वह लोगों के फैसले को पलटने वाली ताकतों की मदद कर रहा है।
यह टिप्पणी तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके जोड़े फूल चुनाव चिह्न को लेकर प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच विवाद के बाद चुनाव आयोग की कार्यवाही के दौरान आयी है। इस कार्रवाई ने पार्टी की मान्यता और चुनाव चिह्न आवंटन को लेकर बहस फिर से छेड़ दी है। यह मुद्दा पहले महाराष्ट्र में देखा गया था, जहां शिवसेना और राकांपा के प्रतिद्वंद्वी गुटों ने पार्टी के नामों और चुनाव चिह्नों पर दावा ठोका था तथा चुनाव आयोग ने चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश के तहत मामलों का फैसला किया था। इस विवाद को केवल एक पार्टी तक सीमित न रखकर बड़ा रूप देते हुए गांधी ने कहा, यह लड़ाई सिर्फ ममता बनर्जी की लड़ाई नहीं है। यह हर उस राजनीतिक दल और हर उस मतदाता की लड़ाई है, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है। कांग्रेस ने हाल के महीनों में चुनावी पारदर्शिता और चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाये हैं, जबकि चुनाव आयोग का रुख रहा है कि किसी मान्यता प्राप्त दल की पहचान पर परस्पर विरोधी दावों को निपटाने के लिए स्थापित कानूनी ढांचे के अनुसार ही चुनाव चिह्न विवादों पर निर्णय लिये जाते हैं।

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