गणतंत्र दिवस परेड में वंदे मातरम् और आत्मनिर्भर भारत की थीम : प्रदेशों और 13 मंत्रालयों की निकाली झांकियां, बिहार की झांकी में दिखी मखाने की ताकत की झलक
राष्ट्रीय एकता की सशक्त झलक देखने को मिली
ग्लोबल की थाली में सुपरफूड के नाम से मखाने पर केंद्रित इस झांकी की प्रस्तुति ने लोगों का मन मोह लिया। इस झांकी ने बिहार के मखाने के मिथिलांचल से बाहर निकलकर वैश्विक स्तर पर एक 'सुपरफूड' के रूप में पहचान बनाने की कहानी को प्रदर्शित किया।
नई दिल्ली। कर्तव्य पथ पर सोमवार को 77वीं गणतंत्र दिवस परेड में वंदे मातरम् और आत्मनिर्भर भारत की थीम के साथ 17 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों और 13 मंत्रालयों की झांकियां निकाली गयीं, जिनमें गुजरात की झांकी में तिरंगे की यात्रा और बिहार की झांकी में मखाने की ताकत की झलक दिखाई दी। इस वर्ष देश के विभिन्न राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और मंत्रालयों की झांकियों में भारत की सांस्कृतिक विरासत, स्वतंत्रता संग्राम, आत्मनिर्भरता, तकनीकी प्रगति और राष्ट्रीय एकता की सशक्त झलक देखने को मिली। राज्य की झाकियों में गुजरात की झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र बनी। कर्तव्य पथ पर निकलने वाली परेड में इस झांकी में 1906 से लेकर 1947 तक राष्ट्रीय ध्वज की यात्रा को दिखाया गया। गुजरात की झांकी 'वंदे मातरम' पर केंद्रित थी। इस झांकी के सबसे अगले हिस्से पर मैडम भीका कामा की प्रतिमा थी। मैडम कामा ने ही 1906 में 'वंदे मातरम्' के साथ भारतीय ध्वज की परिकल्पना रची थी। झांकी में कामा की प्रतिमा को इस ध्वज के साथ दिखाया गया। झांकी के सबसे पिछले हिस्से पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा चरखे के साथ दर्शायी गयी थी। दोनों के बीच तिरंगे की यात्रा के पांच महत्वपूर्ण चरणों को दिखाया गया। इसमें 1906, 1907, 1917, 1921 और अंतत: 1931 का तिरंगा प्रदर्शित किया गया। इस बीच बिहार ने अपने प्रसिद्ध मखाने पर केंद्रित झांकी प्रस्तुत की। लोकल से ग्लोबल की थाली में सुपरफूड के नाम से मखाने पर केंद्रित इस झांकी की प्रस्तुति ने लोगों का मन मोह लिया। इस झांकी ने बिहार के मखाने के मिथिलांचल से बाहर निकलकर वैश्विक स्तर पर एक 'सुपरफूड' के रूप में पहचान बनाने की कहानी को प्रदर्शित किया।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार इस झांकी के केंद्र में मौजूद महिला की प्रतिमा मखाना तैयार करने वाली महिला मजदूरों की मेहनत का प्रतीक है। इस झांकी को 21 महिलाओं ने ही मिलकर तैयार भी किया है। राज्यों की झांकियों में असम की झांकी 'आशारिकांडी' ने राज्य के टेराकोटा शिल्प ग्राम की पारंपरिक कला को प्रदर्शित किया। छत्तीसगढ़ ने 'द मंत्रा ऑफ फ्रीडम, वंदे मातरम्' थीम वाली झांकी के साथ स्वतंत्रता की भावना को प्रस्तुत किया। हिमाचल प्रदेश ने 'देव भूमि, वीर भूमि' के रूप में अपनी आध्यात्मिक और वीर परंपरा को सामने रखा। जम्मू-कश्मीर की झांकी में वहां के हस्तशिल्प और लोक नृत्यों की झलक देखने को मिली। केरल के'वॉटर मेट्रो और शत-प्रतिशत डिजिटल साक्षरता, आत्मनिर्भर भारत के लिये आत्मनिर्भर केरल विषय के जरिये आधुनिक विकास को दर्शाया गया।
महाराष्ट्र की झांकी आत्मनिर्भरता पर केंद्रित रही, जबकि मणिपुर ने' कृषि क्षेत्रों से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक: समृद्धि की ओर विषय को प्रदर्शित किया। नागालैंड की झांकी में'हॉर्नबिल महोत्सव : संस्कृति, पर्यटन और आत्मनिर्भरता का उत्सव को दिखाया गया। पुडुचेरी ने'शिल्प, संस्कृति और ऑरोविल की दृष्टि की समृद्ध विरासत को प्रस्तुत किया, जबकि राजस्थान ने'रेगिस्तान की स्वर्णिम छाप : बीकानेर स्वर्ण कला (उस्ता कला) को दर्शाया। तमिलनाडु की झांकी' समृद्धि का मंत्र : आत्मनिर्भर भारत विषय पर आधारित थी और उत्तर प्रदेश ने 'बुंदेलखंड की संस्कृति' को प्रदर्शित किया। पश्चिम बंगाल'भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में बंगाल की भूमिका को रेखांकित किया गया, जबकि मध्य प्रदेश ने 'पुण्यश्लोक लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर को समर्पित झांकी प्रस्तुत की। पंजाब की झांकी में गुरु तेग बहादुर साहिब के शहीदी के 350 वर्ष का स्मरण किया गया।
केंद्र सरकार और सशस्त्र बलों की झांकियों में भी राष्ट्रीय शक्ति और उपलब्धियों का प्रदर्शन किया गया। वायु सेना मुख्यालय की झांकी'युद्ध के बाद राष्ट्र निर्माण में पूर्व सैनिकों की भूमिका को दर्शाया गया। नौसेना मुख्यालय की झांकी'समुद्र से समृद्धि विषय पर आधारित थी। इसके अलावा आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, पंचायती राज मंत्रालय, विद्युत मंत्रालय और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की झांकी भी परेड में शामिल हुयीं।

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