शिक्षा, स्वास्थ्य और इन्फ्रास्ट्रक्चर में बढ़े बजट, रिसर्च एन्ड डवलपमेंट का बजट काफी कम, इसे बढ़ाना जरूरी

स्वदेशी उत्पादों व रोजगार सृजन को बढ़ावा मिले तो युवा टेलेंट का नहीं होगा पलायन

 शिक्षा, स्वास्थ्य और इन्फ्रास्ट्रक्चर में बढ़े बजट, रिसर्च एन्ड डवलपमेंट का बजट काफी कम, इसे बढ़ाना जरूरी

प्राथमिक स्तर पर मेडिकल फैसिलिटी बढ़ाने पर हो जोर, ताकि जीवन बच सके, एजुकेशन पर जीडीपी का 4.4 फीसदी, इसे 6 प्रतिशत करने की जरूरत।

कोटा। केन्द्र सरकार की ओर से एक दिन बाद बजट पेश किया जाना है। इस बजट में जहां सरकार की नीतियों व विजन को प्रदर्शित किया जाता है। वहीं देश के हर वर्ग को सरकार से उम्मीद रहती है कि उनके लिए कुछ नया व सुधारात्मक होगा। केन्द्र सरकार के बजट से कोटा व हाड़ौती संभाग के लोगों को क्या उम्मीदें हैं। इस संबंध में दैनिक नवज्योति कार्यालय में शुक्रवार को  बजट से आशा और अपेक्षा  विषय पर टॉक शो का आयोजन किया गया। जिसमें सभी वर्गों का प्रतिनिधित्म हुआ। उसमें सबसे महत्वपूर्ण तत्थ सामने आया ुकि शिक्षा और स्वास्थ्य के साथ ही मूलभूत सुविधाओं के लिए सरकार को बजट बढ़ाने की आवश्यकता है।  नए स्टार्टअप में निवेश करने वालों को प्रोत्साहन देने और स्वदेशी उत्पादों व रोजगार सृजन को बढ़ावा दिया जाएगा तो देश के युवाओं का विदेशों में होने वाले पयालन को रोका जा सकेगा और यहां की अर्थव्यवस्था भी सुदृढ़ होगी। 

रूरल हैल्थ सेक्टर में बजट बढ़ाने की आवश्कता
देश के हैल्थ सेक्टर में जीडीपी का डेढ़ से दो फीसदी ही बजट दिया जाता है। जबकि विदेशों में यह 6 से 8 फीसदी तक है। ऐसे में इस क्षेत्र में कम से कम ढाई से तीन फीसदी बजट तो होना ही चाहिए। शहरी व ग्रामीण हैल्थ सेक्टर  के अंतर को समाप्त करना होगा। ग्रामीण में लोग अधिक व शहरों में डॉक्टर अधिक हैं। जैनेरिक व ब्रांडेड दवाओं में भेद समाप्त होना चाहिए। दवाओं की कीमत पर अंकुश लगना चाहिए। संभाग स्तर पर हैल्थ केयर सेंटर व काउंसर नियुक्त करने की जरूरत है। संविदा कर्मेी व न्यूनतम मजदूरी वालों को पे कमीशन में शामिल किया जाना चाहिए। स्कूलों की स्थिति में सुधार के लिए सीएसआर के तहत ही बजट का प्रावधान किया जाए। इसी तरह खेलों को बढ़ावा देने के लिए जनप्रतिनिधि अपने फंड से राशि दें।  
-डॉ. विजय सरदाना पूर्व प्राचार्य मेडिकल कॉलेज कोटा
 
गुजरात मॉडल को अपनाते हुए जीएसटी स्लैब हो एक समान 
देश में जीएसटी के  स्लैब एक समाान होने चाहिए। हालांकि पहले की तुलना में इसमें सुधार हुआ है। लेकिन एक ही सेक्टर से जुड़े व्यवसायों में अभी भी कहीं 5 तो कहीं 18 फीसदी जीएसटी वसूल किया जा रहा है। कोटा  की अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए यहां पर्यटन को बढ़ावा देने, पर्यटन स्थलों का प्रचार करने की जरूरत है। हाड़ौती के खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने की जरूरत है। ट्रम्प टैरिफ के बाद सरकार ने जिस तरह से स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा दिया है उसे पहले ही कर देना चाहिए था। उद्योगों को प्रोत्साहन के लिए गुजरात मॉडल को अपनाते हुए एकल विंडों पर ही सुविधाएं उपलध्ब करवाए जाने की जरूरत है। 
-अशोक माहेश्वरी, संभाग अध्यक्ष होटल फैडरेशन आॅफ राजस्थान

