तीन दिगम्बर जैन संघों के 48 संतों का मिलन : 6200 श्रद्धालु बने साक्षी, आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ने दोनों आचार्यों का किया आत्मीय स्वागत
अद्भुत अवसर पर पूरा वातावरण जय जिनेन्द्र के घोष से गूंज उठा
मानसरोवर में चल रहे भगवत जिनेन्द्र महाअर्चना महोत्सव में तीन दिगम्बर जैन संघों के 48 संतों का भव्य मिलन हुआ। आचार्य प्रसन्न सागर, सुन्दर सागर और शशांक सागर महाराज के सान्निध्य में चारित्र शुद्धि महामण्डल विधान संपन्न हुआ। 6200 से अधिक श्रद्धालुओं ने 411 अर्घ्य अर्पित कर भक्ति में सहभागिता निभाई।
जयपुर। आचार्य प्रसन्न सागर महाराज के सान्निध्य में मानसरोवर में चल रहे आठ दिवसीय भगवत जिनेन्द्र महाअर्चना महोत्सव में शुक्रवार शाम एक भावविभोर कर देने वाला दृश्य देखने को मिला, जब तीन दिगम्बर जैन संघों के 48 संतों का भव्य मिलन जयकारों के बीच संपन्न हुआ। इस अद्भुत अवसर पर पूरा वातावरण जय जिनेन्द्र के घोष से गूंज उठा। आचार्य सुन्दर सागर महाराज एवं आचार्य शशांक सागर महाराज अपने-अपने संघों सहित चारित्र शुद्धि महामण्डल विधान में शामिल होने आए हैं। दोनों आचार्य संघ 32 पिच्छिकाओं के साथ बैंड-बाजों एवं श्रद्धालुओं के जुलूस के रूप में अग्रवाल फॉर्म स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर से रवाना होकर शिप्रा पथ पहुंचे, जहां उपाध्याय पियूष सागर महाराज के सान्निध्य में उनका भव्य स्वागत किया गया। जुलूस जब मुख्य विधान स्थल पर पहुंचा तो आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ने दोनों आचार्यों का आत्मीय स्वागत किया।
तीनों आचार्यों के मिलन ने राम-भरत मिलाप की स्मृति ताजा कर दी। आचार्य सुन्दर सागर महाराज ने कहा कि सभी संत एक ही बगिया के पुष्प हैं और अंतर्मना आचार्य की साधना निरंतर नई ऊंचाइयों को स्पर्श करे। आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ने कहा कि धैर्य, विवेक, बुद्धि और संकल्प से किया गया कार्य अवश्य सफल होता है। चारित्र शुद्धि महामण्डल विधान में अष्ट द्रव्य से 411 अर्घ्य अर्पित किए गए। 6200 से अधिक श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से नाचते-गाते विधान पूजा में भाग लिया।

Comment List