फिल्म रिव्यू : क्लाइमैक्स वाली फिल्म है दृश्यम 2
झूठ की फ्रेम में सच का खड़ा होना, झूठ को सच बना देता है...
जयपुर। झूठ का दायरा जितना बड़ा हो, सच के सामने बौना ही रहता है। शतरंज की बिसात पर झूठ के मोहरे जितना बड़ा किला बना लें, सच उन्हें शाह और मात दे ही देता हैं, लेकिन जब सच झूठ का हमशक्ल हो जाए तो पहचान मुश्किल है। दृश्यम 2 की कहानी दृश्यम पार्ट 1 के एंड से ही शुरू होती है। विजय पुलिस स्टेशन में लाश दफना रहा है और एक फरार मुजरिम उसका चश्मदीद गवाह है जो उसी रात पकड़ा जाता है। 7 साल बीत जाते हैं। विजय और उसका परिवार इस हादसे से आगे बढ़ वापस जीने लगते हैं, लेकिन वो हादसा उन्हें कुछ भूलने नहीं देता। विजय अपनी कहानी पर फिल्म बनाना चाहता है, उसका खुद का मल्टीप्लेक्स है, लेकिन उन्हें नहीं पता की पुलिस अब भी उनके पीछे है। मीरा का दोस्त अक्षय खन्ना नया आईजी बन के आता है और सच को सामने लाने के लिए जाल बुनता है। धीरे-धीरे पूरा परिवार शिकंजे में फंसता है। राज खुलते हैं, सबकुछ उनके खिलाफ है। सबूत, गवाह, मोटिव, लाश सब पुलिस के पास है। आखिरकार विजय अपने परिवार की हालत और हालात दोनों के आगे झुक गुनाह कुबूल कर लेता है। लेकिन मीरा(तब्बू) उसे बदला चाहिए, मकसद पूरे परिवार को सजा दिलाना है। केस कोर्ट में जाता है। शट एंड क्लोज केस, सच सबके सामने है। लेकिन क्या विजय गुनहगार साबित होगा, उसके परिवार का क्या, क्या पुलिस अपने मकसद में कामयाब होगी या फिर विजय फिर अपने परिवार को बचाकर निकल जाएगा। यही है दृश्यम 2, सटीक कहानी धीमी रफ्तार, ईमानदारी से आगे बढ़ती है, सीन बाय सीन दिलचस्प मोड़ लेती है। कैट एंड माउस की रेस, एज आॅफ थ्रिल का माहौल बनाती है। अब गया,अब गया वाला ट्विस्ट एंड टर्न, राइट टाइम पर होता है। क्लाइमैक्स फिल्म की जान है, आखिर के 15 मिनट ही, पूरी फिल्म है। संवाद पकड़ बनाते हैं। बैकग्राउंड म्यूजिक, संगीत काफी उम्दा है। निर्देशन बाढ़िया है। झूठ सच की ये लड़ाई, मिस्ट्री और थ्रिल के सांचे में डाल अभिषेक ने अच्छा काम किया है। एडिटिंग कड़क है। सिनेमेटोग्राफी फिल्म को रीयल जिंदगी से जोड़ती है। अभिनय में अजय का ठहराव, उनकी खामोशी, उनका काम और उनकी आंखे उनके किरदार को जीवंत कर देती है, इंपैक्टफुल परफॉर्मेंस है। बीवी और मां का किरदार डरा, सहमा, कमजोर होते हुए भी स्ट्रॉन्ग है। नंदनी बन श्रिया सरन अच्छी लगी हैं। घायल मां बनी तब्बू फिर दमदार लगी हैं। अक्षय खन्ना पुलिस आईजी गेटअप में अपनी छाप छोड़ते हंै। सौरभ, योगेश, इशिता दत्ता, मृणाल जाधव सभी कलाकारों का काम अच्छा है। बहरहाल दृश्यम 2 एक पावरफुल एंटरटेनमेंट है, लेकिन दर्शकों को ये कितना लुभाएगी ये दर्शक ही तय करेंगे।

Comment List