बजट बढ़े तो मजबूत हो शिक्षा का संस्थागत ढांचा
सरकारी स्कूलों की स्थिति में पहले से सुधार तो हुआ है लेकिन अभी भी शिक्षा के संस्थागत ढांचे को मजबूत करने की जरूरत है। यह तभी संभव है जब सरकार द्वारा स्कूल भवनों व शिक्षा में सुधार के लिए बजट को बढ़ाया जाए। झालावाड़ स्कूल हादसे के बाद जर्जर भवनों का सर्वे हुआ और एसडीआरएफ के तहत बजट भी मिला। इसके बाद काफी सुधार आया है।  लेकिन यह ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।  स्कूल भवनों के लिए सरकार के साथ ही भामाशाहों को भी आगे आने की जरूरत है। साथ ही सरकारी स्कूलों को भी हाईटेक बनाने की जरूरत है। शिक्षा से ही उन्नति संभव होती है। 
-स्नेहलता शर्मा चीफ ब्लॉक एजुकेशन आॅफिसर कोटा

8 वें पे कमीशन में पेंशन अधिनियम हो निरस्त
सरकार द्वारा 8 वें पे कमीशन में जो पेंशन अधिनियम लागू किया जा रहा है। जिसकी  बजट में घोषणा होने वाली है। सरकार को उसे निरस्त करना चाहिए। इससे 2025 से पहले सेवानिवृत्त हुए करीब 69 लाख पेंशनर्स प्रभावित होंगे। इस अधिनियम में पेंशन व पारिवारिक पेंशन को बनद करने या उसमें कमी व परिवर्तन का प्रावधान है।  सरकारी कर्मचारियों के  सेवानिवृत्त होने के बाद कर्मचारियों व उनके परिवार के लिए पेंशन काफी सहारा होता है। इसे बंद करना गलत है। वहीं कौशल विकास के क्षेत्र में काम करने वालों को जो सरकार की तरफद्द से बजट दिया जाता है वह निजी क्षेत्र की तुलना में दसवा हिस्सा ही है। इसे बढ़ाकर समान किए जाने की जरूरत है। 
-आर.पी. गुप्ता पेंशनर,चैयरमेन जन शिक्षण संस्थान

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रिसर्च आधारित शिक्षा पर हो फोकस
रिर्सच शिक्षा और नई तकनीक पर आधारित शिक्षा पर फोकस करते हुए उसके लिए बजट में प्रावधान करने की जरूरत है। जिससे विदेश जाने वाले युवाओं को यहीं रोका जा सके।  साथ ही शिक्षा के लिए  बजट बढ़ाया जाए जिससे प्राइमरी सहित अन्य एज्यूकेशन सेक्टर मजबूत होंगे। वैसे भारत अभी हर स्थिति में मजबूत है। अब अन्य देश भी भारत की तरफ  देख रहे है। ऐसी स्थिति में सरकार को आने वाले बजट में ट्रंप टैरिफ का मुकाबला करने के लिए जीएसटी में राहत देने की उम्मीद है। अभी यूरोप के साथ जो डील हुई है। उससे काफी फर्क पड़ा है। अभी जीडीपी का बजट में शिक्षा पर 4.6 प्रतिशत ही खर्च किया जा रहा है इसे बढ़ाकर 6 फीसदी किए जाने की आवश्यकता है। 
-मीरा गुप्ता,सह आचार्य अर्थशास्त्रराजकीय कला कन्या महाविद्यालय कोटा 

