ईरान पर प्रतिबंधों की निगरानी अटकी, रूस-चीन ने प्रस्ताव पर लगाया वीटो
स्वतंत्र पैनल के कार्यकाल को बढ़ाना था मकसद
न्यूयॉर्क। रूस-चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उस अमेरिकी समर्थन वाले प्रस्ताव पर वीटो लगा दिया, जिसका मकसद ईरान पर प्रतिबंधों की निगरानी करने वाले विशेषज्ञों के स्वतंत्र पैनल के कार्यकाल को बढ़ाना था। प्रस्ताव के पक्ष में 11 वोट पड़े, जबकि पाकिस्तान और सोमालिया ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। दो स्थायी सदस्यों के वीटो लगाने से यह प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। यह मतदान ईरान के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों की कानूनी स्थिति पर जारी मतभेद के बीच हुआ। 2015 के परमाणु समझौते यानी 'संयुक्त व्यापक कार्य योजना' (जेसीपीओए) के तहत ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के स्नैपबैक तंत्र को लागू करने के बाद सितंबर 2025 में ये प्रतिबंध दोबारा लगाये गये थे।
ये प्रतिबंध ईरान के परमाणु और सैन्य कार्यक्रमों पर लागू होते हैं। रूस-चीन का मानना है कि परमाणु समझौते का समर्थन करने वाले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 'प्रस्ताव संख्या 2231' की अवधि समाप्त होने के साथ ही अक्टूबर 2025 में ये प्रतिबंध खत्म हो चुके हैं, जबकि अमेरिका और यूरोपीय सरकारें इस व्याख्या का विरोध करती हैं। विशेषज्ञों का यह पैनल प्रतिबंधों के अमल की निगरानी करने और संदिग्ध उल्लंघनों की रिपोर्ट सुरक्षा परिषद को सौंपने के लिए अधिकृत था। सदस्य देशों के बीच पैनल के गठन पर सहमति न बन पाने के कारण इन विशेषज्ञों की नियुक्ति हालांकि कभी नहीं हो सकी।
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की उप राजदूत जेनिफर लोकेटा ने कहा कि इस वीटो से स्वतंत्र निगरानी में कमी आयेगी। सुश्री लोकेटा ने मतदान के बाद सुरक्षा परिषद से कहा, विशेषज्ञों के स्वतंत्र पैनल के बिना, यह परिषद प्रतिबंध उल्लंघनों पर निष्पक्ष और सबूत-आधारित रिपोर्टिंग का अपना मुख्य जरिया खो देती है। रूस के राजदूत वासिली नेबेंजिया ने मॉस्को के रुख का बचाव करते हुए कहा कि ईरान मुद्दे से निपटने के सुरक्षा परिषद के तरीकों के राजनीतीकरण की कोशिशों का रूस विरोध करता है। नेबेंजिया ने कहा, हम पश्चिमी सहयोगियों से आग्रह करते हैं कि वे ईरान के मोर्चे पर अपनी खतरनाक कार्रवाइयों को रोकें, जो फारस की खाड़ी में संकट के समाधान को और उलझाने का जोखिम पैदा करती हैं।
ईरान ने इस वीटो का स्वागत किया और संयुक्त राष्ट्र में उसके मिशन ने रूस-चीन को उनके 'निरंतर और सिद्धांतवादी रुख' के लिए धन्यवाद दिया। इस मतदान से यह बड़ा विवाद सुलझ नहीं पाया है कि संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध कानूनी रूप से लागू रहेंगे या नहीं। यह टकराव ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़े तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ईरान के साथ आर्थिक संबंधों को लेकर चीन पर दबाव बनाने के बीच हुआ है। ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 24 सितंबर को अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन में बैठक करने वाले हैं, जिसमें ईरान विवाद पर भी चर्चा होने की संभावना है।

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