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टैक्स में छूट मिले तो पूरी हो आम आदमी की जरूरतें
वर्तमान में हर चीज को लग्जरी बना दिया गया है। जिससे बहुत सारी चीजें आम आदमी की पहुंच से दूर हो गई है। ऐसे में बजट में आम आदमी को ध्यान में रखते हुए प्रावधान किए जाने चाहिए। इनकम टैक्स में छूट का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए। जिससे आम आदमी की जरूरतों को पूरा किया जा सके। शिक्षा क्षेत्र में बजट बढ़ाने की आवश्यकता है। इसके साथ शहर में प्रदूषण एक बड़ा मुद्दा है। प्रदूषण की वजह से मेडिकल खर्च बढ़ रहा है। आम आदमी को मेडिकल क्षेत्र में रिलीफ मिले बजट में ऐसे प्रावधान करना चाहिए। इसे कम करने और आम आदमी की मूलभूत जरूरतों को पृूरा करने  पर बजट में प्रावधान किया जाना चाहिए। 
-आरती जनार्दन सोशल वर्कर व  गृहिणी

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अदालतों का मजबूत हो इंफ्रास्ट्रक्चर
बजट में सरकार को न्याय क्षेत्र के लिए भी विशेष बजट देना चाहिए। कुछ देशों में न्यायप्रणाली की व्यवस्था बहुत ही अच्छी हैं। इस तरह से सरकार को भी देश में त्वरित न्याय की व्यवस्था करनी चाहिए। जिससे पीड़ित को जल्दी राहत मिल सके।  साथ ही संभागीय मुख्यालय होने के बाद भी कोटा मेंं अदालतों का इंफ्रा स्ट्रक् चर मजबृूत नहीं है। मिनी सचिवालय में एक ही जगह पर सभी अदालतें हों। हाईकोर्ट की बैंच स्थापित की जाए। साथ ही जितनी भी करदाता हैं उन्हें विदेशों की तर्ज पर  सुविधाओं के रूप में रिटर्न देने की जरूरत है। युवाओं को विदेश जाने से रोकने के लिए यहां सुविधाएं उपलब्ध करवाने की जरूरत है। 
-सोनल विजय, एडवोकेट 

खिलाडियों के लिए हो बजट, सुविधाएं भी मिले
राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर चयनति व मैडल प्राप्त खिलाडियोंं के लिए अलग से बजट होना चाहिए। हालत यह है कि खिलाडियों को मिलने वाली पुरुस्कार राशि तो कई सालों से नहीं मिल रही। वहीं सुविधाओं के नाम पर भी नाम मात्र का बजट है। यहां तक कि  खिलाडियों  को स्वयं के खर्च पर ही प्रतिभा दिखानाी पड़ रही है। जबकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को खेलों में आगे बढने में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। खिलाडियों के  चोटिल होने पर सरकार की ओर से कोई सहायता नहीं दी जाती है। खिलाडियों ं को आर्थिक संबल प्रदान करने के लिए बजट में सरकार को प्रावधान करने होंगे। 
-प्रियांशी गौतम, इटरनेशनल वुशु खिलाड़ी

इनकम टैक्स की सरल हो प्रक्रिया
बजट में नया इनकम टैक्स नियम लागू हो और प्रक्रिया को सरल किया जाए। जिससे  टैक्स चोरी को कम किया जाए और अधिक से अधिक लोग टैक्स जमा करवा सकें। रिसर्च व विकास के लिए बजट दिया जाए। साथ ही युवाओं के लिए रिसर्च के साथ आय का जरिया भी मुहैया कराया जाए। जिससे युवा टेलेंट को विदेश जाने से रोका जा सके। युवा शिक्षा लेकर देश में ही काम करना तो चाहते हैं लेकिन उन्हें अपेक्षा अनुरूप सुविधाएं नहीं मिल पाती। कृषि प्रधान देश होने से कृषि क्षेत्र में टैक्स में छूट का प्रावधान बढ़ाया जाए। 
-रितु बोहरा, चार्टर्ड एकाउंटेंट

स्टार्टअप में निवेशकों को मिले प्रोत्साहन
एमएसएमई में लोन की गति तेज हुई है। लंबित भुगतान में हालांकि तेजी आई है। फिर भी हम  उद्यम  स्थापना के लिए लोगों को सलाह देते हैं कि पूरी तरह से लोन पर निर्भर नहीं रहें। सरकार की अपनी चाल होती है। सरकार काफी प्रयास कर रही है।   कोटा में भी अब पहले की तुलना में स्टार्टअप की संख्या बढ़ी है। आईआईटी के युवा आकर यहां स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं। जिससे रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं। लेकिन किसी भी नए उद्यम को स्थापित होने में ढाई से तीन साल का समय लगता है। ऐसे में स्टार्टअप में निवेश करने वालों को प्रोत्साहन देने की जरूरत है। साथ ही नए -नए स्टार्टअप व उद्यमों को भी और सुविधाएं देने की जरूरत है। 
-कौस्तुभ भट्टाचार्य, स्टार्टअप सलाहकार

अकादमिक इनक्यूबेटर्स और रिसर्च गतिविधियां हो सशक्त
16 जनवरी 2016 को स्टार्टअप नीति की स्थापना के एक दशक में हुई प्रगति को देखते हुए इस योजना को अधिक संस्थागत और नियमित किये जाने की आवश्यकता है ।  राज्य में  वर्तमान में करीब 8 हजार स्टार्टअप है जिनमे से हाड़ोती में करीब 500 की संख्या को देखते हुए और ट्रिपलआई की कोटा में भूमिका को देखते हुए क्षेत्रीय आधार पर हाड़ोती को विशेष बजट का भी प्रावधान संभाग को अधिक प्रगति प्रदान करेगा।  स्टार्टअप की संख्या व उनके प्रदर्शन स्तर को देखते हुए यह राज्यहित और छात्रों के हित में होगा कि कौशल विकास से जुड़े मेंटर्स के लिए नियमितीकरण की दिशा में प्रयास किए जाएं। साथ ही अकादमिक इनक्यूबेटर्स और रिसर्च गतिविधियों को भी सशक्त किया जाए। 
 -आयुष त्यागी, स्टार्टअप सलाहकार

शिक्षा में कम या समाप्त हो जीएसटी
सरकार की ओर से शिक्षा व कोचिंग फीस पर भी जीएसटी लागू है।  यहां तक कि सरकारी विश्वविद्यालयों की फीस पर भी 30 फीसदी जीएसटी है। इसे कम या समाप्त किए जाने की जरूरत है।  डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने व कोचिंग सेक्टर को फिर से बूस्टअप करने की जरूरत है। मैंटल हैल्थ क्षेत्र में बजट देने, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को मजबूत करने व एयरपोर्ट की मांग को भी पूरी करने की आवश्यकता है। कोटा का शिक्षा के क्षेत्र में नाम है। यही कोटा को मजबूती देगा। इस क्षेत्र को फिर से मजबूती के लिए बजट में प्रावधान होने चाहिए। 
-के.आर. चौधरी असिसट्ेंट प्रोफेसर अर्थशास्त्र कोटा यूनिवर्सिटी 

कृषि उपकरणों को सस्ता करना चाहिए
बजट ऐसा होना चाहिए जो कि नागरिकों की बेसिक जरूरत को पूरा करे। वहीं शिक्षा लोन कम ब्याज दर पर और आसानी से उपलब्ध हो  जिससे अधिक से अधिक बच्चे इसका लाभ लेकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर सके।  अल्प संख्यक छात्रवृत्ति सरकार ने बंद कर दी है। जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे उच्च शिक्षा नहीं ले पा रहे हैं।  वहीं सरकार को कृषि उपकरणों को सस्ता करना चाहिए। जिससे किसानों को राहत मिल सकेगी और किसानों के उत्पादनों की लागत कम आएंगी।  कृषि में रियायतें मिलेंगी तो खाद्य पदार्थ सस्ते होने से घरेलू बजट भी कम होने से लोगों को राहत मिलेगी। 
- एडवोकेट सानिया खानम लीगल एड डिफेंस काउंसलर

 बजट  में हो रोजगार सृजन पर  जोर
रोजगार सृजन पर बजट में विशेष प्रावधान होने चाहिए। युवा बेरोजगार होकर बैठे हैं। सरकारी कार्यालयों व अस्पतालों में बड़ी संक्या में संविदा कर्मी बहुत कम मानदेय पर काम कर रहे हैं। तकनीकी रूप से सक्षम होने के बाद भी उनका मानदेय काफी कम है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि  बजट मेंकार्मिकों का मानदेय बढ़ाने का प्रावधान किया जाए। साथ ही मेडिकल की पढ़ाई करने वाले बच्चों को छात्रवृत्रि दी जाए। 
-अजय गोचर स्टूडेंट कामर्स कॉलेज कोटा

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